4 साल से अधूरी 50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट : 6 डेडलाइन निकली, पर हैंडओवर नहीं हुई CCU; 16.64 करोड़ खर्च के बाद भी मरीजों को इंतजार
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2022-23 से चल रहा निर्माण, ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की दुर्दशा।
ग्वालियर। मरीजों की जान बचाने के लिए बनाई जा रही 50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) खुद चार साल से निर्माण पूरा होने का इंतजार कर रही है। छह बार डेडलाइन बढ़ने के बावजूद माधव डिस्पेंसरी परिसर में तैयार हो रहा 16.64 करोड़ रुपए का चार मंजिला भवन अब तक जीआरएमसी प्रबंधन को हैंडओवर नहीं हो सका है। इसका खामियाजा ट्रॉमा सेंटर पहुंचने वाले गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
कहीं बेड की कमी के चलते मरीजों को गैलरी और अटेंडर हॉल में लेटकर इलाज ले रहे हैं तो कहीं आईसीयू में संक्रमण से बचाव के इंतजाम तक नहीं हैं। हैरानी की बात यह है कि भवन में लिफ्ट तक लग चुकी हैं, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं होने से उनकी टेस्टिंग भी नहीं हो पाई है।
50 बेड की सीसीयू का निर्माण शुरू हुआ था
भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में मेडिकल कॉलेजों में क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाने की स्वीकृति दी थी। इसी योजना के तहत ग्वालियर में 50 बेड की सीसीयू का निर्माण शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य गंभीर मरीजों को आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, जांच और अन्य जरूरी सुविधाएं एक ही भवन में उपलब्ध कराना है। यूनिट शुरू होने के बाद ट्रॉमा सेंटर की क्षमता 30 से बढ़कर 96 बेड हो जाएगी।
निर्माण एजेंसी की लेटलतीफी से लटकी योजना
इससे सड़क दुर्घटनाओं और अन्य गंभीर हादसों में घायल मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा। लेकिन निर्माण एजेंसी की लेटलतीफी ने पूरी योजना को लटका दिया है। ठेकेदार ने पहले जुलाई 2025 तक भवन हैंडओवर करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद दिसंबर 2025, जून 2026, अगस्त 2026 और अक्टूबर 2026 की तारीख दी गई। अब छठी बार नवंबर 2026 तक का समय मांगा गया है। यानी मरीजों को बेहतर इलाज देने वाली यूनिट की शुरुआत एक बार फिर टल गई है।

ट्रॉमा सेंटर में ये हैं बदइंतजामी के हालात
- मरीजों की संख्या अधिक होने से कई घायलों को जमीन और गैलरी में बेड डालकर इलाज देना पड़ रहा है।
- आईसीयू में भीषण गर्मी में मरीज पंखों के भरोसे रहते हैं।
- बाहरी लोग बिना रोक-टोक जूते पहनकर आईसीयू में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है।
- एक्स-रे और अन्य जांचों के लिए मरीजों को एक भवन से दूसरे भवन तक ले जाना पड़ता है।
- मरीजों के लिए रखे स्ट्रेचर टूटे और बदहाल स्थिति में हैं।
- कैज्युअल्टी का गेट बंद होने से मरीजों और परिजनों को दूसरे रास्ते से चक्कर लगाकर जाना पड़ता है।
- ईटीपी और एचटीपी प्लांट जैसी जरूरी सुविधाओं का भी अभाव है।
किस मंजिल पर क्या होगा
- ग्राउंड फ्लोर: इमरजेंसी और कैज्युअल्टी
- फर्स्ट फ्लोर: जनरल वार्ड और डायलिसिस
- सेकंड फ्लोर: गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू)
- थर्ड फ्लोर: ऑपरेशन थिएटर
भवन में ये काम अब भी बाकी
- बिजली कनेक्शन होना बाकी है।
- आउटर डेवलपमेंट का काम अधूरा है।
- लिफ्ट लग चुकी हैं, लेकिन बिजली के अभाव में टेस्टिंग नहीं हुई।
- भवन के चारों ओर निर्माण सामग्री पड़ी हुई है।
- मुख्य द्वार के सामने खड़ा बिजली का पोल हटाया जाना बाकी है।
शीतला मंदिर हादसे में खुली थी ट्रॉमा सेंटर की पोल
नवरात्रि के दौरान शीतला माता मंदिर पर हुए भीषण हादसे में ट्रक की चपेट में आने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। घायलों को इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। उस समय मरीजों की अधिक संख्या के चलते कई घायलों को स्ट्रेचर पर ही उपचार देना पड़ा था। पर्याप्त बेड और व्यवस्थाओं की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद नई सीसीयू शुरू होने का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है।
"सीसीयू का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मेरी जानकारी के अनुसार सिर्फ बिजली कनेक्शन होना बाकी है। इसमें देरी क्यों हो रही है, इस संबंध में ठेकेदार को पत्र लिखकर जवाब मांगा है। "
"भवन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। सिर्फ बिजली कनेक्शन होना बाकी है। इस सप्ताह बिजली कनेक्शन भी हो जाएगा। "
"ट्रॉमा सेंटर में संक्रमण से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। दो-तीन दिन में एक बार चादर बदली जाती है। आईसीयू में कोई भी बाहरी व्यक्ति जूते पहनकर प्रवेश कर जाता है। साफ-सफाई का भी अभाव है। इससे मरीजों को संक्रमण का खतरा बना रहता है।"

