लैंड फॉर जॉब स्कैम-953: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ट्रायल कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी; नौकरी के बदले जमीन मामले में लालू, राबड़ी के अलावा तेजस्वी भी आरोपी
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लालू यादव ने लैंड फॉर जॉब मामले की दोबारा जांच को चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि इस मामले में पहले क्लोजर रिपोर्ट फाइल की जा चुकी है। (फाइल)
राष्ट्रीय जनता दल के चीफ लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शुक्रवार को लैंड फॉर जॉब स्कैम में निचली अदालत में ट्रायल रोकने से इनकार कर दिया। लालू यादव ने गुरुवार को ‘नौकरी के बदले जमीन’ घोटाले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें अदालत ने स्कैम से जुड़े मामलों में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 मई को सुनवाई के दौरान कहा था कि कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस वजह नहीं हैं। हालांकि, कोर्ट ने FIR रद्द करने की लालू यादव की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया था। दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 12 अगस्त को होनी है।
लालू यादव ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी
- लालू ने याचिका में कहा कि इस कथित घोटाले में 14 साल बाद यानी 2022, 2023 और 2024 में FIR दर्ज की गईं। उन्होंने कहा कि CBI की शुरुआती जांच भी बंद हो चुकी है और एजेंसी ने क्लोजर रिपोर्ट भी पेश कर दी।
- उन्होंने इस जांच को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, इस मामले में पूछताछ और जांच दोनों ही शुरू करना गैरकानूनी है। क्योंकि दोनों ही PC एक्ट की धारा 17(A) के तहत बिना मंजूरी के शुरू की गई हैं। बिना मंजूरी के कोई भी जांच शुरू करना अपने आप में गैरकानूनी कदम है।
क्या है लैंड फॉर जॉब स्कैम
लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 तक UPA सरकार में रेल मंत्री थे। उनके रेल मंत्री रहते ही ये पूरा घोटाला हुआ। आरोप है कि रेल मंत्रालय में बिना परीक्षा और मेरिट के फर्जी भर्तियां की गईं। इन भर्तियों के बदले उम्मीदवारों से उनकी जमीन बेहद सस्ते दामों पर या गिफ्ट के तौर पर ली गई। ये जमीनें लालू यादव के परिवार या उनसे जुड़े ट्रस्टों और कंपनियों के नाम पर ली गईं। इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव और कुछ अधिकारी भी शामिल हैं।
अब तक मामले में क्या क्या हुआ
- 2004–09: आरोप है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते जमीन के बदले नौकरी दी गई।
- मई 2022 : सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर की।
- अक्टूबर 2022: सीबीआई ने मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की। इसमें लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 15 लोगों को आऱोपी बनाया गया।
- 7 मार्च 2023 : सीबीआई ने लालू यादव से पूछताछ की।
- 16 मई 2023 : सीबीआई ने 9 ठिकानों पर छापेमारी की। ये ठिकाने लालू के करीबियों से जुड़े थे।
- 6 अगस्त 2024: ईडी ने इससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में लालू यादव, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और अन्य 6 के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की।
- फरवरी 2025 : दिल्ली कोर्ट ने लालू यादव, तेज प्रताप यादव, हेमा यादव को समन भेजा और 11 मार्च को पेश होने के लिए कहा।
- मई 2025 : लालू यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सीबीआई द्वारा दर्ज FIR रद्द करने की मांग की।
- जून 2025 : दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
- जुलाई 2025 : दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
- 18 जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने लालू की मांग ठुकराई, ट्रायल पर रोक लगाने से किया इनकार।

