छोटे मामलों में लंबे समय से जेल में बंद आदिवासी बंदियों की होगी समीक्षा: जबलपुर केंद्रीय जेल पहुंचे मप्र जनजाति आयोग के सदस्य, कैदियों से चर्चा कर समस्याओं को जाना
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मप्र जनजाति आयोग के सदस्य भगत सिंह नेताम ने जबलपुर केंद्रीय जेल का निरीक्षण किया।
जबलपुर। छोटे-छोटे मामलों में लंबे समय से जेल में बंद अनुसूचित जनजाति वर्ग के ऐसे बंदियों को राहत दिलाने की दिशा में पहल की जाएगी, जो आर्थिक कमजोरी या कानूनी जानकारी के अभाव में जमानत और अपील की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगत सिंह नेताम ने बुधवार को नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल का निरीक्षण कर ऐसे बंदियों की स्थिति और उनकी समस्याओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान आयोग सदस्य ने जनजातीय वर्ग के बंदियों से सीधे बातचीत की उन्होंने उनसे पूछा कि जमानत अपील और कानूनी सहायता हासिल करने में उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर उन बंदियों की स्थिति समझने का प्रयास किया गया जो आर्थिक तंगी, अशिक्षा अथवा कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने के कारण अपने मामलों में आगे की कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। आयोग सदस्य ने ऐसे मामलों की समीक्षा किए जाने की बात कही ताकि पात्र बंदियों को कानूनी सहायता और न्यायिक प्रक्रिया का लाभ मिल सके।
पाकशाला में भोजन की गुणवत्ता देखी और महिला बंदियों से भी की चर्चा
जेल निरीक्षण के दौरान भगत सिंह नेताम ने पाकशाला पहुंचकर बंदियों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की व्यवस्था देखी और उसकी गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने महिला बंदियों से भी बातचीत की और उनकी समस्याएं जानीं। इसके साथ ही महिला बंदियों द्वारा जेल में किए जा रहे कार्यों का अवलोकन किया।
मीडिया को नहीं दी गई निरीक्षण की जानकारी
आयोग सदस्य के जेल निरीक्षण की जानकारी मीडिया को जेल प्रबंधन की ओर से नहीं दी गई। ऐसे में निरीक्षण के दौरान बंदियों ने अपनी समस्याएं और व्यवस्थाओं से जुड़ी बातें किस तरह रखीं इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं हो सकी है शायद प्रबंधन को किसी प्रकार का भय नजर आ रहा तो उन्होंने निरीक्षण की जानकारी गोपनीय रही हो।

