कोरबा के रेलवे कर्मचारी ने पेश की मानवता की मिसाल: 3 महीने से भटक रहे व्यक्ति को 13 दिन तक घर में दी पनाह, परिवार से मिलाया; पति को देखकर पत्नी के छलके आंसू
Published:
4 min read

कोरबा के रेलवे कर्मचारी नफीस अहमद खान ने 3 महीने से भटक रहे असम के बिराज गोगोई को 13 दिन घर में रखा और पत्नी से मिलाया।
कोरबा। मुसीबत में फंसे एक अजनबी की मदद कर कोरबा के रेलवे कर्मचारी नफीस अहमद खान ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। बेंगलुरु में अपना सब कुछ गंवाकर करीब तीन महीने से भटक रहे असम निवासी 42 वर्षीय बिराज गोगोई को उन्होंने न केवल उनके परिवार से मिलाया, बल्कि 13 दिनों तक अपने घर में रखकर उनकी देखभाल भी की। 4 नवंबर को जब बिराज की पत्नी मंजू गोगोई उन्हें लेने कोरबा पहुंचीं, तो पति को सही-सलामत देखकर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
रोजी-रोटी की तलाश में गए थे बेंगलुरु, ट्रेन में चोरी हुआ सामान
मूल रूप से असम के भीटानौल नोरागॉव के रहने वाले बिराज गोगोई पेशे से वेल्डर हैं। वे काम की तलाश में बेंगलुरु गए थे। वहां कंपनी बंद होने के बाद उन्होंने वापस अपने घर लौटने का फैसला किया और ट्रेन से असम के लिए रवाना हुए।
सफर के दौरान नींद आने पर किसी अज्ञात चोर ने उनका सामान, जरूरी दस्तावेज और जेब में रखे 22 हजार रुपए नकद चोरी कर लिए। होश आने पर बिराज के पास केवल 2 हजार रुपए बचे थे। सामान और दस्तावेज खोने के बाद वे मानसिक तनाव और घबराहट में भटकते हुए ओडिशा पहुंच गए। वहां से किसी ने उन्हें लिंक एक्सप्रेस में बैठा दिया और 22 अक्टूबर को वे छत्तीसगढ़ के कोरबा रेलवे स्टेशन पहुंच गए।
रेलवे कर्मचारी नफीस अहमद खान ने की मदद
कोरबा स्टेशन के पार्सल ऑफिस के पास एक सीट पर बिराज बेहद परेशान और बेहाल स्थिति में बैठे थे। तभी वहां से गुजर रहे रेलवे कर्मचारी नफीस अहमद खान की नजर उन पर पड़ी। नफीस ने पहले उन्हें भरपेट भोजन कराया और फिर प्यार से उनका नाम-पता पूछा।
पूछताछ के दौरान बिराज को अपने घर का एक मोबाइल नंबर याद आ गया। नफीस ने उस नंबर पर संपर्क किया तो पता चला कि बिराज पिछले 3 महीने से लापता थे। असम में उनके परिजनों ने नजदीकी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। बिराज की पत्नी मंजू गोगोई से बात होने के बाद असम पुलिस ने भी नफीस से संपर्क किया और परिजनों के पहुंचने तक बिराज को सुरक्षित रखने का आग्रह किया।
13 दिनों तक अपने घर में परिवार के सदस्य की तरह रखा
नफीस अहमद खान ने बिराज को लावारिस छोड़ने के बजाय अपने घर ले जाने का फैसला किया। उन्होंने पूरे 13 दिनों तक उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह रखा। इस दौरान उनके खाने-पीने और कपड़ों का पूरा ध्यान रखा।
नफीस ने बताया कि उनका मकसद बिराज की देखरेख करना, उनके परिजनों और पुलिस से संपर्क बनाए रखना और उन्हें सुरक्षित परिवार तक पहुंचाना था। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने बिराज को ट्रेन में बैठाकर भेजने की सलाह दी थी, लेकिन उन्हें चिंता थी कि कहीं वे दोबारा रास्ता न भटक जाएं। इसलिए उन्होंने परिजनों को ही कोरबा बुलाने का फैसला किया।
पति को सही-सलामत देखकर भावुक हुई पत्नी
पति की तलाश में असम से कोरबा पहुंचीं मंजू गोगोई और उनके परिजनों की कोशिश आखिरकार सफल हुई। 4 नवंबर को जब मंजू ने अपने पति को सही-सलामत देखा तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक था। बिराज के 2 बच्चों और पूरे परिवार की खुशियां भी लौट आईं।
परिजनों ने बताया कि बिराज के लापता होने के बाद पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। काफी खोजबीन के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल रहा था। 22 अक्टूबर को बिराज के कोरबा में सुरक्षित होने की खबर मिलने के बाद परिवार को राहत मिली। परिजनों ने नफीस के नेक काम के लिए उनका आभार जताया।
दुआओं के साथ असम के लिए रवाना हुआ परिवार
विदाई के समय भी नफीस अहमद खान ने अपनी मेहमाननवाजी जारी रखी। उन्होंने बिराज और उनके परिजनों को सम्मानपूर्वक भोजन कराया। इसके बाद उन्हें कोरबा से लोकल ट्रेन के जरिए बिलासपुर के लिए रवाना किया, जहां से वे असम के लिए मुख्य ट्रेन पकड़कर अपने गृहग्राम जाएंगे। जाते-जाते बिराज के भावुक परिजनों ने हाथ जोड़कर रेलवे कर्मचारी नफीस अहमद खान को दिल से दुआएं दीं। एक अजनबी के लिए दिखाई गई उनकी संवेदनशीलता ने इंसानियत की एक मिसाल पेश की।
बिराज गोगोई, परेशान शख्स
इन्द्रिरा गोगोई, बिराज के परिजन
नफीस अहमद खान, रेलवेकर्मी

