गुना में स्कूल समय में बच्चों की पढ़ाई छोड़ विदाई पार्टी में शामिल हुए शिक्षक: DEO ने लिया संज्ञान; बोले- जांच में दोषी मिलने पर होगी कड़ी कार्रवाई
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गुना में स्कूल समय में बच्चों की पढ़ाई छोड़ विदाई पार्टी में शामिल हुए शिक्षक
गुना। सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के समय शिक्षकों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग भले ही निगरानी व्यवस्था का दावा करता हो, लेकिन गुना जिले के बमोरी क्षेत्र में जनशिक्षकों की विदाई पार्टी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि स्कूल और कार्यालय समय के दौरान कई शिक्षक अपने विद्यालयों में मौजूद रहने के बजाय बमोरी में आयोजित विदाई समारोह में शामिल हुए। मामले को जिला शिक्षा अधिकारी ने संज्ञान में लेते हुए जांच कराने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जनशिक्षकों और बीएसी की विदाई पार्टी में पहुंचे शिक्षक
जानकारी के मुताबिक, बमोरी में जनशिक्षकों और बीएसी यानी ब्लॉक अकादमिक कॉर्डिनेटर के विदाई समारोह का आयोजन किया गया था। बताया गया कि कार्यक्रम उन शिक्षकों के सम्मान में रखा गया, जो पूर्व में जनशिक्षक और बीएसी के पद पर कार्यरत थे। हाल ही में इन पदों से मुक्त किए जाने के बाद उन्हें उनके मूल विद्यालयों में वापस पदस्थ किया गया है।
इस कार्यक्रम में कई शिक्षकों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि कुछ शिक्षक ऑन ड्यूटी लेकर कार्यक्रम में पहुंचे, जबकि कुछ की उपस्थिति ई-अटेंडेंस के माध्यम से दर्ज होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों और संबंधित शिक्षकों की उपस्थिति की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इन शिक्षकों के शामिल होने की चर्चा
विदाई समारोह में शामिल बताए जा रहे शिक्षकों में रामसिंह ओझा, प्राथमिक विद्यालय तिनस्याई; लक्ष्मीनारायण शर्मा, माध्यमिक विद्यालय बछाबदा; हनुमत धाकड़, प्राथमिक विद्यालय खेरोदा; सीमा गांठे, माध्यमिक विद्यालय मोई; स्वाति पंती, माध्यमिक विद्यालय कलोरा; राजेंद्र गौड़, राजेंद्र गहलोत, माध्यमिक विद्यालय झागर; पवन सोनी, माध्यमिक विद्यालय डोंगरी; मधु सेन और प्रद्युम्न शर्मा, माध्यमिक विद्यालय सावरा पहाड़ के नाम शामिल हैं।
इन शिक्षकों की विद्यालय में उपस्थिति, कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति और ऑन ड्यूटी से संबंधित रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। संबंधित शिक्षकों का पक्ष और विभागीय दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बच्चों की पढ़ाई और ई-अटेंडेंस पर उठे सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई को लेकर है। यदि शिक्षक निर्धारित समय में विद्यालय से अनुपस्थित थे, तो उस दौरान विद्यार्थियों को किसने पढ़ाया? क्या शिक्षकों को विभागीय कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी गई थी? यदि अनुमति मिली थी, तो किस अधिकारी ने इसे स्वीकृत किया था?
इसके साथ ही ई-अटेंडेंस व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि किसी शिक्षक की उपस्थिति दर्ज थी, लेकिन वह उस समय विद्यालय के बजाय किसी अन्य स्थान पर मौजूद था, तो इस स्थिति की जांच आवश्यक है। विभागीय रिकॉर्ड, उपस्थिति विवरण और ऑन ड्यूटी की अनुमति का मिलान करके ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
यह भी जांच का विषय है कि कार्यक्रम के आयोजन के लिए कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया था या नहीं और विकासखंड स्तर के संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं।
DEO बोले- मामला संज्ञान में, जांच के बाद होगी कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी समर सिंह राठौर ने मामले को संज्ञान में लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि स्कूल समय में विद्यालय से बाहर जाकर विदाई पार्टी में शामिल होना उचित नहीं है और नियमों के विरुद्ध है। मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जांच के नतीजों पर टिकी नजर
शिक्षकों के सम्मान और विदाई समारोह आयोजित करने पर सवाल नहीं है, बल्कि कार्यक्रम के समय और विद्यालयीय जिम्मेदारियों के पालन को लेकर है। अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित शिक्षक किस अनुमति के तहत कार्यक्रम में शामिल हुए, उनकी उपस्थिति कैसे दर्ज हुई और क्या इस दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई।
फिलहाल शिक्षा विभाग ने जांच की बात कही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित शिक्षकों की जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
समर सिंह राठौर, जिला शिक्षा अधिकारी

