114 साल के फौजा सिंह का निधन: टर्बन्ड टॉरनेडो कहे जाने वाले फौजा की रोड एक्सीडेंट में मौत; 89 साल की उम्र शुरू की थी मैराथन दौड़
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भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक फौजा सिंह ने मुंबई से लेकर कनाडा और लंदन में मैराथन दौड़कर अलग पहचान बनाई। (PTI)
114 साल के मैराथन रनर फौजा सिंह का निधन हो गया। टर्बन्ड टॉरनेडो कहे जाने वाले फौजा की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई है। यह हादसा जालंधर के पास ब्यास में हुआ। फौजा को किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। इसके बाद रात 3.30 बजे उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली।
रनर फौजा सिंह की खास बात यह है कि उन्होंने 89 साल की उम्र में मैराथन में दौड़ना शुरू किया था। इसके बाद भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक फौजा सिंह ने मुंबई से लेकर कनाडा और लंदन में मैराथन दौड़कर अलग पहचान बनाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।
उनके पैर बचपन में बेहद कमजोर थे
इसी जुनून के चलते फौजा सिंह को ‘टर्बन्ड टॉरनेडो’ (पगड़ी वाला तूफान) कहा जाने लगा। उनकी बायोग्राफी का टाइटल भी यही है। फौजा सिंह का जन्म 1 अप्रैल 1911 को पंजाब के जालंधर जिले के ब्यास पिंड में ही हुआ था। आखिरी सांस भी उन्होंने यहीं ली।
फौजा सिंह बचपन में बेहद कमजोर थे। उनके पैरों में कुछ दिक्कत थी। लेकिन धीरे-धीरे पिता के साथ खेतों में काम करते हुए उन्होंने शरीर और पैरों को मजबूत किया। उनकी शादी ज्ञान कौर से शादी हुई। फिर तीन बेटे और तीन बेटियों का जन्म हुआ।
बेटे कुलदीप को छोड़कर बाकी बच्चे नौकरी और काम की तलाश में कनाडा और लंदन चले गए। मगर 1992 में पत्नी और 1994 में बेटे कुलदीप की मौत हो गई। अकेले फौजा बच्चों के पास बच्चों के पास लंदन चले गए। यहीं से उन्होंने 89 की उम्र में मैराथन में दौड़ना शुरू किया।
Fauja Singh Ji was extraordinary because of his unique persona and the manner in which he inspired the youth of India on a very important topic of fitness. He was an exceptional athlete with incredible determination. Pained by his passing away. My thoughts are with his family and…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 15, 2025
रब से बातें करते हुए पूरी की थी पहली मैराथन
फौजा सिंह की पहली मैराथन 2000 रही थी। तब उन्होंने 26 मील की दौड़ लगाई थी। इसके लिए उन्होंने 6 घंटे और 54 मिनट का समय लिया था। तब उनसे पूछा था कि आप इतना लंबा कैसे दौड़े? इस पर फौजा ने कहा था, 'पहले 20 मील तो आसान थे, लेकिन आखिरी के 6 मील के लिए मैं अपने रब से बातें करता रहा।' इसके बाद भी वे रुके नहीं।
2004 में फौजा सिंह ने 93 साल की उम्र में लंदन मैराथन पूरी की। फिर 2011 में 100 साल की उम्र में उन्होंने टोरंटो मैराथन पूरी की और 100+ की कैटेगरी में रिकॉर्ड बनाया। वह दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक थे। फौजा सिंह ने 2012 लंदन ओलंपिक की मशाल भी थामी थी।

