Meta पर 26 एक्स-एम्प्लॉयीज ने किया केस: कहा- AI का इस्तेमाल कर नौकरी से निकाला, हमारे साथ भेदभाव किया
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Meta पर 26 एक्स-एम्प्लॉयीज ने AI के जरिए छंटनी में भेदभाव का आरोप लगाते हुए केस किया।
टेक डेस्क। मेटा (Meta) के 26 एक्स-एम्प्लॉयीज ने कंपनी पर केस किया है। न्यूज एजेंसी रॉयर्टस उनका आरोप है कि, कर्मचारियों की छंटनी के लिए मूल्यांकन करते समय AI का इस्तेमाल किया गया है, जिससे डिसेबल एम्पालॉयीज, प्रेगनेंट वर्कर्स और मेडिकल लीव लेने वाले एम्पालॉयीज के साथ भेदभाव हुआ है।
Meta ने छंटनी के लिए AI का इस्तेमाल किया
यह केस कैलिफोर्निया के ओकलैंड में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में फाइल किया गया है। फाइल केस में आरोप लगाया गया कि एम्पालॉयीज की छंटनी करते समय Meta ने AI की मदद से तैयार परफॉर्मेंस डेटा पर ध्यान दिया। इस परफॉर्मेंस डेटा में प्रोडक्टिविटी लेवल और AI टोकन का इस्तेमाल शामिल किया गया था।
कम्पलेंट के मुताबिक, इसकी वजह से उन एम्पालॉयीज का नुकसान हुआ, जिन्होंने बीमारी, इलाज या किसी दूसरी हेल्थ से जुड़ी परेशानियों के कारण मेडिकल लीव ली थी। उन्होंने इस छंटनी के फैसले को भेदभावपूर्ण बताया।
Meta ने एम्पालॉयीज के साथ भेदभाव किया
मुकदमा फाइल करने वाले एम्पालॉयीज ने अपनी पहचान छुपाते हुए आरोप लगाया है कि Meta ने ऐसी स्ट्रेटजी अपनाईं, जिन्होंने डिसेबल एम्पालॉयीज और मेडिकल लीव लेने वाले एम्पालॉयीज के साथ भेदभाव किया। उनका कहना है कि कंपनी का यह कदम अमेरिका के फेडरल (Federal) और राज्य (State) स्तर के उन एम्पालॉयमेंट कानूनों का उल्लंघन करता है, जो डिसेबल एम्पालॉयीज के खिलाफ भेदभाव और मेडिकल लीव लेने पर किसी भी तरह के हैरेसमेंट पर रोक लगाते हैं। इस ग्रुप में कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया समेत अमेरिका के 6 राज्यों के पूर्व कर्मचारी शामिल हैं।
8,000 एम्पालॉयीज की नौकरियों पर असर पड़ा
Meta ने साल की शुरुआत में अपने ग्लोबल वर्कफोर्स में लगभग 10% कटौती करने का ऐलान किया था, जिससे लगभग 8,000 एम्पालॉयीज की नौकरियों पर असर पड़ा। कंपनी ने छंटनी का पहला राउंड मई में शुरु किया था। अब फाइल केस में आरोप लगाया गया है कि, एम्पालॉयीज के परफॉर्मेंस को एनालिसिस करने के लिए अपनाए गए प्रोसेस ने उन एम्पालॉयीज पर सबसे ज्यादा असर ड़ाला, जो अप्रूव्ड मेडिकल लीव पर रहने की वजह से पहले जैसी प्रोडक्टीविटी मेनटेंन नहीं कर पाए।
AI टूल का इस्तेमाल करके बनाया परफार्मेंस डेटा
केस करने वालों ने कहना है कि, आउटपुट और AI टूल का इस्तेमाल करके बनाए गए परफार्मेंस डेटा में सही तरीके से ली गई छुट्टियों का ध्यान नहीं रखा गया, जिससे छंटनी के दौरान भेदभावपूर्ण नतीजे सामने आए।
Meta के स्पोक्सपर्सन ने आरोपों को किया खारिज
इस केस पर जवाब देते हुए Meta के एक स्पोक्सपर्सन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा इन दावों में कोई दम नहीं है। स्पोक्सपर्सन ने आगे कहा कि वर्कफ़ोर्स मैनेजमेंट और ऑर्गनाइजेशन फैसले लोगों द्वारा लिए गए थे और लिए जाते है, न कि AI द्वारा।
वर्कप्लेस पर AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर सवाल
देखा जााए तो यह मामला वर्कप्लेस पर AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवालों में एक नया चैप्टर जोड़ता है, क्योंकि आज कई बड़ी कंपनियां एम्पालॉयीज के परफॉर्मेंस, प्रोड्क्टीविटी और वर्कफोर्स प्लानिंग का एनालिसिस करने के लिए AI टूल्स का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं।
ऐसे में लीगल एक्सपर्ट का कहना है कि भर्ती, प्रमोशन या छंटनी जैसे जरुरी फैसलों में इस्तेमाल होने वाले AI सिस्टम को भेदभाव-रहित (Anti-Discrimination) कानूनों का पूरी तरह पालन करना चाहिए। साथ ही, इन सिस्टम की नियमित समीक्षा भी जरूरी है ताकि यह देखा जा सके कि किसी सही ग्रुप के एम्पालॉयीज के साथ अनजाने में भी गलत तरीके से भेदभाव न हो।

