ग्वालियर की खराब सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त: PWD चीफ इंजीनियर वीके आरख के अधिकार छीने, तकनीकी टीम को नोटिस देने पर भी जताई नाराजगी
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ खराब सड़कों पर सख्त (फाइल फोटो)।
ग्वालियर। जिले की खराब सड़कों और निर्माण में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्य अभियंता वीके आरख को ग्वालियर जोन के पद पर काम करने से रोक दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि आरख पद पर बने रह सकते हैं, लेकिन याचिका के लंबित रहने तक कोई काम नहीं करेंगे। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने राज्य सरकार को कार्यालय के कामकाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
सड़क के सभी नमूने जांच में फेल
ग्वालियर की सड़कों के निर्माण में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच के लिए हाईकोर्ट ने तीन सदस्यीय आयोग बनाया था। आयोग ने अक्टूबर में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। इसमें सड़क के नमूनों की जांच में सभी नमूने फेल पाए गए थे। इससे पहले पिछली सुनवाई में अदालत ने मुख्य अभियंता वीके आरख को पद से हटाने की चेतावनी दी थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत ने उन्हें ग्वालियर जोन के मुख्य अभियंता के रूप में काम करने से रोकने का आदेश दे दिया।
नियमों के मुताबिक नहीं बनीं सड़कें
शहर की खराब सड़कों को लेकर कैलाश चंद्र अग्रवाल ने अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान मुख्य अभियंता वीके आरख ने खुद स्वीकार किया था कि PWD ने नियमों और तय मानकों के अनुसार सड़कों का निर्माण नहीं कराया। इसके बावजूद निर्माण कार्य का पूरा भुगतान कर दिया गया।
तकनीकी टीम के सदस्य को नोटिस देना पड़ा भारी
जांच में आयोग की मदद के लिए एक तकनीकी टीम बनाई गई थी। इसमें कार्यपालन अभियंता राकेश कुमार उपाध्याय को भी सदस्य बनाया गया था। टीम ने सड़कों के नमूने लेकर अपनी रिपोर्ट पेश की थी। इसके बाद मुख्य अभियंता वीके आरख ने राकेश कुमार उपाध्याय को 28 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। अदालत ने इस कदम को अनुचित माना और कहा कि इससे तकनीकी टीम के सदस्य पर दबाव बनाने और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हुई।
हाईकोर्ट ने इस नोटिस को पूरी तरह रद्द कर दिया है। अदालत ने यह भी पाया कि मामले से जुड़े मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के बजाय प्रभारी उप-अभियंता दीपक गुप्ता के घर पर रखे गए थे। इस पर भी अदालत ने नाराजगी जताई।
राज्य सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश
अदालत ने आदेश दिया कि याचिका लंबित रहने तक वीके आरख ग्वालियर जोन के मुख्य अभियंता के रूप में कोई काम नहीं करेंगे। राज्य सरकार को कार्यालय के सुचारू संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा गया है।
अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी अधिकारी ने तकनीकी टीम के किसी सदस्य को परेशान या डराने की कोशिश की तो इसे अदालत के कामकाज में सीधा हस्तक्षेप माना जाएगा। ऐसे अधिकारी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को अन्य संबंधित मामलों के साथ होगी।
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