दिवाली पर मुस्लिम युवक ने पेश की भाईचारे की मिसाल: धार के टीपू खान ने बनाई नीम करोली बाबा की रंगोली, बोले- कला किसी धर्म से जुड़ी नहीं होती
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धार में मुस्लिम युवक ने बनाई नीम करोली बाबा की रंगोली।
धार। कला किसी धर्म की सीमा में बंधी नहीं होती, बल्कि लोगों को जोड़ने का काम करती है। मध्यप्रदेश के धार जिले के धामनोद में मुस्लिम युवक टीपू खान ने अपनी रंगोली कला से धार्मिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल पेश की है। दीपोत्सव के अवसर पर उन्होंने नीम करोली बाबा की आकर्षक रंगोली बनाई है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
15 साल से रंगोली कला को निखार रहे टीपू खान
धामनोद के इंदिरा नगर गुलझरा निवासी टीपू खान पिछले 15 वर्षों से गौरव टेंट हाउस में मैनेजर के रूप में काम कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने रंगोली बनाने की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपनी कला को बेहतर बनाया। इस साल 7 नवंबर 2026 को रूप चौदस के अवसर पर उन्होंने गौरव टेंट हाउस में नीम करोली बाबा की सुंदर रंगोली तैयार की। टीपू खान का कहना है कि कला किसी धर्म से जुड़ी नहीं होती। उनके अनुसार, यह हुनर ईश्वर की ओर से मिला एक उपहार है, जिसे वे अपनी कला के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते हैं।
पीएम मोदी से लेकर संतों तक की बना चुके हैं रंगोली
टीपू खान अब तक कई चर्चित हस्तियों और धार्मिक व्यक्तित्वों की रंगोलियां बना चुके हैं। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रेमानंद महाराज, पंडित मिश्रा और सियाराम बाबा शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने मां वाग्देवी, भगवान श्रीकृष्ण, भगवान गणेश और कई राजनीतिक व ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की रंगोलियां भी बनाई हैं। उनकी कला को स्थानीय स्तर पर काफी सराहना मिलती है।
मंदिरों में निःशुल्क करते हैं भोलेनाथ का श्रृंगार
टीपू खान अपनी कला का इस्तेमाल केवल रंगोली बनाने में ही नहीं करते, बल्कि धार्मिक आयोजनों में भी सहयोग देते हैं। श्रावण महीने में वे विभिन्न मंदिरों में जाकर भगवान भोलेनाथ का निःशुल्क श्रृंगार करते हैं। मध्यप्रदेश के कई क्षेत्रों में वे अपनी रंगोली कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। उनकी इस पहल को स्थानीय लोग पसंद करते हैं और इसकी सराहना भी करते हैं।
नीम करोली बाबा की रंगोली देखने पहुंच रहे लोग
दीपोत्सव पर बनाई गई नीम करोली बाबा की रंगोली लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कॉलोनी के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि टीपू खान ने अपनी कला के जरिए धार्मिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का संदेश दिया है। उनकी यह पहल बताती है कि कला और इंसानियत का किसी धर्म से बंधा होना जरूरी नहीं है।
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टीपू खान, रंगोली कलाकार।
श्रीधा शर्मा, स्थानीय युवती।
डॉ. शिवानी राय, स्थानीय निवासी।

