हैप्पी बर्थडे लिटिल मास्टर: क्रिकेटर नहीं तो मछुआरे होते गावस्कर, सिनेमा में भी आजमाया हाथ, ड्रेसिंग रूम में सिंगर बन किया एंटरटेन
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सुनील गावस्कर (फाइल फोटो) PTI
लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर का गुरुवार (10 जुलाई) को जन्मदिन है। गावस्कर ने अपने खेल के दम पर क्रिकेट जगत में अलग पहचान बनाई। गावस्कर ने अपनी जिंदगी को सिर्फ क्रिकेट के मैदान तक सीमित नहीं, बल्कि उन्होंने फिल्मी दुनिया में भी हाथ आजमाया।
उनके जीवन की कुछ अनसुनी कहानियां जैसे जन्म के समय अस्पताल में बदले जाने से ड्रेसिंग रूम में गाने तक बेहद दिलचस्प हैं। बचपन में प्रैक्टिस के दौरान नाक टूटी पर हौसला नहीं। आइए जानते हैं गावस्कर के जीवन के ऐसे 5 किस्से, जिन्हें शायद कम ही लोग जानते हैं।
जन्म के समय अदला-बदली
सुनील मनोहर गावस्कर का जन्म 10 जुलाई 1949 को बॉम्बे (अब मुंबई) के एक अस्पताल में हुआ। जन्म के बाद उनके परिवार के लोग उन्हें देखने आए। उनके चाचा नारायण मासुरकर उन्हें पहली बार देखने गए थे। तब उन्होंने गावस्कर के कान के पास एक खास बर्थमार्क देखा। जब दूसरे दिन वह दोबारा आए और उन्होंने गोद में लिया, तो वह निशान गायब था। उनके चाचा ने तुरंत अस्पताल में हंगामा कर दिया।
जांच के दौरान पता चला कि बच्चों को नहलाते समय गलती से सुनील को एक मछुआरे की पत्नी के पास सुला दिया गया था और मछुआरे का बच्चा उनकी मां के पास था। इस घटना का जिक्र गावस्कर ने अपनी आत्मकथा 'सनी डेज' में किया है। उन्होंने लिखा, “अगर मेरे चाचा की तेज नजर और जिद न होती तो आज मैं क्रिकेटर नहीं, बल्कि मछुआरा होता।”
मराठी फिल्मों में अभिनय
सुनील गावस्कर ने अपने टेस्ट क्रिकेट करियर की शुरुआत 6 मार्च 1971 को वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में की थी। क्रिकेट के मैदान में धमाल मचाने वाले गावस्कर ने सिनेमा जगत में भी कदम रखा था।
साल 1979 में, जब वह क्रिकेट करियर के चरम पर थे, तब उन्होंने मराठी फिल्म सावली प्रेमाची में मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म में गावस्कर ने एक प्रेमी का किरदार निभाया था। लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही। दर्शकों को उनकी एक्टिंग ज्यादा पसंद नहीं आई। बाद में गावस्कर ने मजाक में कहा, “गेंद को बल्ले से मारना ही मेरे लिए बेहतर है।”
टेस्ट वॉक-आउट विवाद
1981 में मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में गावस्कर एक विवाद में फंस गए। तीसरे टेस्ट की दूसरी पारी में डेनिस लिली की एक गेंद पर उन्हें LBW आउट दिया गया, जबकि उन्हें पूरा भरोसा था कि गेंद उनके बैट से लगी थी।
अंपायर के इस फैसले से नाराज होकर उन्होंने अपने साथी खिलाड़ी चेतन चौहान को ड्रेसिंग रूम में चलने के लिए कहा। मैच लगभग रुक ही गया था पर टीम मैनेजर ने चेतन को वापस मैदान में भेजा। यह घटना क्रिकेट इतिहास का एक चर्चित पल बन गई। इसने सुनील के आत्मसम्मान और निडरता को दर्शाया।
बल्लेबाजी करते वक्त टूटी नाक
सुनील गावस्कर की प्रतिभा को निखारने में उनकी मां मीनाक्षी का बहुत बड़ा योगदान रहा। बचपन में वे आंगन में अपनी मां के साथ टेनिस बॉल से क्रिकेट की प्रैक्टिस करते थे। एक दिन मां की बॉल गावस्कर की नाक पर लग गई, जिससे काफी खून बहा। लेकिन फिर भी उन्होंने क्रिकेट खेलना नहीं छोड़ा। एक बार उन्होंने मजाक में कहा, “मां की गेंदबाजी ने मुझे तेज गेंदबाजों का सामना करना सिखाया।”
ड्रेसिंग रूम में सिंगर
गावस्कर न केवल बल्ले से रन बनाते थे, बल्कि ड्रेसिंग रूम में अपने सिंगिंग टैलेंट से भी साथी खिलाड़ियों का मनोरंजन करते थे। उन्हें बॉलीवुड और मराठी गीतों का शौक था। लंबी टेस्ट पारियों या तनावपूर्ण मैचों के दौरान वे अक्सर किशोर कुमार या लता मंगेशकर के गाने गुनगुनाते थे। एक बार 1978–79 की वेस्टइंडीज सीरीज के दौरान, गावस्कर ने ड्रेसिंग रूम में “मेरे नैना सावन भादों” गाया।
सुनील गावस्कर का क्रिकेट रिकॉर्ड
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फॉर्मेट |
मैच |
रन |
वेस्ट स्कोर |
|
टेस्ट |
125 |
10122 |
236* |
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वनडे |
108 |
3092 |
103* |

