गुना नगरपालिका के 4 साल के कामकाज पर घमासान: नेता प्रतिपक्ष ने केंद्रीय मंत्री सिंधिया को लिखा पत्र, 11 मुद्दों पर उठाए सवाल
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चार साल के कामकाज पर लगाए अनियमितताओं के आरोप।
गुना। नगरपालिका के पिछले चार वर्षों के कामकाज को लेकर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष शेखर वशिष्ठ ने केंद्रीय मंत्री एवं गुना-शिवपुरी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र लिखकर 11 मुद्दों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विकास कार्यों में कथित अनियमितता, सरकारी धन के दुरुपयोग और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।
मशीनों की खरीदी पर सवाल
पत्र में नाला सफाई मशीन पर 10 से 12 लाख, रोड स्वीपर मशीन पर करीब 20 लाख और ई-रिक्शा पर 12 से 15 लाख रुपए खर्च करने का उल्लेख है। आरोप है कि इन मशीनों का समुचित उपयोग नहीं हुआ। मृत मवेशियों को उठाने वाली मशीन पर 8 से 10 लाख रुपए खर्च करने के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिलने का दावा भी किया गया है। वशिष्ठ ने पिछले दो वर्षों में करीब 80 लाख रुपए के डी-डी-टी कीटनाशक की खरीदी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दस्तावेजों में खरीदी दिखाई गई, लेकिन वार्डों में पर्याप्त छिड़काव नहीं हुआ।

कचरा प्रबंधन और निर्माण कार्यों की जांच की मांग
पत्र में 4.50 करोड़ रुपए के कचरा प्रबंधन कार्य का मुद्दा भी उठाया गया है। नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, 12 पार्षदों की शिकायत पर कलेक्टर स्तर पर जांच समिति बनी थी, लेकिन एक साल से अधिक समय बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। इसके अलावा सड़कों की खराब गुणवत्ता, 3 करोड़ रुपए के हाट रोड रपटे और करीब 6 करोड़ रुपए के ऑडिटोरियम-कम्युनिटी हॉल की उपयोगिता पर सवाल उठाए गए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद इन कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता की जांच होनी चाहिए।
बुनियादी सुविधाओं और बैठकों पर भी सवाल
पत्र में जलभराव, नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट और बिजली व्यवस्था की बदहाली का मुद्दा उठाया गया है। दीपावली पर बिजली सामग्री की कमी के कारण कई इलाकों में अंधेरा रहने का आरोप भी लगाया गया है। इसके साथ ही परिषद की नियमित बैठकों में देरी और पार्षदों की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने पर सवाल किए गए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने सिंधिया से सभी मामलों का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने और जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय कराने की अपील की है। ये सभी आरोप पत्र में लगाए गए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि या नगरपालिका का पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है।


