देवास को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग तेज, सज्जन वर्मा ने सरकार को घेरा: बोले- उज्जैन को राहत तो देवास के किसानों की अनदेखी क्यों? नर्मदा-कालीसिंध परियोजना का मुद्दा भी उठाया
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सज्जन सिंह ने नर्मदा-कालीसिंध परियोजना शुरू करने की उठाई मांग (फाइल फोटो)
देवास। जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उज्जैन को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, तो उससे सटे देवास जिले को इस सूची से बाहर क्यों रखा गया? वर्मा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री उज्जैन से आते हैं, इसलिए वहां के किसानों को राहत दी गई, जबकि देवास के किसानों की परेशानी को नजरअंदाज किया जा रहा है।
जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग
पूर्व मंत्री वर्मा के मुताबिक, देवास जिले में कम बारिश के कारण किसान संकट में हैं और कर्ज के बोझ से दब रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सोनकच्छ विधानसभा क्षेत्र के कई तालाब खाली पड़े हैं। इनमें भौरासा का रानी दमयंती तालाब, राजा नल तालाब और बुदासा का तालाब शामिल हैं। वर्मा ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों को राहत देने की मांग की है।
सरकारी आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
वर्मा ने आरोप लगाया कि, अधिकारियों की ओर से शासन को दी गई गलत जानकारी और आंकड़ों के कारण देवास का नाम सूखाग्रस्त जिलों की सूची में शामिल नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि वह पहले भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई राहत नहीं मिली है।
नर्मदा-कालीसिंध परियोजना शुरू करने की मांग
पूर्व मंत्री ने नर्मदा-कालीसिंध परियोजना का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि कमलनाथ सरकार के समय जिसका भूमिपूजन किया गया था, उसकी पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है, लेकिन परियोजना अब तक शुरू नहीं की गई है। उन्होंने इसे जल्द चालू करने की मांग की। वर्मा के अलावा जिले के कुछ अन्य नेता भी देवास को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि शासन इस मांग पर क्या निर्णय लेता है और किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
सज्जन सिंह वर्मा, पूर्व मंत्री

