Shardiya Navratri 2026: दूसरे दिन पूजी जाती है मां ब्रह्मचारिणी; जानें माता की तपस्विनी रुप की कहानी
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माता ब्रह्मचारिणी किसी वाहन पर सवार नहीं होती। अपने पैरों पर ही खड़ी होती है।
धर्म डेस्क. नवरात्रि का दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, संयम और साधना की प्रतीक मानी जाती हैं। इन माता का कोई विशेष वाहन भी नहीं है, क्योंकि ये माता पार्वती का वो रूप है जब माता त्याग और तपस्या की पर्याय बन चुकी थीं। तो आइए जानते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाया जाता है।
योगिनी के वेश में होती हैं माता
माता ब्रह्मचारिणी किसी वाहन पर सवार नहीं होती। अपने पैरों पर ही खड़ी होती है। यहां तक कि उनके पैरों में पादुका भी नहीं होती है। उनकी यही मुद्रा दर्शाती है कि वे एक तपस्विनी हैं। उनके हाथ में कमंडल होता है। दूसरे हाथ में माला होती है। लाल और श्वेत वस्त्रों में माता का रूप भक्तों को आध्यात्म, त्याग और तपस्या की ओर ले जाता है।
तप के बाद मिले थे शिव
माता ब्रहमचारिणी भी पार्वती मां का ही एक रूप हैं, लेकिन अविवाहित स्वरूप। पुराणों में इस बात का उल्लेख है कि सती माता के देहत्याग के बाद उन्होंने हिमायल की बेटी माता पार्वती के रूप में जन्म लिया था। लेकिन उनके जन्म से शिवजी की अर्धांगिनी बनने तक की यात्रा काफी कठिन थी। उन्होंने घोर तपस्या के बाद भगवान शिव की पत्नी बनने का सौभग्य प्राप्त किया था। उनके इसी तपस्विनी स्वरूप को माता ब्रह्मचारिणी के रूप में जाना जाता है।
क्या भोग लगाया जाता है
माता ब्रह्मचारिणी को पंचामृत, दूध, चीनी या गुड़ से बनी हुई मिठाइयां, मिशरी और फलों का भोग लगाया जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।
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