Navratri 2026 : महाअष्टमी पर करें मां महागौरी की पूजा; जानें स्वरूप, पूजा विधि और आरती
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माता सीता ने राम को अपने पति रूप में पाने के लिए इन्ही से प्रार्थना की थी। इसका उल्लेख तुलसी रचित रामचरित मानस और विनय पत्रिका में ‘श्री राम स्तुति’ में भी किया गया है।
धर्म डेस्क. आज नवरात्रि की अष्ठमी तिथि है। इसे महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। आज के दिन महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी माता का वह रुप है, जिसे अत्यंत धवल (श्वेत) माना जाता है। कहते हैं कि ये रूप मां को तब मिला था जब शिवजी ने उन्हें गंगास्नान कराया था। मां महागौरी की आराधना करने से कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। तो चलिए आज मां महागौरी के बारे में जानते हैं।
मां महागौरी का स्वरुप
ऐसा कहा जाता है कि मां शैलपुत्री और महागौरी में अधिक अंतर नहीं है। हालांकि दोनों ही मां के अलग-अलग रूप हैं। मां का यह रूप अति धवल है इस कारण भी इन्हें महागौरी के नाम से पुकारा जाता है। इनका भी वाहन वृषभ (बैल) है। माता के चार हाथ हैं। जिनमें दो हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं। वहीं बाकी दो हाथों में वर मुद्रा और अभय मुद्रा दिखाई देती है। महागौरी केवल श्वेत वस्त्र ही धारण करती हैं। इस कारण इन्हें श्वेतांबरधरा भी कहा जाता है।
क्यों शिवजी ने कराया था गंगा स्नान
कहा जाता है कि माता शैलपुत्री जो पार्वती मां का कंवारा रूप है, माता महागौरी भी इसके ही बाद का रूप है। भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए माता ने घोर तपस्या की इस तपस्या के समय मां का शरीर काला पड़ गया था। क्योंकि भक्ति में और तपस्या में लीन मां ने अपने शरीर पर ध्यान नहीं दिया था। जब शिवजी उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने आए। तो उन्होंने माता को गंगा के पवित्र जल से स्नान कराया था। इस स्नान से माता का स्वरूप अति धवल यानी उजला हो गया। तभी से इन्हें महागौरी कहा जाने लगा।
कंवारी कन्याओं को मिलता है मनचाहा वर
माता सीता ने राम को अपने पति रूप में पाने के लिए इन्ही से प्रार्थना की थी। इसका उल्लेख तुलसी रचित रामचरित मानस और विनय पत्रिका में ‘श्री राम स्तुति’ में भी किया गया है। माता के आशीष से ही सीता माता राम जी की भार्या बनी थीं। कहा जाता है कि इनसे विनती किए जाने से सीता माता को जैसे माता रानी ने वर दिया, ठीक उसी तर कोई कंवारी कन्या यदि माता की विधि-विधान से और सच्चे हृदय से पूजा करे तो मनचाहे वर की प्राप्ति होती है।

मां गौरी की आरती
जय महागौरी जगत की माया। जय उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहा निवासा॥
चन्द्रकली और ममता अम्बे। जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे॥
भीमा देवी विमला माता। कौशिक देवी जग विख्यता॥
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती (सत) हवन कुंड में था जलाया। उसी धुयें ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आने वाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥

