रिटायर्ड IAS की हत्या के बाद भोपाल पुलिस सख्त: अब घरों में बिना पुलिस वेरिफिकेशन नहीं रख सकेंगे केयरटेकर, एजेंसियों को जारी हुई नई गाइडलाइन
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पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने जारी किया आदेश (फाइल फोटो)।
भोपाल। रिटायर्ड IAS अधिकारी की केयरटेकर द्वारा हत्या किए जाने के बाद भोपाल पुलिस ने घरों में काम करने वाले केयरटेकर और मरीजों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। अब शहर में मरीजों, बुजुर्गों और अन्य लोगों की देखभाल के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली निजी एजेंसियों को उनका पुलिस वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा।
पुलिस कमिश्नर ने जारी किया आदेश
पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसके तहत किसी भी कर्मचारी को घर में सेवा के लिए भेजने से पहले संबंधित थाने से उसका सत्यापन कराना होगा। यह आदेश जारी होने की तारीख से दो महीने तक लागू रहेगा।
हर कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन कराना होगा अनिवार्य
आदेश के मुताबिक, हेल्थ केयरटेकर, मरीज परिचारक, बुजुर्गों की देखभाल करने वाले सहायक, नर्सिंग अटेंडेंट और घरों में सेवा देने वाले अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले उनकी पहचान और पते की जांच करनी होगी। एजेंसियों को कर्मचारी का नाम, जन्मतिथि, स्थायी और वर्तमान पता, मोबाइल नंबर, पहचान पत्र और हाल का फोटो पुलिस थाने में उपलब्ध कराना होगा। दूसरे जिले या राज्य के निवासी कर्मचारियों के पते का भी सत्यापन कराना जरूरी होगा। जरूरत पड़ने पर उनके पुराने रोजगार और कार्य अनुभव की जांच भी की जा सकेगी।

कर्मचारी भेजने से पहले परिजनों को देनी होगी जानकारी
अब किसी भी मरीज के घर कर्मचारी भेजने से पहले एजेंसी को मरीज या उसके परिजनों को उसकी पूरी जानकारी देनी होगी। इसमें कर्मचारी का नाम, फोटो, मोबाइल नंबर, सेवा का प्रकार, आने का समय और एजेंसी का संपर्क नंबर शामिल होगा। हर कर्मचारी को फोटो वाला संस्थागत पहचान पत्र देना भी जरूरी होगा। इस कार्ड पर कर्मचारी का नाम, फोटो, कर्मचारी क्रमांक और संस्था का नाम दर्ज होना चाहिए। अगर किसी कारण से कर्मचारी को बदलना पड़ता है तो इसकी जानकारी मरीज या परिजनों को पहले देनी होगी। नए कर्मचारी का भी पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य रहेगा।
एजेंसियों को रखना होगा कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड
पुलिस ने सेवा देने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय की है। उन्हें कर्मचारियों की नियुक्ति, सेवा का प्रकार, कार्यस्थल और सेवा समाप्त होने तक का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। किस कर्मचारी को किस मरीज के घर भेजा गया, वह कब पहुंचा और कब वापस गया, इसकी जानकारी भी दर्ज करनी होगी। कर्मचारी अपने साथ किसी अनजान व्यक्ति को मरीज के घर नहीं ले जा सकेंगे। ऐसा करने के लिए मरीज या परिजनों की पहले अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा हर एजेंसी को एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो कर्मचारियों के सत्यापन, शिकायतों और आपातकालीन स्थितियों को संभालेगा।
बिना योग्यता के नहीं दे सकेंगे नर्सिंग और मेडिकल सेवाएं
आदेश में कहा गया है कि नर्सिंग और चिकित्सकीय देखभाल जैसी सेवाएं देने वाली संस्थाओं को संबंधित कानूनों के अनुसार जरूरी पंजीयन और लाइसेंस लेना होगा। कर्मचारियों को उनकी योग्यता और प्रशिक्षण के अनुसार ही काम दिया जा सकेगा। बिना जरूरी कौशल वाले कर्मचारी को ऐसा काम नहीं सौंपा जा सकेगा, जिसके लिए विशेष प्रशिक्षण जरूरी है। एजेंसियों को सुरक्षा से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी तैयार करनी होगी। इसके साथ कार्यालय का पता, संपर्क नंबर, ई-मेल और शिकायत अधिकारी की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
मरीजों की निजता और आर्थिक जानकारी की सुरक्षा जरूरी
पुलिस ने मरीजों की निजता और सम्मान का ध्यान रखने के भी निर्देश दिए हैं। कर्मचारी मरीज की बीमारी, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और परिवार की निजी बातें बिना अनुमति सोशल मीडिया या किसी अन्य सार्वजनिक माध्यम पर साझा नहीं कर सकेंगे। मरीज के पैसों से जुड़ा कोई काम भी उसकी या उसके कानूनी प्रतिनिधि की स्पष्ट अनुमति से ही किया जा सकेगा। कर्मचारियों को नशे की हालत में ड्यूटी करने और किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।
चोरी या संदिग्ध मौत की जानकारी तुरंत पुलिस को देनी होगी
अगर किसी मरीज के घर चोरी, धोखाधड़ी, जबरन वसूली, मारपीट, गुमशुदगी, यौन अपराध या संदिग्ध मौत जैसी घटना होती है तो एजेंसी को तुरंत संबंधित पुलिस थाने या आपातकालीन पुलिस सेवा को सूचना देनी होगी। ऐसी घटनाओं को एजेंसी केवल आंतरिक मामला बताकर दबा नहीं सकेगी। कर्मचारियों को सुरक्षा, गोपनीयता, मरीजों के अधिकार और आपातकालीन स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण देना भी जरूरी होगा।
उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
भोपाल पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, यह आदेश जारी होने की तारीख से दो महीने तक प्रभावी रहेगा। इसकी जानकारी पुलिस थानों, नगर निगम कार्यालयों और अन्य प्रमुख स्थानों पर चस्पा की जाएगी। समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।
आदेश का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों, बुजुर्गों, दिव्यांगों, बच्चों और अकेले रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

