लाड़ली लक्ष्मी योजना: 2027 में बेटियों को पहली बार मिलेगी 1 लाख रुपये की परिपक्वता राशि, 21 वर्ष पूरे होने पर खाते में ट्रांसफर होंगे पैसे
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2027 में लाड़ली लक्ष्मियों को मिलेगी 1 लाख रुपये की परिपक्वता राशि, AI फोटो
भोपाल। मध्य प्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत वर्ष 2027 में पात्र बालिकाओं को पहली बार एक लाख रुपये की परिपक्वता राशि मिलने का रास्ता खुलेगा। योजना के शुरुआती वर्षों में पंजीकृत बालिकाएं अब 21 वर्ष की आयु पूरी करने जा रही हैं। निर्धारित शर्तें पूरी करने वाली बेटियां इस राशि की पात्र होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2027 को युवा वर्ष घोषित किए जाने के बीच योजना के इस महत्वपूर्ण चरण को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।
54.32 लाख बालिकाएं योजना में पंजीकृत
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने मंगलवार को योजना की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र बालिकाओं को छात्रवृत्ति और परिपक्वता राशि का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण करने और दस्तावेजों के सत्यापन में अनावश्यक देरी रोकने पर भी जोर दिया।
प्रदेश में अब तक 54 लाख 32 हजार 45 बालिकाएं लाड़ली लक्ष्मी योजना में पंजीकृत हैं। योजना के तहत 16 लाख 7 हजार बालिकाओं को 1,179 करोड़ 33 लाख रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है।
कक्षा 6 से 12वीं तक मिलती है छात्रवृत्ति
योजना के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, पात्र बालिकाओं को अलग-अलग कक्षाओं में प्रवेश के समय छात्रवृत्ति दी जाती है। कक्षा छठवीं में प्रवेश पर 2,000 रुपये, नौवीं में 4,000 रुपये तथा 11वीं और 12वीं में प्रवेश पर 6,000-6,000 रुपये दिए जाते हैं।
उच्च शिक्षा के लिए भी 25 हजार रुपये की सहायता
लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 के तहत स्नातक या व्यावसायिक पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाली पात्र बालिकाओं को 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दो किस्तों में दी जाती है। इसका उद्देश्य बेटियों को स्कूली शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
सत्यापन के बाद मिलेगी परिपक्वता राशि
वर्ष 2007 में शुरू हुई इस योजना के शुरुआती वर्षों में पंजीकृत बालिकाएं अब वयस्क हो रही हैं। वर्ष 2027 में पात्र हितग्राहियों के 21 वर्ष पूरे होने पर उन्हें एक लाख रुपये की परिपक्वता राशि मिलने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए सुपरवाइजर से लेकर कलेक्टर स्तर तक सत्यापन की व्यवस्था निर्धारित की गई है।

