UPSC में पिछले चार वर्षों में 172 पद हुए कम : 2026 में 13 लाख से घटकर 8.19 लाख रह गए आवेदक; निजी क्षेत्र में भी तेजी से बढ़ रहा रूझान
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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), फाइल फोटो।
इंदौर। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में पिछले चार वर्षों में रिक्तियों और आवेदनों दोनों में गिरावट आई है। वर्ष 2023 में 1,105 पदों के लिए करीब 13 लाख आवेदन हुए थे, जो 2026 में घटकर 933 पद और 8.19 लाख आवेदन रह गए। यानी चार साल में 172 पद कम हुए, जबकि आवेदकों की संख्या करीब 4.81 लाख घटी। इसके बावजूद चयन का अनुपात बेहद सीमित बना हुआ है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ है कि चार सालों में सिविल सेवा के पदों में लगातार कटौती हुई है। वर्ष 2023 में जहां कुल 1,105 पदों के लिए अधिसूचना जारी की गई थी, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 1,056 रह गई। गिरावट का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। 2025 में यह आंकड़ा 979 तक पहुंच गया और वर्तमान वर्ष 2026 में यह सिमटकर मात्र 933 पदों पर आ गया है। महज चार वर्षों के भीतर 172 पदों की कमी इस बात का संकेत है कि नई नियुक्तियों का दायरा अब अधिक सीमित हो रहा है।
13 लाख से घटकर 8 लाख रह गए आवेदक
पदों की घटती संख्या का असर उम्मीदवारों के रुझान पर भी साफ देखा जा सकता है। वर्ष 2023 में इस परीक्षा के लिए रिकॉर्ड 13,00,000 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जो एक बहुत बड़ी संख्या थी। हालांकि, 2024 में यह आंकड़ा तेजी से गिरकर 9,92,599 हो गया। 2025 में आवेदकों की संख्या में और कमी आई और यह 9,37,876 दर्ज की गई। 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल 8.19 लाख (8,19,000) युवाओं ने ही सिविल सेवा के लिए फॉर्म भरा।
आवेदकों की संख्या में इस भारी गिरावट के कई कारण माने जा रहे हैं। इनमें घटती रिक्तियां और परीक्षा का लगातार कठिन होते जाना प्रमुख है। वहीं, परिणामों की अनिश्चितता को भी जानकार एक बड़ा कारण मानते हैं। इसके अलावा, युवाओं का निजी क्षेत्र में बढ़ता रुझान और अन्य करियर विकल्पों की ओर रुख करना भी इसमें शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि आवेदकों की कुल संख्या भले ही कम हुई हो, लेकिन वास्तविक प्रतिस्पर्धा देने वाले गंभीर छात्रों की संख्या आज भी जस की तस है।
अंतिम चयन तक पहुंचना बेहद कठिन
प्रारंभिक परीक्षा को पार कर मुख्य परीक्षा तक पहुंचने वाले उम्मीदवारों का आंकड़ा इस परीक्षा में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूपीएससी में चयन आसान नहीं है। यही वजह है कि मुख्य परीक्षा और अंतिम चयन तक परीक्षार्थियों की संख्या बेहद कम हो जाती है।
- 2023: 13 लाख आवेदकों में से केवल 14,624 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा देने के योग्य साबित हुए थे।
- 2024: 9.92 लाख में से 14,627 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा तक पहुंचे।
- 2025: यह संख्या 14,161 रही।
- 2026: मुख्य परीक्षा में जगह बनाने वाले उम्मीदवारों का आंकड़ा घटकर 13,343 पर आ गया है।
अंतिम रूप से चयनित होने वाले छात्रों की बात करें तो सफलता की दर 0.1 प्रतिशत के आसपास ही ठहरती है। वर्ष 2023 में 1,105 पदों के मुकाबले 1,016 उम्मीदवार ही सफल घोषित किए गए। 2024 में 1,056 पदों के लिए 1,009 और 2025 में 979 पदों के लिए महज 958 छात्रों ने अंतिम मेधा सूची में जगह बनाई। 2026 की परीक्षा प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए इसके अंतिम चयन के परिणाम आने बाकी हैं।
मुख्य परीक्षा और चयन के आंकड़े एक नजर में
- वर्ष 2023: रिक्तियां - 1,105 | आवेदक - 13,00,000 | मुख्य परीक्षा में सफल - 14,624 | अंतिम चयन - 1,016
- वर्ष 2024: रिक्तियां - 1,056 | आवेदक - 9,92,599 | मुख्य परीक्षा में सफल - 14,627 | अंतिम चयन - 1,009
- वर्ष 2025: रिक्तियां - 979 | आवेदक - 9,37,876 | मुख्य परीक्षा में सफल - 14,161 | अंतिम चयन - 958
- वर्ष 2026: रिक्तियां - 933 | आवेदक - 8.19 लाख | मुख्य परीक्षा में सफल - 13,343 | अंतिम चयन - (प्रक्रियाधीन)
"आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो वर्ष 2023 में 1,105 रिक्तियां थीं, जो 2026 में घटकर 933 रह गईं यानी चार वर्षों में 172 पद कम हुए हैं। केवल आवेदकों की संख्या घटने को प्रतिस्पर्धा कम होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। घटती रिक्तियों के कारण अभ्यर्थियों पर दबाव और अधिक बढ़ता है। अब केवल लंबे समय तक पढ़ना पर्याप्त नहीं है; इसके लिए सही रणनीति, नियमित अभ्यास, उत्तर लेखन, समसामयिक विषयों की समझ और मानसिक संतुलन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।"

