मोबाइल बन रहा वैवाहिक रिश्तों में तनाव की वजह: ग्वालियर में शक ने तीन परिवारों में मचाया कहर, बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता
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परिवार में तनाव और विवाद की वजह बन रहा मोबाइल, फाइल फोटो।
ग्वालियर। मोबाइल फोन का बढ़ता इस्तेमाल अब पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव की वजह बनने लगा है। एक ही घर में रहने वाले दंपती के बीच मोबाइल के पासवर्ड, देर रात तक बातचीत और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने को लेकर शक पैदा हो रहा है। कई बार छोटी-सी बात से शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ जाता है कि मामला मारपीट और गंभीर अपराध तक पहुंच जाता है। ग्वालियर में सामने आई तीन घटनाएं इसकी गंभीर तस्वीर पेश करती हैं।
एक मामले में मोबाइल पर भगवान श्रीराम के वीडियो देखने पर पति ने पत्नी पर तलवार से हमला कर दिया, दूसरे में मोबाइल चलाने को लेकर हुए विवाद के बाद पत्नी के मायके पक्ष के लोगों ने पति और उसके परिजनों के साथ मारपीट की, जबकि तीसरे मामले में पत्नी के फोन पर बातचीत करने के शक में एसएसबी जवान ने उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी।
वैवाहिक विवादों के चौकाने वाले आंकड़े
दरअसल जनवरी 2026 से अक्टूबर के अंत तक महिला थाने में वैवाहिक विवादों से जुड़े 1493 आवेदन पहुंचे हैं। इनमें मोबाइल के इस्तेमाल और उससे जुड़े संदेह को लेकर भी शिकायतें शामिल हैं। महिला थाना पुलिस और काउंसलर ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिला थाने में आने वाले सभी मामलों की वजह मोबाइल नहीं है, बल्कि पारिवारिक विवादों के कई दूसरे कारण भी हैं।
पहला मामला: वीडियो देखने पर पति ने पत्नी पर तलवार से किया हमला
हजीरा थाना क्षेत्र के बड़ागेट कांचमील में सोमवार रात मोबाइल पर भगवान श्रीराम के वीडियो देखने को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि गुस्से में आए पति करनवीर उर्फ करू सिंह तोमर ने घर के मंदिर में रखी तलवार से पत्नी रेवती उर्फ रीतू तोमर पर हमला कर दिया। महिला के सिर, गर्दन, हाथ और घुटने पर गंभीर चोटें आईं। जान बचाने के लिए वह खून से लथपथ हालत में पड़ोसी के घर में घुस गई, जहां बेहोश हो गई। परिजन उसे जेएएच के ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
दूसरा मामला: मोबाइल चलाने से रोकने पर मायके पक्ष के लोगों ने की मारपीट
मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर विवाद का दूसरा मामला पुरानी छावनी थाना क्षेत्र के रुद्रपुरा गांव का है। यहां पति ने पत्नी को ज्यादा समय मोबाइल पर बिताने से रोका तो दोनों के बीच विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ा कि पत्नी ने अपने मायके पक्ष के लोगों को बुला लिया। आरोप है कि महिला के भाई और उसके साथी ने पति, जेठ और सास के साथ मारपीट कर दी। घटना के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस तरह मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर शुरू हुआ घरेलू विवाद दोनों परिवारों के बीच झगड़े की वजह बन गया।
तीसरा मामला: एसएसबी जवान ने पत्नी की गला घोंटकर की हत्या
ग्वालियर के खुरैरी में चरित्र पर संदेह के चलते एसएसबी जवान ज्ञान सिंह जाटव ने अपनी पत्नी रिंकी जाटव (34) की गला घोंटकर हत्या कर दी। वारदात के दौरान उनकी 12 साल की बेटी ने पिता को मां का गला दबाते हुए देख लिया था। आरोपी ने बेटी को भी जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया। इसके बाद पत्नी की मौत को हार्ट अटैक बताकर शव को अपने पैतृक गांव छौंदा ले गया। वहां परिजनों को शक हुआ तो उन्होंने बेटी से पूछताछ की। शुरुआत में सहमी बच्ची ने जब पूरी घटना बताई तो हत्या का खुलासा हो गया।
फोन पर किसी से बातचीत करने को लेकर हुआ विवाद
सभी घटनाओं में परिजनों के मुताबिक, आरोपी को पत्नी के फोन पर किसी से बातचीत करने को लेकर संदेह था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। पुलिस ने आरोपी पति को हिरासत में लेकर हत्या और धमकी देने के मामले में कार्रवाई शुरू की है। इन तीनों घटनाओं में मोबाइल के इस्तेमाल या फोन पर बातचीत से जुड़ा विवाद सामने आया है। हालांकि, घटनाओं की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन इनसे यह जरूर सामने आता है कि आपसी विश्वास की कमी और शक कई बार पारिवारिक विवाद को गंभीर रूप दे सकते हैं।
मोबाइल का पासवर्ड और देर रात की बातचीत बन रही शक की वजह
