इंडिया Vs इंग्लैंड लॉर्ड्स टेस्ट-725: 20 ओवर में 3 बार गेंद बदली, फिर भी टीम इंडिया नाराज; जानिए क्या है बॉल बदलने का नियम
Published: Updated:
4 min read

भारतीय टीम। (AP)
भारतीय टीम इस समय इंग्लैंड दौरे पर 5 टेस्ट की सीरीज खेल रही है। इसका तीसरा मुकाबला 10 जुलाई से लॉर्ड्स में खेला जा रहा है। शुरुआती तीनों टेस्ट में भारतीय कप्तान शुभमन गिल और गेंदबाज ड्यूक बॉल के बदलते शेप से काफी नाराज दिखे हैं। लॉर्ड्स टेस्ट की पहली पारी में भी यही हाल रहा। इस दौरान 20 ओवर में (80 से 99 ओवर के बीच) 3 बार बॉल बदली, लेकिन हर बार भारतीय प्लेयर शिकायत करते ही दिखे हैं।
दरअसल, लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया। पहले दिन का खेल खत्म होने तक 83 ओवर में 4 विकेट गंवाकर 251 रन बनाए थे। इस दिन नियमानुसार 80 ओवर के बाद भारतीय टीम को नई बॉल मिली थी। हालांकि नई बॉल से 3 ओवर में कोई विकेट नहीं मिला।
10 ओवर में ही खराब हुई नई बॉल
दूसरे दिन इंग्लैंड ने खेलना शुरू किया तो 3 ओवर पुरानी बॉल से जसप्रीत बुमराह ने शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने अपने दो ओवर में ही 3 विकेट लिए। मगर 91वें ओवर में आकर इस नई बॉल का भी शेप खराब हो गया। इस बात की शिकायत कप्तान गिल ने अंपायर से की। इसी बीच तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज भी नाराज दिखे।
माइक स्टम्प में सिराज को कहते सुना गया, 'ये 10 ओवर पुरानी गेंद है? सच में?' गिल की अपील के बाद फील्ड अंपायर पॉल रीफेल और शरफुद्दौला सैकत ने गेंद को जांचने के लिए 'रिंग टेस्ट' किया, लेकिन गेंद उस रिंग से नहीं निकली। ऐसे में अंपायर ने यह बॉल भी बदल दी। मगर खास बात यह रही कि अंपायर ने बदले में जो बॉल दी, उससे भी भारतीय कप्तान और गेंदबाज खुश नहीं दिखे। क्योंकि उसका शेप भी खराब ही था उन्होंने अंपायर के सामने नाराजगी जाहिर भी की, मगर बॉल नहीं बदली गई।

इंग्लैंड की पारी के दौरान बॉल बदलते हुए अंपायर। पास में खड़े भारतीय कप्तान शुभमन गिल, मोहम्मद सिराज और आकाश दीप।
बदली गई बॉल से भी खुश नहीं थे गिल
मजबूरी में भारतीय बॉलर्स ने ओवर्स करना शुरू किया। बॉल खराब होने के कारण इंग्लिश बल्लेबाजों ने जमकर रन बनाए। विकेट भी नहीं मिला। ऐसे में भारतीय कप्तान ने 99वें ओवर में एक बार फिर बॉल बदलने की अपील की। यहां फिर बॉल का टेस्ट हुआ और वो रिंग से नहीं निकली। ऐसे में अंपायर ने तीसरी बार बॉल को बदला।
दूसरे दिन जो रूट ने शतक लगाकर खेल की शुरुआत की थी। मगर बुमराह ने 3 विकेट लेकर इंग्लैंड का स्कोर 271 रन पर 7 विकेट कर दिया था। यहां से टीम इंडिया के पास इंग्लैंड को जल्दी ऑलआउट करने का मौका था। मगर 91वें ओवर में जो बॉल बदली गई, उसने गेम ही बदल दिया। भारतीय गेंदबाज विकेट लेने को तरस गए।
यहां से जैमी स्मिथ और ब्रायडन कार्स ने 8वें विकेट के लिए 84 रन की पार्टनरशिप की। इस तरह इंग्लैंड ने पहली पारी में 387 रन बनाए।
क्या है टेस्ट मैच में बॉल बदलने का नियम?
इस फॉर्मेट में बॉल बदलने के 2 नियम हैं। पहला तो यह है कि हर पारी की शुरुआत नई बॉल से होती है। इसके 80 ओवर बाद दूसरी नई बॉल ली जाती है। हालांकि यह भी फील्डिंग टीम के कप्तान पर डिपेंड है कि वह नई बॉल लेता है या पुरानी बॉल से ही खेल जारी रखता है।
दूसरा है कि यदि 80 ओवर से पहले कोई बॉल खराब होती है या उसका शेप बदलता है, तो अंपायर इसे बदल सकता है। हालांकि यह पूरी तरह से अंपायर के फैसले पर निर्भर करता है कि बॉल बदलते हैं या नहीं। इस दौरान बॉल को रिंग टेस्ट से गुजरना होता है। यदि बॉल बदलने का फैसला होता है तो नई बॉल नहीं मिलती है। बल्कि रिप्लेस की जा रही बॉल से जितने ओवर का खेल हुआ है, उतनी ही ओवर पुरानी बॉल मिलती है।

