ग्वालियर के चर्चित भूरा हत्याकांड में बड़ा फैसला: गवाहों के मुकरने पर भी विज्ञान ने दिलाया न्याय, 3 दोषियों को उम्रकैद; दो आरोपी बरी
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फाइल फोटो।
ग्वालियर। शहर के चर्चित रवि उर्फ भूरा हत्याकांड में जिला कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले की खास बात यह रही कि कोर्ट में फरियादी समेत सभी चश्मदीद गवाह अपने पूर्व बयानों से पलट गए और किसी ने भी आरोपियों की पहचान नहीं की। इसके बावजूद पुलिस की वैज्ञानिक जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूती दी। कोर्ट ने विजय प्रताप उर्फ सोनू, विनय प्रताप उर्फ मोनू और संजय उर्फ लल्लू को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर प्रह्लाद भदौरिया और मोंटी भदौरिया को बरी कर दिया गया।
मंदिर दर्शन के लिए जा रहा था रवि, रास्ते में हुई फायरिंग
मामला 27 दिसंबर 2021 का है। झांसी रोड थाना क्षेत्र के पिपरौली गांव में रवि उर्फ भूरा अपने साथियों के साथ शीतला माता मंदिर दर्शन के लिए जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में घात लगाए बैठे बदमाशों ने उसे रोक लिया। आरोप है कि बदमाशों ने रवि पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों को गिरफ्तार किया।
कोर्ट में फरियादी समेत सभी चश्मदीद मुकर गए
मामला सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंचा तो अभियोजन पक्ष के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। फरियादी संजीव उर्फ छोटू शर्मा समेत सभी चश्मदीद गवाह अपने बयान से पलट गए। गवाहों ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने आरोपियों को घटना के दौरान नहीं देखा था। गवाहों के मुकरने के बाद माना जा रहा था कि अभियोजन पक्ष के लिए आरोप साबित करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, पुलिस की वैज्ञानिक जांच इस मामले में निर्णायक साबित हुई।
घटनास्थल से मिले 12 खोखों ने खोला राज
जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से 12 खाली कारतूस के खोखे मिले थे। इन खोखों को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) जांच के लिए भेजा गया। वैज्ञानिक परीक्षण में सामने आया कि इनमें से 6 खोखे विजय प्रताप उर्फ सोनू की बंदूक से चलाए गए थे। वहीं 4 खोखे विनय प्रताप उर्फ मोनू की बंदूक से और 2 खोखे संजय उर्फ लल्लू की बंदूक से चलने की पुष्टि हुई।
मृतक के शरीर से निकली गोलियां भी हथियारों से मैच
मामले में सबसे अहम साक्ष्य मृतक रवि के शरीर से बरामद हुईं दो गोलियां रहीं। FSL जांच में इन गोलियों का मिलान आरोपियों के हथियारों से हुआ। जांच के मुताबिक एक गोली विनय प्रताप उर्फ मोनू की बंदूक से और दूसरी गोली संजय उर्फ लल्लू की बंदूक से चली थी। इस वैज्ञानिक साक्ष्य को कोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण माना। गवाहों के पलटने के बावजूद हथियारों और घटनास्थल से मिले खोखों के बीच सामने आए फॉरेंसिक संबंध ने अभियोजन के मामले को मजबूती दी।
कोर्ट ने कहा- हत्या का तरीका बेहद वीभत्स
कोर्ट ने हत्याकांड को जघन्य और सनसनीखेज मानते हुए अपराध की गंभीरता पर भी टिप्पणी की। कोर्ट के मुताबिक हत्या का तरीका बेहद वीभत्स था और ऐसे मामले में दोषियों को केवल कम सजा देना न्याय के अनुरूप नहीं होगा। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने विजय प्रताप उर्फ सोनू, विनय प्रताप उर्फ मोनू और संजय उर्फ लल्लू को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं प्रह्लाद भदौरिया और मोंटी भदौरिया को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
वैज्ञानिक जांच बनी अभियोजन की ताकत
यह फैसला इस मामले में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान बदलने के बावजूद फॉरेंसिक साक्ष्यों ने अहम भूमिका निभाई। घटनास्थल से मिले खोखे और मृतक के शरीर से निकली गोलियों का हथियारों से मिलान अभियोजन के लिए निर्णायक साक्ष्यों में शामिल रहा।
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धर्मेंद्र शर्मा, शासकीय अधिवक्ता

