NCL की सहायक फोरमैन भर्ती रद्द करने पर कानूनी घमासान: चयनित अभ्यर्थियों ने MP हाईकोर्ट में चुनौती दी, कंपनी को नोटिस
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एनसीएल सहायक फोरमैन भर्ती परीक्षा रद्द करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती, चयनित अभ्यर्थियों की याचिका पर नोटिस।
जबलपुर। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की सहायक फोरमैन प्रशिक्षु ग्रेड-सी भर्ती परीक्षा निरस्त करने के फैसले को चयनित अभ्यर्थियों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को हाईकोर्ट ने एनसीएल प्रबंधन को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को निर्धारित की है।
मामला एनसीएल द्वारा सहायक फोरमैन प्रशिक्षु ग्रेड-सी के इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और ईएंडटी संवर्ग के कुल 270 पदों पर भर्ती से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने कंपनी के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें पूरी चयन परीक्षा निरस्त कर दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। चयनित अभ्यर्थियों का तर्क है कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले उम्मीदवारों की पहचान होने के बावजूद पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करना उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है, जिन्होंने अपनी योग्यता के आधार पर सफलता हासिल की है।
9 फरवरी को जारी हुआ था भर्ती विज्ञापन
एनसीएल प्रबंधन ने सहायक फोरमैन प्रशिक्षु ग्रेड-सी के 270 पदों पर भर्ती के लिए 9 फरवरी 2026 को विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद कंप्यूटर आधारित परीक्षा आयोजित की गई। 8 अगस्त 2026 को परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया, जिसमें याचिकाकर्ताओं का चयन हुआ था। चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई थी। इसी बीच परीक्षा के कुछ केंद्रों पर अनियमितता और अनुचित साधनों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आईं।
चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी
शिकायतों के बाद एनसीएल प्रबंधन ने 13 अगस्त को दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया आगामी आदेश तक स्थगित कर दी। बाद में 10 अक्टूबर 2026 को कंपनी ने पूरी चयन परीक्षा निरस्त कर दोबारा परीक्षा आयोजित करने का आदेश जारी किया। इसी निर्णय को चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
अनियमितता की शिकायतों के बाद पूरी परीक्षा निरस्त
परीक्षा के कुछ केंद्रों पर कथित अनियमितताओं और अनुचित साधनों के इस्तेमाल की शिकायतों के बाद एनसीएल प्रबंधन ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई थी। इसके बाद पूरी परीक्षा निरस्त करने का फैसला लिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एनसीएल के आदेश में ही अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान किए जाने का उल्लेख है।
ऐसे में गड़बड़ी करने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पूरी चयन परीक्षा निरस्त करना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि जिन अभ्यर्थियों ने मेहनत और योग्यता के आधार पर चयन सूची में स्थान हासिल किया है, उन्हें कुछ उम्मीदवारों की कथित अनियमितताओं का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
सात अभ्यर्थियों ने संयुक्त रूप से दायर की याचिका
बिहार, राजस्थान, झारखंड, उत्तराखंड और तेलंगाना के सात अभ्यर्थियों ने संयुक्त रूप से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा निरस्त करने के एनसीएल के आदेश को अनुचित बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं अधिवक्ता काजल विश्वकर्मा ने पैरवी की। अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष दलील दी कि जब अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले अभ्यर्थियों को चिह्नित किया जा चुका है, तो दोषी और निर्दोष उम्मीदवारों को अलग-अलग किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया निरस्त करना अनुपातहीन कार्रवाई है। इससे उन उम्मीदवारों को भी दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिन्होंने किसी भी प्रकार की अनियमितता किए बिना परीक्षा में सफलता हासिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के सचिन कुमार और वंशिका यादव मामलों में स्थापित सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि जहां संभव हो, परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले अभ्यर्थियों और निर्दोष उम्मीदवारों को अलग किया जाना चाहिए। याचिका में एनसीएल के परीक्षा निरस्तीकरण आदेश को संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 के विपरीत बताते हुए उसकी संवैधानिकता को चुनौती दी गई है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि पूरी परीक्षा निरस्त करने के बजाय कथित अनियमितताओं में शामिल अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती थी। इससे योग्य और चयनित उम्मीदवारों के हितों की रक्षा हो सकती थी।
एनसीएल प्रबंधन को नोटिस, 23 नवंबर को अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर एनसीएल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कंपनी को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को निर्धारित की है। अब एनसीएल प्रबंधन के जवाब के बाद भर्ती परीक्षा निरस्त करने के फैसले पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी। फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है।
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