भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर मिसरोद में पोस्टर वार: प्रस्तावित 45 मीटर सड़क का विरोध, रहवासियों की चेतावनी- सड़क नहीं हटी तो किसी को वोट नहीं; नेताओं की एंट्री पर भी रोक
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मिसरोद में 45 मीटर सड़क को लेकर शुरू हुआ पोस्टर वार,पोस्टर पर लिखा-राजनीतिक व्यक्तियों का प्रवेश निषेध।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी में लंबे समय बाद लागू होने जा रहे 'भोपाल मास्टर प्लान 2047' के ड्राफ्ट को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। मिसरोद की ग्राम आबादी के बीच से प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क के विरोध में रहवासियों और किसानों ने पोस्टर अभियान शुरू कर दिया है। क्षेत्र में लगाए गए पोस्टरों पर लिखा है, “जब तक सड़क हटेगी नहीं, तब तक किसी को वोट मिलेगा नहीं।” इसके साथ ही राजनीतिक व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने का संदेश भी दिया गया है।
45 मीटर सड़क के विरोध में पोस्टर अभियान
मिसरोद के रहवासियों और किसानों का कहना है कि प्रस्तावित सड़क से गांव की मौजूदा आबादी, सैकड़ों परिवारों के मकान, कृषि भूमि और आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। उनका आरोप है कि विकास के नाम पर गांव के मूल स्वरूप और सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
इसी विरोध के तहत क्षेत्र में पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों पर “राजनीतिक व्यक्तियों का प्रवेश निषेध है” लिखकर राजनीतिक दलों के प्रति नाराजगी भी जाहिर की गई है। रहवासियों का कहना है कि जब तक सड़क को गांव की आबादी से हटाने की मांग पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अपने विरोध पर कायम रहेंगे।
रैली निकालकर TNCP कार्यालय में दर्ज कराई आपत्तियां
इससे पहले मिसरोद के रहवासी और किसान कार रैली निकालकर नगर तथा ग्राम निवेश (TNCP) कार्यालय पहुंचे थे। वहां उन्होंने भोपाल मास्टर प्लान 2047 के प्रस्तावित ड्राफ्ट के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
रहवासियों की प्रमुख मांग है कि मिसरोद की ग्राम आबादी से प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क को हटाया जाए और इसके लिए वैकल्पिक मार्ग या बायपास पर गंभीरता से विचार किया जाए। इसके अलावा ग्रामवासियों ने सार्वजनिक सुनवाई कराने, गांव की आबादी को संरक्षित एवं सुरक्षित रखने और मिसरोद का मूल स्वरूप बनाए रखने की मांग भी उठाई है।
चुनाव में वोट नहीं देने की चेतावनी
रहवासियों और किसानों ने पोस्टरों के जरिए स्पष्ट किया है कि जब तक प्रस्तावित सड़क को मिसरोद की ग्राम आबादी से हटाने की मांग पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे आगामी चुनावों में किसी भी राजनीतिक दल को वोट नहीं देने के अपने रुख पर कायम रहेंगे।
राजनीतिक व्यक्तियों के प्रवेश निषेध का संदेश भी इसी विरोध का हिस्सा है। इस तरह सड़क को लेकर शुरू हुआ विरोध अब रैली और आपत्तियां दर्ज कराने से आगे बढ़कर पोस्टर अभियान तक पहुंच गया है।
गांव की पहचान और किसानों के हितों की सुरक्षा की मांग
मिसरोद के रहवासियों और किसानों की मांग है कि विकास योजनाएं तैयार करते समय ग्राम आबादी, किसानों के हितों, पर्यावरण और गांव की पहचान को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि प्रस्तावित सड़क के लिए वैकल्पिक मार्ग पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि गांव के मकानों, कृषि भूमि और स्थानीय जीवन पर संभावित प्रभाव को कम किया जा सके।
फिलहाल, भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट में प्रस्तावित सड़क को लेकर मिसरोद में विरोध जारी है। रहवासी सड़क को आबादी से हटाने और अपनी आपत्तियों पर विचार किए जाने की मांग कर रहे हैं।
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