CGPSC मेंस की आंसर शीट से 4 पन्ने गायब होने पर हाईकोर्ट सख्त: आयोग पर 50 हजार का जुर्माना, अभ्यर्थी को 3 माह में मुआवजा देने का निर्देश
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CGPSC मेंस की आंसर शीट से 4 पन्ने गायब होने पर हाईकोर्ट सख्त
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। राज्य सेवा परीक्षा-2018 की मुख्य परीक्षा में शामिल एक अभ्यर्थी की उत्तरपुस्तिका से चार पन्ने गायब मिलने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आयोग पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली उत्तरपुस्तिका की कॉपी से सामने आई इस गड़बड़ी ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभ्यर्थी नारायण दत्त ने आरोप लगाया था कि उनकी उत्तरपुस्तिका के चार पन्ने गायब थे। इन पन्नों पर लिखे उत्तरों के कुल 30 अंक निर्धारित थे। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आयोग की लापरवाही और निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए अभ्यर्थी को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। यह राशि तीन महीने के भीतर देने के निर्देश दिए गए हैं।
RTI से खुला मामला, उत्तरपुस्तिका से गायब थे चार पन्ने
नारायण दत्त ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा-2018 की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जून-जुलाई 2019 में मुख्य परीक्षा दी थी। हालांकि, अंतिम चयन सूची में उनका नाम नहीं आया। इसके बाद उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका की कॉपी मांगी।
उत्तरपुस्तिका मिलने पर पता चला कि पेपर-VII सामान्य अध्ययन-V के भाग-2 में पेज नंबर 17 से 20 तक गायब थे। इन चार पन्नों पर प्रश्न क्रमांक 9 से 12 तक के उत्तर लिखे गए थे, जिनके कुल 30 अंक निर्धारित थे। उत्तरपुस्तिका में पन्ने फाड़े जाने के निशान भी दिखाई दिए।
मूल्यांकन के दौरान ही सामने आ गई थी गड़बड़ी
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि उत्तरपुस्तिका से पन्ने गायब होने की जानकारी मूल्यांकन के दौरान ही सामने आ गई थी। जानकारी के मुताबिक, 27 सितंबर 2019 को परीक्षक ने मुख्य मूल्यांकनकर्ता को स्टीकर नंबर 722038 वाली उत्तरपुस्तिका से चार पन्ने गायब होने की लिखित सूचना दी थी।
इसके बावजूद आयोग की ओर से प्रभावी कार्रवाई किए जाने को लेकर सवाल उठे। अभ्यर्थी को यह जानने और न्याय पाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा कि उसकी उत्तरपुस्तिका के साथ आखिर क्या हुआ था।
हाईकोर्ट में 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग
मामले को लेकर नारायण दत्त ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की। जस्टिस पार्थ प्रतीक साहू की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आयोग की लापरवाही और निष्क्रियता पर कड़ी टिप्पणी की।
हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने पूरी चयन प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का आदेश नहीं दिया।
30 अंक जुड़ने पर भी इंटरव्यू तक नहीं पहुंच पाते अभ्यर्थी
मामले में अभ्यर्थी को इंटरव्यू का अवसर नहीं मिल सका। उपलब्ध विवरण के अनुसार, नारायण दत्त को 695.5 अंक मिले थे, जबकि सामान्य वर्ग का कटऑफ 737.5 अंक था। उत्तरपुस्तिका के गायब पन्नों के 30 अंक जोड़ने पर भी उनका स्कोर 725.5 अंक होता, जो कटऑफ से 12 अंक कम था।
इसी अंक गणना के आधार पर अदालत ने चयन प्रक्रिया दोबारा शुरू करने से इनकार किया। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया गया।
CGPSC की विश्वसनीयता पर फिर उठे सवाल
CGPSC की भर्ती परीक्षाएं पहले भी विवादों के कारण चर्चा में रही हैं। राज्य सेवा परीक्षा-2018 की उत्तरपुस्तिका से चार पन्ने गायब होने का मामला आयोग की कार्यप्रणाली, रिकॉर्ड के रखरखाव और जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मूल्यांकन के दौरान ही उत्तरपुस्तिका में गड़बड़ी की जानकारी सामने आ गई थी, तो समय रहते इसकी जांच क्यों नहीं हुई? उत्तरपुस्तिका से पन्ने कब और कैसे गायब हुए, इसके लिए जिम्मेदार कौन था और क्या इस मामले में किसी की जवाबदेही तय की गई?
हाईकोर्ट के आदेश से अभ्यर्थी को आर्थिक राहत जरूर मिली है, लेकिन यह मामला परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत को रेखांकित करता है।