महिला थाना काउंसलर महेंद्र शुक्ला के मुताबिक, रोजाना करीब 5 से 7 ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें मोबाइल को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ है। कई पत्नियों की शिकायत होती है कि उनके पति मोबाइल में पासवर्ड लगाकर रखते हैं और देर रात तक किसी से बातचीत करते हैं, लेकिन पूछने पर जानकारी नहीं देते। इस बात को लेकर सवाल करने पर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो जाती है और कई बार मामला थाने तक पहुंच जाता है। काउंसलिंग के दौरान पति-पत्नी दोनों को समझाया जाता है कि वैवाहिक रिश्ते में विश्वास बेहद जरूरी है। एक-दूसरे से बातें छिपाने के बजाय आपसी बातचीत से गलतफहमियां दूर करनी चाहिए। मोबाइल से जुड़े विवाद सिर्फ चैटिंग और पासवर्ड तक सीमित नहीं हैं।
रील बनाने और सोशल मीडिया पर सक्रियता को लेकर भी विवाद
सोशल मीडिया पर रील बनाने और उन्हें अपलोड करने को लेकर भी पति-पत्नी और परिवार के दूसरे सदस्यों के बीच तनाव की स्थिति बन रही है। कुछ मामलों में सास की ओर से बहू को रील बनाने से मना करने पर विवाद होने की बात सामने आई है। काउंसलर के अनुसार, अच्छी सामग्री और भजन से जुड़ी रील बनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल और पारिवारिक असहमति के कारण विवाद बढ़ जाते हैं।
युवाओं का कहना: एक ही घर में रहकर भी फोन में व्यस्त रहते हैं दंपती
महिला थाने के बाहर मिले युवाओं का कहना है कि मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल से परिवार के बीच बातचीत कम होती जा रही है। पति-पत्नी एक ही घर में रहते हुए भी अपना ज्यादातर समय फोन पर बिताते हैं। छोटी-छोटी बातों पर शक, पासवर्ड देखने की जिद और देर रात तक चैटिंग रिश्तों में तनाव पैदा कर रही है। युवाओं का मानना है कि तकनीक के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन परिवार और रिश्तों के लिए भी समय निकालना चाहिए।
वहीं इस मामले में महिलाओं का कहना है कि मोबाइल पर जरूरत से ज्यादा समय बिताना और एक-दूसरे से बातें छिपाना वैवाहिक जीवन में गलतफहमियों को बढ़ा रहा है। फोन में पासवर्ड लगाना, चैट डिलीट करना और सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय रहना कई बार शक की वजह बन जाता है। उनका कहना है कि पति-पत्नी को साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए और परिवार को प्राथमिकता देनी चाहिए।
'सभी वैवाहिक विवादों की वजह मोबाइल नहीं'
वहीं महिला अपराध शाखा की डीएसपी किरण अहिरवार ने बताया कि महिला थाने में आने वाले वैवाहिक विवादों में मोबाइल भी एक कारण बनकर सामने आ रहा है। कई बार महंगा मोबाइल दिलाने की मांग, जरूरत से ज्यादा फोन चलाना, इंस्टाग्राम पर रील बनाना और उन्हें अपलोड करने को लेकर पति-पत्नी के बीच झगड़े हो जाते हैं। मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर पैदा हुआ शक भी कई बार विवाद की वजह बनता है। उन्होंने बताया कि इस साल महिला थाने में कुल 1493 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें अलग-अलग कारणों से पति-पत्नी और परिवारों के बीच विवाद हुए हैं। इन सभी मामलों की वजह केवल मोबाइल नहीं है। प्राप्त आवेदनों में से 1131 मामलों में समझौते, न्यायालयीन कार्रवाई अथवा पक्षकारों की स्वेच्छा से अलग होने की प्रक्रिया हुई है। इन 1131 मामलों में 12 प्रकरण ऐसे भी हैं, जिनमें काउंसलिंग के बाद पति-पत्नी के बीच सहमति बनी और वे दोबारा साथ रहने लगे।
काउंसलिंग से सुलझाने का प्रयास, सहमति नहीं तो अलग होने का विकल्प
डीएसपी ने बताया कि महिला थाने में दोनों पक्षों की बात सुनकर परामर्श दिया जाता है। आपसी सहमति बनने पर साथ रहने के लिए समझौता कराया जाता है, जबकि सहमति नहीं बनने की स्थिति में अलग होने का विकल्प भी रहता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मोबाइल का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक करें। यदि पार्टनर को फोन के इस्तेमाल से परेशानी है तो हिंसा या विवाद करने के बजाय बैठकर बातचीत करें। किसी भी तरह की पारिवारिक समस्या होने पर महिला थाने में पहुंचकर परामर्श लिया जा सकता है।
आंकड़ों पर एक नजर
- महिला थाने में कुल प्राप्त आवेदन: 1,493
- समझौते, न्यायालयीन कार्रवाई और स्वेच्छा से अलग होने वाले मामले: 1,119
- काउंसलिंग के बाद दोबारा साथ रहने लगे दंपती: 12
- फिलहाल लंबित प्रकरण: 362
- मोबाइल विवाद से जुड़े मामले: रोजाना करीब 5 से 7 (काउंसलर के अनुसार)
सोनाली कुशवाहा, महिला
महेंद्र शुक्ला, काउंसलर
किरण अहिरवार, DSP, महिला अपराध शाखा, ग्वालियर

