iPhone 18 लॉन्च होते ही iPhone 17 महंगा हुआ: 16 से 30 हजार रुपए तक बढ़ी कीमत, जानें क्यों हुआ ऐसा
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फोटो सोर्स- Apple
टेक डेस्क। आमतौर पर नए जेनरेशन फोन मॉडल आने के बाद पुराने मॉडल की कीमत कम हो जाती है, लेकिन Apple ने अपने आईफोन (iPhone) की कीमतों के साथ कुछ अलग ही कर दिया। Apple ने नई जनरेशन को लॉन्च करने के बाद पुराने मॉडल की कीमत को घटाने की बजाय अपने मौजूदा iPhone की कीमतों को बढ़ा दिया है।

Apple ने 9 सितंबर के “सरप्राइज एंड शाइन” इवेंट में अपने 3 नए फोन iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और कंपनी का पहला फोल्डेबल डिवाइस iPhone Duo लॉन्च कर दिया है। इनके लॉन्च होते ही iPhone 17, iPhone 16, iPhone 17e और iPhone Air सभी महंगे हो गए हैं। पिछले कई सालों में देखें तो नई सीरीज के लॉन्च होते ही पुराने मॉडल की कीमत कम हो जाती है। हालांकि, इस साल कीमतें घटने की बजाय बढ़ गईं हैं।
भारत में iPhone की कीमत कितनी बढ़ी?
वैसे iPhone 17 के अलावा Apple के दूसरे प्रोडक्ट की भी कीमतें बढ़ी हैं। भारत में iPhone 17 की कीमत 82,900 रुपए से बढ़कर 99,900 रुपए हो गई है। इसमें 17,000 रुपए या लगभग 20.5% का इजाफा हुआ है। iPhone 17e की कीमत में 15,000 रुपए का इजाफा हुआ है। अब कीमत 79,900 रुपए से बढ़कर 94,900 रुपए हो गई है।
iPhone 16 की कीमत में 20,000 रुपए का इजाफा हुआ है। अब इसकी कीमत 89,900 रुपए से बढ़कर 1,09,900 रुपए हो गई है। iPhone Air की कीमत 1,19,900 रुपए से बढ़कर 1,49,900 रुपए हो गई है। यानी इसमें 30,000 की बढ़ोतरी हुई है। Apple के इंडिया स्टोर पर नई कीमतों को लिस्ट कर दिया गया है।
Apple ने पहले ही दी थी कीमतों में बढ़ोतरी की जानकारी
iPhone 17 की कीमत में अचानक से बढ़ोतरी नहीं हुई है। Apple की तरफ से पहले ही संकेत दिया गया था कि कंपोनेंट की बढ़ती कॉस्ट को मैनेज करना मुश्किल हो रहा है। Apple के नए CEO टिम कुक ने कहा था कि AI डेटा सेंटर्स की मांग के कारण मेमोरी और स्टोरेज की कॉस्ट बढ़ने से कीमतों को बढ़ाना जरुरी है। कुछ दिन बाद Apple ने MacBook Neo, MacBook Air, MacBook Pro और iPad मॉडल्स समेत कई प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाई हैं।

iPhone 17 की कीमतें घटने के बजाय क्यों बढ़ गईं?
दरअसल मौजूदा समय में मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की कॉस्ट काफी तेजी से बढ़ रही है। इसे आजकल “चिपफ्लेशन” (Chipflation) कहा जा रहा है। इसी वजह से iPhone 17 की कीमतों में इजाफा हुआ।
चिपफ्लेशन क्या है?
सेमीकंडक्टर की कीमत बढ़ने से होने वाली महंगाई को चिपफ्लेशन कहा जाता है। मौजूदा समय में DRAM और NAND स्टोरेज जैसी मेमोरी चिप्स पर बहुत ज्यादा दबाव है। चिप का इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप और दूसरे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट में होता है। इस समय AI कंपनियां और क्लाउड प्रोवाइडर डेटा सेंटर्स के लिए बहुत ज्यादा मेमोरी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी वजह से मेमोरी चिप की सप्लाई कम हो गई है और इसका असर स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है।
इसकी वजह से मैन्युफैक्चरर्स पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ रहा है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर मेमोरी कैपेसिटी का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है। सप्लाई कम हो गई है और रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स की कीमतें बढ़ रही हैं।
TrendForce ने अगस्त में अनुमान लगाया था कि 256 GB वाले iPhone 18 Pro के लिए कंपोनेंट्स की कॉस्ट में साल-दर-साल के हिसाब से करीब 38% की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके पीछे का खास कारण मेमोरी की कॉस्ट है। इसके अलावा यह भी अनुमान लगाया गया था कि फोन के कुल पार्ट्स की कॉस्ट में मेमोरी का हिस्सा साल 2026 के थर्ड क्वार्टर में करीब 34% हो गया है, जो कि 1 साल पहले 10% था।
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