दोस्त की कंपनी में पार्टनर बनेंगे IPS अनुराग सुजानिया: कॉरपोरेट और IT सेक्टर में शुरू करेंगे नई पारी; इस साल 3 आईपीएस अफसरों ने छोड़ी नौकरी
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सागर के पूर्व एसपी अनुराग सुजानिया अब आईटी सेक्टर में रखेंगे कदम, फाइल फोटो।
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस के 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया अब खाकी छोड़कर कॉरपोरेट और टेक्नोलॉजी की दुनिया में नई पारी शुरू करने की तैयारी में हैं। सागर के पूर्व एसपी सुजानिया ने आईपीएस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 2 नवंबर को डीजीपी को अपना इस्तीफा सौंपा था, जिसे आगे की कार्रवाई के लिए गृह विभाग भेज दिया गया है। हालांकि, शासन स्तर पर अभी उनके इस्तीफे को मंजूरी नहीं मिली है।
सूत्रों के मुताबिक, सुजानिया दिल्ली-एनसीआर में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं। यहां वे अपने एक मित्र की आईटी कंपनी में पार्टनर के रूप में जुड़ सकते हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस सेवा छोड़कर निजी क्षेत्र में जाने की योजना वे पिछले करीब एक साल से बना रहे थे। इस्तीफे के संबंध में उन्होंने अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय कुमार शुक्ला से मुलाकात भी की और व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया।
राजस्थान के रहने वाले हैं अनुराग सुजानिया
गौरतलब है कि पिछले महीने सागर जिले में जहरीली शराब से 20 से अधिक लोगों की मौत के बाद 27 अक्टूबर को सुजानिया को एसपी पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय में एआईजी के पद पर पदस्थ किया गया था। इसके कुछ दिन बाद ही उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया। मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले अनुराग सुजानिया ने इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की पढ़ाई की है। इसके बाद यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर आईपीएस बने और उन्हें मध्य प्रदेश कैडर मिला।
मंदसौर, मुरैना और सागर जिलों में रहे एसपी
अपने सेवाकाल में वे मंदसौर, मुरैना और सागर जैसे जिलों में एसपी रहे। मुरैना में भी जहरीली शराब कांड के बाद उन्हें एसपी पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय भेजा गया था। करीब तीन साल बाद उन्हें सागर की कमान मिली, लेकिन यहां भी शराब कांड के बाद उन्हें फिर मुख्यालय स्थानांतरित कर दिया गया। दोनों जिलों में एसपी के रूप में उनका कार्यकाल करीब छह-छह महीने का रहा।
अभिषेक तिवारी ने भी आईपीएस छोड़कर अपनाया आईटी सेक्टर
सुजानिया के इस्तीफे के साथ सागर के पूर्व एसपी अभिषेक तिवारी का मामला भी चर्चा में है। तिवारी अगस्त 2024 में सागर के शाहपुर में दीवार गिरने से नौ बच्चों की मौत की घटना के बाद एसपी पद से हटाए गए थे। बाद में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली स्थित राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) में पदस्थ हुए। इसी साल जनवरी में 42 वर्ष की उम्र में वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेकर उन्होंने भी आईपीएस की नौकरी छोड़ दी और आईटी सेक्टर से जुड़ गए।
सुनील मेहता ने भी कुछ महीने पहले लिया था वीआरएस
इस साल मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारियों में नौकरी छोड़ने का यह एक और चर्चित मामला है। इससे पहले आईपीएस सुनील मेहता ने भी वीआरएस लिया था। प्रमोटी आईपीएस मेहता सिवनी में पदस्थापना के दौरान चर्चा में आए घटनाक्रम के बाद इंदौर कमिश्नरी में डीसीपी के पद पर भेजे गए थे। इसके बाद उन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन किया था, जिसे लंबी प्रक्रिया के बाद सरकार ने मंजूर कर लिया था।

