मप्र में सोयाबीन उत्पादक किसान असमंजस में: फसल आ गई, लेकिन MSP पर खरीदी का पता नहीं? अब तक शुरू नहीं हुए भावांतर के रजिस्ट्रेशन
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मप्र के सोयाबीन उत्पादक किसान बिक्री को लेकर असमंजस में हैं, फाइल फोटो।
भोपाल। ‘सोया स्टेट’ मध्य प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसान इसकी बिक्री को लेकर असमंजस में हैं। सोयाबीन की भावांतर योजना में खरीदी होगी या नहीं, इस बारे में सरकार ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। प्रदेश में सोयाबीन की कटाई शुरू हो चुकी है और अब तक भावांतर योजना में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। रजिस्ट्रेशन के संबंध में कृषि विभाग ने दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किए हैं। किसानों का कहना है कि भावांतर योजना में रजिस्ट्रेशन जितनी देर से शुरू होंगे, सोयाबीन की खरीदी भी उतनी देर से शुरू होगी और किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा, क्योंकि जरूरतमंद किसान औने-पौने दामों में मंडियों में सोयाबीन बेचने को मजबूर होंगे।
विदेश यात्रा पर हैं कृषि विभाग के सचिव
दरअसल, पिछले साल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सोयाबीन की खरीदी की मांग के बीच सरकार ने पहली बार सोयाबीन खरीदी के लिए भावांतर योजना लागू की थी। हालांकि, पंजीयन प्रक्रिया देर से शुरू होने से कई किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव घोषणा कर चुके हैं कि इस साल भी सोयाबीन खरीदी के लिए भावांतर योजना लागू की जाएगी, लेकिन पिछले कुछ महीनों से कृषि विभाग ने भावांतर योजना में सोयाबीन की खरीदी को लेकर पंजीयन आदि के संबंध में किसानों को कोई जानकारी नहीं दी है, और न ही इस संबंध में कोई निर्देश जारी किए गए हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विभाग के सचिव निशांत वरवड़े विदेश यात्रा पर हैं। चूंकि वे ही विभाग के कर्ताधर्ता हैं, इसलिए भावांतर योजना में पंजीयन प्रक्रिया को लेकर अब तक निर्देश जारी नहीं हो पाए हैं। इस बारे में कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना से फोन पर बार-बार संपर्क किया गया, लेकिन उनके मीटिंग में व्यस्त होने की वजह से बात नहीं हो पाई।
इस साल धान की खरीदी भी भावांतर योजना में
मुख्यमंत्री ने इस साल पहली बार धान उपार्जन के लिए भावांतर योजना लागू करने की घोषणा की है। सोयाबीन की फसल अक्टूबर में आ जाती है और धान की फसल नवंबर में आती है। खास बात यह है कि सरकार द्वारा धान उपार्जन के लिए 15 सितंबर से किसानों के पंजीयन शुरू कर दिए गए हैं, जबकि पहले आने वाली सोयाबीन की फसल के लिए पंजीयन अब तक शुरू नहीं किए गए हैं। धान उपार्जन के लिए पंजीयन 10 अक्टूबर तक होंगे।
बारिश में उड़द बर्बाद, अब सोयाबीन से आस
किसानों का कहना है कि मौसम विभाग के इस साल कम बारिश के पूर्वानुमान के चलते प्रदेश में बड़ी संख्या में किसानों ने उड़द की फसल की बुवाई की थी। लेकिन सितंबर के पूरे महीने में बारिश का दौर जारी रहने के कारण उड़द की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। अब किसानों को सोयाबीन की फसल से ही उम्मीद है।
सागर जिले के ग्राम दुगाहा खुर्द के किसान धर्मेंद्र सिंह राजपूत का कहना है कि उन्होंने 25 एकड़ में उड़द की बुवाई की थी। सितंबर में हुई बारिश से फसल खराब हो गई और सिर्फ 15 क्विंटल उड़द का उत्पादन हुआ, जिससे लागत भी नहीं निकली। अब यदि भावांतर योजना में समय पर सोयाबीन की खरीदी शुरू हो जाती है, तो किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। किसान बेसब्री से भावांतर योजना में रजिस्ट्रेशन का इंतजार कर रहे हैं।
क्या है भावांतर योजना और कैसे होता है भुगतान?
भावांतर योजना के तहत सरकार सीधे तौर पर मंडियों में सोयाबीन की भौतिक खरीदी नहीं करती है, बल्कि किसान अपनी उपज को पहले की तरह खुली मंडियों में बेचते हैं। सरकार की ओर से रोजाना मंडियों में सोयाबीन बिक्री का मॉडल रेट घोषित किया जाता है। यदि मंडी में सोयाबीन एमएसपी से कम कीमत पर बिकता है, तो एमएसपी और मॉडल रेट के बीच के अंतर (घाटे) की राशि राज्य सरकार द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाती है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,708 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। मध्य प्रदेश में इस साल सोयाबीन का रकबा करीब 52.67 लाख हेक्टेयर है।

