361 कैंप, 586 किलेबंद थाने, 12 हजार km सड़कें: नक्सलवाद खत्म! इससे निपटने के लिए तैयार हुए विशाल सिक्योरिटी सेट-अप का अब क्या होगा
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तस्वीर एक साल पुरानी है। कोबरा बटालियन ने सुकुमा जिले के सुरक्षा बलों के साथ मिलकर नक्सलियों के हथियारों का एक बड़ा जखीरा खोजा था। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। भारत में करीब दो दशक से नक्सल विरोधी अभियान आक्रामक अंदाज में चल रहा था। नतीजा यह हुआ कि नक्सलवाद अब लगभग खत्म होने के कगार पर है। केंद्र सरकार यह दावा भी कर चुकी है कि देश से लेफ्ट विंग एक्स्ट्रीमिज्म यानी वामपंथी उग्रवाद खत्म हो गया है। इसी के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है। सवाल यह है कि जिस विशाल सिक्योरिटी सेट-अप को नक्सलवाद से लड़ने के लिए तैयार किया गया था, अब उसका क्या होगा?
दरअसल, इस पूरे अभियान के दौरान हजारों सुरक्षाकर्मी, CAPF की बटालियन, CoBRA कमांडो, फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन, जंगल कैंप, सड़कें, मोबाइल टावर, कम्युनिकेशन सिस्टम और इंटेलिजेंस नेटवर्क तैयार किए गए। ऐसे में अब जब नक्सलवाद खत्म होने का दावा है तो क्या इस सेट-अप को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा या इसका इस्तेमाल दूसरे कामों में होगा? सवाल यह भी है कि क्या इसे भविष्य में संभावित खतरे को देखते हुए बनाए भी रखा जा सकता है?
अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी स्टेटमेंट में इन सवालों के जवाब में क्या संकेत मिले हैं, पढ़ें...





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