सुप्रीम कोर्ट ने अपना ही फैसला पलटा: पहले पिता को दी बच्चे की कस्टडी; स्थिति बिगड़ी तो मां के हवाले किया
Published:
3 min read

मामला 13 साल के बच्चे की कस्टडी का है। फोटो-सिंबोलिक
सुप्रीम कोर्ट ने रेयर डिसीजन के तहत अपना ही एक फैसला पलट दिया। यह मामला 13 साल के बच्चे की कस्टडी को लेकर था। सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में बच्चे की कस्टडी उसके पिता को दी थी। हालांकि, पिता के साथ रहकर बच्चे की मानसिक स्थिति खराब होने लगी। वो तनाव में रहने लगा।
मां ने तब सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पेटिशन दाखिल किया। बच्चे की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पुराना फैसला पलटते हुए बच्चे की कस्टडी मां को दे दी।
कोर्ट ने कहा- हितों का ध्यान रखना जरूरी
लाइव लॉ के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बच्चे के हितों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। उसके हितों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट अपना पुराना फैसला बदल सकती है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ये देखना जरूरी नहीं है कि कानूनी रूप से कस्टडी किसे मिलनी चाहिए। बल्कि, अहम यह है कि बच्चा किसके साथ कंफर्टेबल और मेंटली खुश महसूस कर रहा है।
बच्चे की मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी
दरअसल, मां से दूर रहने की वजह से बच्चा स्कूल जाने से मना करने लगा था। वो अकेले में रोता था। साथ ही, खाना-पीना भी कम कर दिया था। बच्चे की मां ने कोर्ट में थैरेपिस्ट की रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में साफ था कि मां से दूर रहने की वजह से उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ रही है
पूरा मामला है क्या, सिलसिलेवार समझिए
- केरल के रहने वाले एक कपल ने 2011 में शादी की और 2012 में बेटे को जन्म दिया। शादी के बाद उनकी मैरिड लाइफ सही नहीं रही। दोनों ने तलाक ले लिया। तलाक के बाद तय हुआ कि बच्चा मां के साथ रहेगा, जबकि पिता महीने में दो बार उससे मिल सकता है।
- 2015 में महिला ने दूसरी शादी कर ली। उसने एक और बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान 4 साल तक उसके पहले बच्चे और पिता के बीच कोई मुलाकात नहीं हुई। 2019 में महिला मलेशिया शिफ्ट होने वाली थी। इसके लिए बच्चे के पासपोर्ट पर पिता के सिग्नेचर की जरूरत थी। महिला ने पूर्व पति को बुलाया।
- पिता को लगा कि उसका बच्चा अब मलेशिया चला जाएगा। उसने केरल की एक फैमिली कोर्ट में बेटे की परमानेंट कस्टडी के लिए केस दायर किया। हालांकि, 2022 में फैमिली कोर्ट ने कस्टडी मां को दी। साथ ही यह भी कहा कि वो छुट्टियों में बच्चे को विदेश ले जा सकती हैं।
- इसके बाद पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला पलटते हुए बच्चे की कस्टडी पिता को दे दी। हाईकोर्ट का कहना था कि बच्चे को मलेशिया शिफ्ट करना उसके हित में नहीं होगा।
- इसके बाद मां ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। हालांकि, अब फैसले को पलटते हुए बच्चे की कस्टडी आखिरकार मां को ही दे दी।

