11 साल में BJP की डिजिटल फौज कैसे खड़ी हुई: अमित मालवीय के दौर में देश की गलियों तक कैसे पहुंचा पार्टी नेटवर्क; अब क्यों बदलनी पड़ी टीम
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नेशनल डेस्क। BJP की डिजिटल टीम में 11 साल बाद बड़ा बदलाव हुआ। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने अमित मालवीय को IT सेल के चीफ पद से हटाया और दीपक महस्के को यह जिम्मेदारी सौंपी। यह बदलाव ऐसे वक्त में हुआ है, जब BJP को हाल ही में Gen-Z प्रोटेस्ट का सामना करना पड़ा, जो कि सोशल मीडिया से ही शुरू हुआ था।
अमित मालवीय को हटाने के पीछे BJP की जो भी रणनीति हो, लेकिन एक बात साफ है कि यह सिर्फ एक पद पर बदलाव नहीं है। यह BJP की उस डिजिटल यात्रा के एक लंबे दौर का अंत है, जिसमें सोशल मीडिया के कुछ अकाउंट्स से शुरू हुआ काम WhatsApp ग्रुप, ऐप, डेटा और बूथ लेवल तक पहुंच गया।
दरअसल, अमित मालवीय ही वह शख्स थे, जिसने सोशल मीडिया के जरिए BJP के नैरेटिव को देश की गली-मोहल्लों तक पहुंचाया। यहां इसी सफर की हाईलाइट्स...
2015 में BJP से जुड़े, फिर संभाली डिजिटल कमान
अमित मालवीय 2015 में BJP में शामिल हुए थे। इससे पहले वे कॉरपोरेट सेक्टर में काम करते थे। उन्होंने Bank of America और HSBC जैसी बड़ी फाइनेंशियल फर्म के साथ भी काम किया।
अमित शाह उन्हें BJP में लेकर आए और उन्हें पार्टी के डिजिटल काम को एक साथ लाने और सोशल मीडिया पर BJP की पहुंच बढ़ाने की जिम्मेदारी दी।
उस वक्त राजनीति में सोशल मीडिया तेजी से जगह बना रहा था। 2014 के लोकसभा चुनाव में इसका इस्तेमाल बढ़ा था, लेकिन 2019 तक आते-आते सभी चुनाव में सोशल मीडिया का रोल सबसे अहम हो गया।
सिर्फ Twitter अकाउंट नहीं, बूथ तक पहुंचा नेटवर्क
मालवीय के दौर की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि BJP ने अपने सोशल मीडिया कैंपेन को सिर्फ ऑनलाइन तक ही सीमित नहीं रखा, वह देश के गली-मोहल्ले तक पहुंचा।
2019 में मालवीय ने बताया था कि BJP के पास करीब 12 लाख सोशल मीडिया वॉलंटियर्स थे। ऐसे में दिल्ली से निकला एक मैसेज सिर्फ BJP के आधिकारिक Twitter या Facebook पेज तक नहीं रहता था। वह राज्य, जिला, शहर, गांव और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और WhatsApp ग्रुप्स तक पहुंचता था।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं ने ऐसे नेटवर्क का जिक्र किया था, जिसमें बड़ी संख्या में सोशल मीडिया पदाधिकारी और WhatsApp ग्रुप शामिल थे। स्थानीय कार्यकर्ताओं को आसपास के WhatsApp ग्रुप्स से जुड़ने और वहां पार्टी से जुड़ा कंटेंट शेयर करने के लिए कहा जाता था।

NaMo App से सीधे समर्थकों तक पहुंच
अमित मालवीय की लीडरशिप में BJP की डिजिटल रणनीति सिर्फ Facebook, Twitter और WhatsApp तक नहीं रुकी। पार्टी अपना NaMo App भी लाई।
2019 के चुनाव से पहले ऐप पर PM नरेंद्र मोदी से जुड़ी खबरों और अपडेट्स के अलावा वॉलंटियर बनने, पार्टी कैंपेन में हिस्सा लेने, सामान खरीदने और छोटी रकम का दान देने जैसी सुविधाएं थीं।
2019 के चुनाव से पहले एक करोड़ से ज्यादा मोबाइल में यह डाउनलोड हो चुका था। इसका फायदा यह था कि BJP को अपने समर्थकों तक पहुंचने के लिए हर बार Facebook या Twitter जैसे प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था। पार्टी के पास सीधे अपने यूजर्स तक पहुंचने का एक रास्ता था।
'चौकीदार चोर है' से 'मैं भी चौकीदार' तक
मालवीय के दौर में BJP हर मुद्दे पर एक डिजिटल स्ट्रैटजी अपनाती थी। इसका सबसे फेमस उदाहरण 2019 का 'मैं भी चौकीदार' कैंपेन रहा।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार PM नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए 'चौकीदार चोर है' का इस्तेमाल कर रहे थे। BJP ने इसी शब्द को अपने पक्ष में इस्तेमाल करने का फैसला किया।
