रामलीला मैदान रैली कांग्रेस के लिए Do or Die?: वेणुगोपाल दिन-रात लगे, नेताओं को 10 लाख लोग जुटाने का जिम्मा; पूरी ताकत क्यों झोंक रहे राहुल गांधी
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CEC ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ कांग्रेस की लीडरशिप में INDIA ब्लॉक 1 नवंबर को रामलीला मैदान पर विरोध प्रदर्शन करेगा। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान 1 नवंबर को एक बार फिर बड़े सियासी घमासान का गवाह बनने जा रहा है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर यहां महारैली कर रहा है।
यह महज एक आम प्रदर्शन नहीं है। राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए यह रैली भविष्य की रणनीतियों का खांका तैयार करने वाली है। यही कारण है कि कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल दिन-रात इस रैली की तैयारियों में लगे हुए हैं। नेताओं को अपने-अपने क्षेत्र से लोग जुटाने का फरमान दिया गया है। कुल 10 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है।
सबसे पहले तैयारी देखें...
रैली को सुपर-हिट बनाने के लिए के.सी. वेणुगोपाल ने दिल्ली के आसपास के राज्यों का दौरा कर नेताओं की बैठकें ली हैं। NDTV के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों को कार्यकर्ताओं को लाने के लिए फिक्स टारगेट दिए गए हैं।
सबसे बड़ा जिम्मा हरियाणा को मिला है, जिसकी कमान सांसद दीपेंद्र हुड्डा के हाथों में है। कहा तो यह जा रहा है कि उन्हें 1 लाख तक भीड़ जुटाने का फरमान है। रैली की सफलता या विफलता का सीधा असर राज्यों के बड़े नेताओं के सियासी करियर पर पड़ने वाला है।
इस रैली के लिए कांग्रेस के तमाम छोटे-बड़े नेताओं की ओर से लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जा रहे हैं। इस रैली की टाइमिंग को पुराने ऐतिहासिक दिनों से भी जोड़ा जा रहा है। कांग्रेस नेता दावा कर रहे हैं कि यह ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा प्रोटेस्ट होने के साथ-साथ एक ऐतिहासिक रैली भी होगी, जो हालिया सालों में देखने को नहीं मिली है।

महारैली पर इतना दम क्यों लगा रही कांग्रेस?
यह कहना कोई गलत नहीं होगा कि बीते 12 सालों में मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बार कांग्रेस इतनी एक्टिव नजर आ रही है। राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी नेता बैक टू बैक सड़क पर उतर रहे हैं। तमाम राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ता जमीन पर दिख रहे हैं। शायद अब कांग्रेस को लगा है कि कुछ हद तक हवा पलटी है और यही कारण है कि वह 1 नवंबर को अपनी ताकत परखना चाहती है।
संगठन का टेस्ट: यह रैली बताएगी कि कांग्रेस में राज्यों से कार्यकर्ताओं को दिल्ली तक लाने और बड़ा आंदोलन खड़ा करने की कितनी ताकत बची है।
देश को मैसेज: अगर रैली में भारी भीड़ जुटती है, तो राहुल गांधी की लीडरशिप में लोगों का भरोसा बढ़ेगा और मैसेज जाएगा कि कांग्रेस अब BJP का मुकाबला करने के लिए तैयार है।
INDIA गठबंधन की एकता: इस पूरी महारैली के लिए कांग्रेस हाईकमान ही पूरी ताकत लगा रही है। विपक्षी दलों की ओर से इतनी कोशिश नहीं देखी जा रही है। लेकिन अगर रामलीला मैदान पर तमाम विपक्षी दलों के कार्यकर्ता भी अच्छी संख्या में जुट जाते हैं तो INDIA ब्लॉक की एकता के लिहाज से भी अच्छा कदम होगा।
भविष्य के आंदोलनों की बुनियाद: कांग्रेस इस रैली के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में 4 और बड़ी रैलियां करने का प्लान बना रही है। अगर 1 नवंबर का शो सक्सेस रहा तो आगे के आंदोलन के लिए भी ताकत मिलेगी।
UP चुनाव पर असर: कांग्रेस की कोशिश कामयाब रही तो आने वाले यूपी विधानसभा चुनाव के लिए पहले तो उसे सपा के साथ गठबंधन में ज्यादा सीट मांगने और फिर सीटों पर मजबूती से लड़ाई लड़ने की ताकत मिलेगी। 2027 में होने वाले 5 राज्यों के चुनावों पर इसका असर होना तय है।
अगर रैली फ्लॉप रही तो क्या?
राजनीतिक एक्सपर्ट्स तमाम प्लेटफॉर्म्स पर कह रहे हैं कि 10 लाख की जगह अगर एक चौथाई तक भी भीड़ जुटती है तो कांग्रेस की यह रैली सफल कहलाएगी। लेकिन अगर फ्लॉप हुई तो CEC और SIR के खिलाफ आगे के आंदोलन को बड़ा झटका लगेगा। कुल मिलाकर 1 नवंबर को रामलीला मैदान का नजारा सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति का रुख तय करेगा।

क्या हैं विपक्ष की मांगें?
विपक्ष ने रामलीला पर होने वाली इस रैली को 'वोट बचाओ-देश बचाओ' नाम दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस रैली की तीन बड़ी मांगें भी साफ कर दी हैं...
1. CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और उन्हें संरक्षण देने वाला 2023 का कानून निरस्त हो।
2. SIR तत्काल रोका जाए। गैरकानूनी ढंग से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल हों।
3. सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं।
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