Navratri-2026: आज का दिन मां स्कंदमाता को समर्पित; इनकी पूजा से मिलता है संतान सुख
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माता की सवारी तो शेर ही है, लेकिन स्कंदमाता का आसन कमल पर होता है।
धर्म डेस्क. आज नवरात्रि का पाचवां दिन है। ये दिन मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। माता पार्वती को कार्तिकेय के जन्म के साथ ही इस नाम से पुकारा जाने लगा था। क्योंकि कार्तिकेय को ही स्कंद कुमार कहा जाता है। कुछ पुराणों में कहा गया है कि इनकी पूजा से संतान प्राप्ति होती है। तो चलिए जानते हैं इनके स्वरूप और पूजा के बारे में…
कमल पर विराजती हैं स्कंदमाता
माता की सवारी तो शेर ही है, लेकिन स्कंदमाता का आसन कमल पर होता है। उनकी चार भुजाएं है। जिसमें दो में कमल, एक हाथ आशीर्वाद और एक हाथ में स्कंद यानी कार्तिकेय को पकड़ा हुआ है। मां का वाहन सिंह है। माता का आसन कमल पर होने के कारण इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है।

माता स्कंदमाता की आरती
जय तेरी हो स्कंद माता
सब के मन की आस पुराती,
तेरी महिमा सब जग गाता।
कही पहाड़ों पर है डेरा,
कई शहरों में तेरा बसेरा।
हर मंदिर में तेरे नजारे,
गुण गाए तेरे भक्त प्यारे।
भक्ति अपनी हमें दिला दो,
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।
इंद्र आदि देवता मिल सारे,
करे पुकार तुम्हारे द्वारे।
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए,
तू ही खंडा हाथ उठाए।
दासों को सदा बचाने आई,
भक्त की आस पुजाने आई।
स्कंदमाता जी की आरती जो कोई गावे,
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे।
जय तेरी हो स्कंद माता,
पांचवां नाम तुम्हारा आता।

