नेपाल एक रुपए के सिक्के पर फिर छापेगा विवादित नक्शा: नेपाल राष्ट्र बैंक ने कहा- डिजाइन बदलेगा लेकिन मैप रहेगा; नया कॉइन पहले से छोटा होगा
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इंटरनेशनल डेस्क। नेपाल ने एक बार फिर अपने एक रुपए और दो रुपए के सिक्के पर विवादित नक्शा छापने का फैसला किया है। 7 दिन पहले ही सरकार ने कहा था कि इस क्शे की जगह एक मठ (Monastery) की तस्वीर छापी जाएगी, लेकिन अब अपने फैसले से पलट गई है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने पुष्टि की है कि देश के नए एक रुपए के सिक्के पर वही विवादित नक्शा छापा जाएगा, जिसमें लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है।
बता दें कि नेपाल लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी पर अपना दावा करता है, जबकि भारत इन्हें उत्तराखंड का हिस्सा मानता है। भारत लगातार कहता रहा है कि इस सीमा विवाद का समाधान दोनों देशों के बीच बातचीत से होना चाहिए। अब नेपाल सरकार ने फिर उसी विवादित नक्शे वाले सिक्के को जारी करने का फैसला किया है। इससे दोनों देशों के रिश्ते में फिर खटास आ सकती है।
नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता ने क्या कहा
नेपाल राष्ट्र बैंक के स्पोक्सपर्सन गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा- बैंक को अभी सिक्के का अंतिम डिजाइन ऑफिशियली नहीं मिला है, लेकिन यह तय है कि उस पर विवादित नक्शा ही होगा। नया एक रुपए का सिक्का पहले के मुकाबले आकार में छोटा और वजन में हल्का होगा। इसे बनाने में दूसरे मेटल का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि सिक्का कब से बाजार में आएगा, इसकी तारीख अभी नहीं बताई गई है।
2020 में विवादित नक्शा अपनाया था
यह वही विवादित नक्शा था जिसे साल 2020 में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने ऑफिशियली अपनाया था। उसी साल नेपाल की संसद ने संविधान में संशोधन कर कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल के नक्शे में शामिल किया था। बाद में यही नक्शा सरकारी दस्तावेजों, स्कूल की किताबों और 1 रुपए के सिक्के पर भी छापा गया। भारत ने उस समय इसका पुरजोर विरोध किया था। भारत ने कहा था कि यह हिस्टोरिकल फैक्ट्स के खिलाफ है।

20 जुलाई को नक्शा हटाने की बात कही थी
दिलचस्प बात यह है कि 20 जुलाई को प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की सरकार ने सिक्के से नेपाल का नक्शा हटाकर उसकी जगह एक मठ की तस्वीर लगाने का फैसला किया था। उस समय माना जा रहा था कि सरकार भारत के साथ गैरजरूरी टेंशन से बचना चाहती है। लेकिन कुछ ही दिनों बाद नेपाल राष्ट्र बैंक की ओर से किए गए ऐलान से यह साफ हो गया है कि सरकार ने अपना फैसला बदल दिया है।
मई 2020 में विवाद शुरू हुआ था
भारत और नेपाल के बीच यह विवाद मई 2020 में शुरू हुआ था। तब भारत ने उत्तराखंड के धारचूला से लिपुलेख पास तक करीब 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया था। नेपाल ने दावा किया कि यह सड़क उसके इलाके से होकर गुजरती है। इसके बाद ओली सरकार ने नया पॉलिटिकल मैप जारी कर कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया। भारत का कहना है कि ये तीनों इलाके उत्तराखंड का हिस्सा हैं और 1962 के भारत-चीन जंग के बाद से भारत ही यहां से जुड़े एडमिनिस्ट्रेटिव काम-काज देख रहा है।

