BJP की नई सोशल मीडिया टीम: आलोक भट्ट-प्रीति गांधी के X अकाउंट डिलीट! अरुण यादव-शिवानंद के प्राइवेट; दीपक महस्के ने पुराने पोस्ट हटाए; ऐसा क्यों
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नेशनल डेस्क। BJP की नई सोशल मीडिया टीम में शामिल चेहरों ने अपॉइंटमेंट के कुछ मिनटों बाद ही अपने-अपने सोशल मीडिया हैंडल में तेजी से बदलाव किए। किसी ने पुराने पोस्ट हटाए, किसी ने प्रोफाइल को लॉक कर दिया तो किसी के अकाउंट ही नजर नहीं आ रहे। अब चर्चा इसी बात की है कि आखिर BJP की इस नई IT टीम को ऐसा क्यों करना पड़ा?
BJP ने सोमवार (17 अगस्त) को अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बदलाव के साथ IT सेल को भी पूरी तरह से बदला। अमित मालवीय की जगह दीपक महस्के को नया सोशल मीडिया कन्वीनर बनाया गया। उनके साथ प्रीति गांधी, आलोक भट्ट, शिवानंद द्विवेदी और अरुण यादव को को-कन्वीनर की जिम्मेदारी दी गई है।
इस ऐलान के ठीक बाद आलोक भट्ट और प्रीति गांधी के X अकाउंट गायब हो गए। वहीं अरुण यादव और शिवानंद द्विवेदी का X हैंडल प्राइवेट कर दिया गया। नए सोशल मीडिया कन्वीनर दीपक महस्के ने भी अपने पुराने पोस्ट हटा लिए।
एक साथ इतने अकाउंट में बदलाव ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या BJP की नई सोशल मीडिया टीम जॉइन करने से पहले नेताओं ने अपने पुराने डिजिटल फुटप्रिंट साफ किए हैं? BJP या इन नेताओं की तरफ से अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि अकाउंट और पोस्ट में बदलाव क्यों किए गए। हालांकि सोशल मीडिया पर इनके पुराने पोस्ट वायरल होने से कहानी काफी हद तक समझ आ रही है।
प्रीति गांधी और आलोक भट्ट के अकाउंट क्यों नहीं दिख रहे?
प्रीति गांधी लंबे समय से BJP की सोशल मीडिया टीम की एक्टिव आवाज रही हैं। वह BJP महिला मोर्चा के सोशल मीडिया काम से जुड़ी रही हैं और महाराष्ट्र में पार्टी की प्रवक्ता भी रह चुकी हैं। X पर वह अक्सर विपक्षी दलों और नेताओं पर तीखे हमले करती रही हैं।
BJP IT सेल में नई जिम्मेदारी मिलते ही उनके पुराने पोस्ट वायरल होने लगे थे। किसी में वह हिंदुत्व की कट्टर समर्थक नजर आईं तो किसी में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की फैन। ऐसे में शुरुआती कुछ घंटे उन्होंने अपनी टाइमलाइन हाइड की और फिर बाद में पूरा पेज ही गायब हो गया।
आलोक भट्ट के साथ भी कुछ ऐसा ही है। वह BJP समर्थक डिजिटल आवाज के तौर पर काफी एक्टिव रहे हैं। वह राजनीतिक और नीतिगत मुद्दों पर लंबे पोस्ट लिखते रहे हैं।
BJP सोशल मीडिया को-कन्वीनर बनते ही यूजर्स ने उनके भी पुराने पोस्ट वायरल कर दिए। इसमें किसी में वह कांग्रेस सीनियर लीडर सोनिया गांधी के बारे में आपत्तिजनक बातें लिखते दिखें तो किसी में वह अल्पसंख्यकों और रिजर्वेशन के खिलाफ नजर आए।
आलोक भट्ट ने भी कुछ वक्त के लिए टाइमलाइन गायब की लेकिन फिर उन्हें भी अकाउंट रिमूव करना पड़ा।

अरुण यादव और शिवानंद की प्रोफाइल प्राइवेट हुई
नई टीम के बाकी दो को-कन्वीनर अरुण यादव और शिवानंद द्विवेदी के X पोस्ट आम यूजर सीधे नहीं देख सकते। यानी फॉलो करने के बाद इनकी पुरानी पोस्ट नजर आ सकेगी। उसमें भी संभव है कई पोस्ट डिलीट हों।
शिवानंद द्विवेदी गृह मंत्री अमित शाह पर किताब लिखने के बाद चर्चा में आए थे। वहीं अरुण यादव अपनी प्रोफाइल में खुद को प्राउड सनातनी लिखते हैं। दोनों की प्रोफाइल खोलने पर ‘Posts are Protected’ लिखा नजर आ रहा है।
यह बदलाव भी खास है। संभव है कि पार्टी के ऑफिशियल सोशल मीडिया कम्युनिकेशन और नेताओं के पर्सनल विचार के बीच फर्क रखने के लिए अकाउंट की विजिबिलिटी बदली गई हो। हालांकि, यह सिर्फ एक संभावना है। BJP ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

दीपक महस्के ने पुराने पोस्ट क्यों हटाए?
नई टीम के मुखिया दीपक महस्के हैं। वह छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष हैं और उन्हें छत्तीसगढ़ में राज्य मंत्री का दर्जा हासिल है। उनकी टाइमलाइन पर पुराने पोस्ट नजर नहीं आ रहे हैं।
इसका मतलब यह हो सकता है कि नई जिम्मेदारी संभालने से पहले उन्होंने अपने पुराने कंटेंट की समीक्षा की हो। सोशल मीडिया पर नेताओं के पुराने पोस्ट कई साल बाद भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में कोई पुराना बयान, निजी टिप्पणी या विवादित पोस्ट नई भूमिका में उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।
यही वजह है कि नई जिम्मेदारी संभालने से पहले पुराने पोस्ट हटाना या अकाउंट की विजिबिलिटी बदलना एक तरह की डिजिटल क्लीन-अप एक्सरसाइज हो सकती है।
क्या है रणनीति?
BJP की नई सोशल मीडिया टीम में एक साथ कई अकाउंट में बदलाव को पार्टी की 'मैसेज डिसिप्लिन' की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।
अब इन नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट को सिर्फ उनकी निजी राय मानना मुश्किल हो सकता है। क्योंकि वे BJP की आधिकारिक सोशल मीडिया टीम का हिस्सा हैं। किसी विवादित मुद्दे पर उनका पोस्ट सीधे पार्टी के स्टैंड से जोड़कर देखा जा सकता है।
ऐसे में पार्टी चाह सकती है कि उसके सोशल मीडिया कैंपेन एक तय लाइन और एक जैसी रणनीति के तहत चलें। व्यक्तिगत पोस्ट से अलग संदेश जाने की संभावना कम हो, इसके लिए पुराने कंटेंट की समीक्षा या अकाउंट को लॉक रखना एक तरीका हो सकता है।
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