16 मार्च 2019 को नरेंद्र मोदी ने अपने Twitter नाम के आगे 'चौकीदार' जोड़कर अपना नाम 'चौकीदार नरेंद्र मोदी' कर लिया। इसके बाद अमित शाह और कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी अपने नाम के आगे 'चौकीदार' लगा लिया।
इसके बाद बड़ी संख्या में BJP समर्थकों ने भी अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में 'चौकीदार' जोड़ लिया। यह सिर्फ एक hashtag कैंपेन नहीं था। इसमें लोगों को एक पहचान दी गई, जिसे वे खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस्तेमाल कर सकते थे।
Economic Times की उस समय की रिपोर्ट के मुताबिक, यह डिजिटल कैंपेन तकनीक के मामले में बहुत बड़े स्तर पर चलाया गया था। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके पहले तो कैंपेन से जुड़े 1 लाख से ज्यादा लोगों को ऑटोमेटेड गुप्त मैसेज (Dark Tweets) भेजे गए, जो उनकी प्रोफाइल से पोस्ट किए गए। दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर # के जरिए 9 लाख ट्वीट करवाए गए ताकि वह अभियान पूरी दुनिया में वायरल हो सके।
यानी BJP ने एक राजनीतिक हमले को ऐसा डिजिटल कैंपेन बना दिया, जिसमें पार्टी के नेता ही नहीं बल्कि आम समर्थक भी सीधे शामिल हो गए। यह सब अमित मालवीय के नेतृत्व में हो रहा था।

17 लाख से 2.3 करोड़ हुए BJP के X फॉलोअर
मालवीय ने 2019 में बताया था कि जब उन्होंने काम शुरू किया था, तब BJP4India के Twitter अकाउंट पर करीब 17 लाख followers थे। अब जब वह इस पद से रुखसत हुए तो यह संख्या 2.3 करोड़ है।
यह आंकड़ा सिर्फ एक सोशल मीडिया अकाउंट की ग्रोथ नहीं दिखाता। यह बताता है कि करीब एक दशक में BJP ने अपने डिजिटल काम को किस स्तर तक बढ़ाया।
अब BJP ने अमित मालवीय को क्यों हटाया?
अब डिजिटल ऑडियंस बदल रही है। X और Facebook के मुकाबले Instagram ऑडियंस अलग है। Gen Z तक पहुंच के लिए इंस्टा एक बड़ा जरिया है। युवाओं के लिहाज से ही कंटेंट की भी जरूरत है, जिसकी बीते 2-3 साल से कमी लग रही है। बीते 2-3 साल में सोशल मीडियी स्ट्रैटजी में BJP के मुकाबले कांग्रेस हावी दिखी है। वह मीम और रील कंटेंट के जरिए BJP को घेरती है, जबकि BJP का कंटेंट बीते 4-5 सालों में एक ही एंगल से चल रहा है।
हाल के Gen Z प्रोटेस्ट ने भी यह इशारा किया था कि सोशल मीडिया पर BJP की पुरानी टैक्टिक अब काम नहीं आ रही है। वह युवाओं के बीच अपने कंटेंट से नैरेटिव सेट नहीं कर पा रही है। संभव है यही कारण हो कि BJP अपनी सोशल मीडिया टीम को नया कलेवर देना चाहती हो।
अब आगे क्या?
अमित मालवीय के 11 साल के कार्यकाल को सिर्फ वायरल हैशटैग, पोस्ट की संख्या या BJP की चुनावी जीत से नहीं देखा जा सकता।
उनके दौर में BJP की डिजिटल मशीनरी एक छोटी केंद्रीय टीम से बढ़कर प्रोफेशनल कैंपेनर, स्टेट टीम, वॉलेंटियर, वाट्सएप ग्रुप्स, सोशल मीडिया ऐप, डेटा और बूथ लेवल वर्कर्स वाले बड़े नेटवर्क में तब्दील हुई। यह नेटवर्क अब BJP के चुनावी सिस्टम का स्थायी हिस्सा बन चुका है।
यही वजह है कि मालवीय की विदाई को सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव के तौर पर नहीं, बल्कि BJP की डिजिटल राजनीति के एक बड़े चैप्टर के अंत के तौर पर देखा जा रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि अमित मालवीय की एक दशक की इस मेहनत को BJP की नई सोशल मीडिया टीम किस तरह से आगे बढ़ाती है।
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