कांकेर में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने जंगल सफारी की मांग: जन सहयोग संस्था ने वन मंत्री केदार कश्यप को सौंपा ज्ञापन, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
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कांकेर में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने जंगल सफारी की मांग
कांकेर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले में वन्य प्राणियों की रिहायशी इलाकों में बढ़ती आवाजाही और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए जंगल सफारी स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। सामाजिक संस्था जन सहयोग ने प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप को ज्ञापन सौंपकर कांकेर के आसपास जंगल सफारी विकसित करने का प्रस्ताव रखा। संस्था का मानना है कि इससे वन्य प्राणियों के संरक्षण के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष कम करने तथा जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।
नवा रायपुर की तर्ज पर सफारी विकसित करने का प्रस्ताव
संस्था के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी ने वन मंत्री के कांकेर प्रवास के दौरान यह सुझाव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर की तर्ज पर कांकेर में भी जंगल सफारी विकसित करने की दिशा में पहल की जा सकती है। इससे वन्य प्राणियों के संरक्षण और प्रबंधन को व्यवस्थित करने के साथ स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
रिहायशी इलाकों में वन्य प्राणियों की आवाजाही से चिंता
ज्ञापन में बताया गया कि जिले में जंगली जानवरों के घरों और शहर की सड़कों तक पहुंचने की घटनाओं से लोगों की चिंता बढ़ रही है। वन्य प्राणियों के पालतू मवेशियों पर हमले और लोगों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। वहीं, सड़कों पर पहुंचने वाले वन्य प्राणियों के वाहन दुर्घटनाओं की चपेट में आने का खतरा बना रहता है।
संस्था का मानना है कि जंगल सफारी की स्थापना वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा की दिशा में एक व्यवस्थित पहल बन सकती है। हालांकि, प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले वन्य प्राणियों के प्राकृतिक आवास, भोजन, आवाजाही और पर्यावरण पर संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन करना जरूरी होगा।
जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की मौजूदगी
इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष महेश जैन, क्षेत्रीय विधायक आशाराम नेताम, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण नरेटी, अशोक वलेचा, दिलीप कुमार जायसवाल, वरिष्ठ पत्रकार सीताराम शर्मा, अनुराग उपाध्याय, जन सहयोग संस्था के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी, दिलीप कुमार गंजीर और संजय कुंजाम सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
उपस्थित लोगों ने संस्था के सुझाव का समर्थन किया और इसे जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़ी समस्याओं के समाधान की दिशा में विचारणीय प्रस्ताव बताया।
वन विभाग के अगले कदम पर नजर
अब इस प्रस्ताव पर शासन और वन विभाग की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी। जंगल सफारी की स्थापना के लिए संभावित स्थान का चयन, बजट, वन्यजीवों के संरक्षण की व्यवस्था और पर्यावरणीय व्यवहार्यता का आकलन महत्वपूर्ण होगा। इन पहलुओं के अध्ययन के बाद ही प्रस्ताव की व्यावहारिकता और आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी।



