गुना में पराली जलाने पर प्रशासन का शिकंजा: 31 किसानों पर 85 हजार का जुर्माना ठोका, कलेक्टर ने दी कड़ी चेतावनी
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नरवाई जलाने के मामलों में राजस्व और कृषि विभाग की कार्रवाई।
गुना। जिले में खेतों में पराली और नरवाई जलाने वाले किसानों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। फसल अवशेष जलाने के मामलों में 31 किसानों पर कुल 85 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया है। इनमें 28 किसानों पर 2,500-2,500 रुपए और तीन किसानों पर 5,000-5,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।
कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के निर्देश पर जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राजस्व और कृषि विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। इसी क्रम में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं उपखंड मजिस्ट्रेट गुना शिवानी पांडे ने 31 किसानों के खिलाफ अर्थदंड लगाने के आदेश जारी किए हैं।
सात गांवों में सामने आए नरवाई जलाने के मामले
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, बमोरी के प्रतिवेदन के आधार पर राजस्व पटवारियों और कृषि विस्तार अधिकारियों की टीम ने संबंधित गांवों में पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच के दौरान नरवाई जलाने के मामले सामने आने पर रिपोर्ट प्रशासन को भेजी गई। इसके बाद संबंधित किसानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। प्रशासन के अनुसार, जिन गांवों में कार्रवाई की गई है, उनमें गढ़लाउजारी, सोनखरा, बाघेरी, खुटियारी, बारोदिया, अमरोद और धाननखेड़ी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में खेतों में फसल अवशेष जलाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए किसानों पर आर्थिक दंड लगाया गया है।
समझाइश के बाद भी पराली जलाई तो होगी कार्रवाई: कलेक्टर
कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने बताया कि पराली जलाने से रोकने के लिए शासन-प्रशासन स्तर पर लगातार प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। किसानों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी की गई हैं। इसके अलावा राजस्व, कृषि, पुलिस और पंचायत विभाग की टीमें गांवों में जाकर किसानों को समझाइश दे रही हैं। कलेक्टर ने कहा कि किसानों को बार-बार समझाया जा रहा है कि वे पराली न जलाएं, बल्कि उसका उचित प्रबंधन करें। फसल अवशेषों को उपयोगी उत्पाद या ईंधन में बदलने के लिए भी तकनीक उपलब्ध है।
इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा पराली जलाने के मामले सामने आए हैं, जिनमें प्रशासन ने कार्रवाई की है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें और खेतों में नरवाई जलाने से बचें।
मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को होता है नुकसान
फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को जल्दी हटाने के लिए कई किसान उन्हें जला देते हैं। हालांकि, इससे निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है। साथ ही आग से मिट्टी में मौजूद उपयोगी सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंच सकता है और भूमि की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। आग फैलने की स्थिति में आसपास के खेतों, पेड़-पौधों और संपत्ति को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई जलाने के बजाय फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य किसानों को परेशान करना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना और खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर रोक लगाना है।
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किशोर कुमार कन्याल, कलेक्टर

