शिल्पा शेट्टी-राज कुंद्रा पर 60 करोड़ की ठगी का आरोप: कारोबारी बोला- मुझसे कर्ज लिया और पूरा नहीं लौटाया; एक्ट्रेस के वकील ने कहा- आरोप बेबुनियाद
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राज कुंद्रा पर पहले भी ED की कार्रवाई हो चुकी है। उन्हें 2021 में पोर्नोग्राफी फिल्म से लिंक होने के कारण गिरफ्तार किया गया था। लेकिन बाद में उन्हें बेल मिल गई। (फाइल)
शिल्पा शेट्टी और पति राज कुंद्रा पर 60 करोड़ रुपए की ठगी का आरोप लगा है। यह मामला उनकी कंपनी बेस्ट डील टीवी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। मुंबई के बिजनेसमैन दीपक कोठारी ने इस कपल पर ठगी के आरोप लगाए हैं। कोठारी का कहना है कि 2015 से 2023 के बीच उन्होंने शिल्पा-राज को कंपनी के लिए 60.48 करोड़ दिए थे। उन्होंने इसे बिजनेस में लगाने की बजाए पर्सनल एक्सपेंसेस में इस्तेमाल कर लिया।
हालांकि, शिल्पा और राज के वकील ने कोठारी के आरोप खारिज करते हुए इन्हें बेसलेस यानी बेबुनियाद करार दिया।
कर्ज नहीं लौटाया
कोठारी के मुताबिक- दोनों (शिल्पा-राज) से मेरे मुलाकात एक एजेंट राजेश आर्या के जरिए 2015 में हुई थी। उस समय शिल्पा कंपनी की डायरेक्टर थीं। उनके पास 87% से ज्यादा शेयर थे। राजेश ने मुझसे 12% इंटरेस्ट रेट के साथ 75 करोड़ का लोन मांगा। उन्होंने कहा कि टैक्स बचाने के लिए इसे इन्वेस्टमेंट के तौर पर दिखाएं। जब डील हुई तो दोनों ने पैसा लौटाने का वादा किया। अप्रैल 2015 में पहली किस्त के तौर पर 31.95 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। टैक्स की समस्या बनी रही, तो फिर सितंबर में दूसरी डील हुई। जुलाई 2015 से मार्च 2016 के बीच उन्होंने मुझे 28.54 करोड़ रुपए और लौटाए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिल्पा ने उन्हें अप्रैल 2016 में पर्सनल गारंटी भी दी थी। हालांकि सितंबर में उन्होंने कंपनी डायरेक्टर पोस्ट से रिजाइन कर दिया।
कोठारी आगे कहते हैं- इसके बाद मुझे पता चला कि इस कंपनी पर 1.28 करोड़ रुपए का इनसॉल्वेंसी केस भी है। इस बारे में मुझे बिल्कुल भी पता नहीं था। कई बार पैसा वापस मांगने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। 2015 से 2023 तक यह सब एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया।

शिल्पा-राज के वकील बोले- आरोप बेबुनियाद
इस मामले में शिल्पा-राज के वकील प्रशांत पाटिल ने भी मीडिया को बयान जारी किया है। उन्होंने कहा- मेरे क्लाइंट पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद हैं। यह मामला सिविल नेचर का है। इस पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) मुंबई ने 4 अक्टूबर 2024 को फैसला भी दे दिया था।
वकील ने कहा- यह पुरानी इन्वरमेंट है। इसमें एक कंपनी फाइनेंसियल क्राइसिस में फंस गई थी। बाद में मामला NCLT तक पहुंच गया। हमारे ऑडिटर्स ने समय-समय पर EOW को सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स और कैश फ्लो स्टेटमेंट हैंडओवर कर दिए थे। इन्वरमेंट एग्रीमेंट को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह पूरी तरह इक्विटी इन्वेस्टमेंट का मामला है।
वकील ने कहा- कंपनी को पहले ही लिक्विडेशन ऑर्डर मिल चुका है। यह जानकारी पुलिस को भी दी गई है। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एक साल में 15 से ज्यादा बार पुलिस स्टेशन जाकर सारे सबूत जमा करा चुके हैं। यह मामला सिर्फ मेरे क्लाइंट की इमेज खराब करने के लिए है। यह पूरी तरह बेसलेस है। हम इसके खिलाफ एक्शन लेंगे।

EOW करेगी जांच
यह FIR कोठारी ने पहले जुहू पुलिस स्टेशन में की थी। हालांकि, 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेनदेन होने के कारण इसे इकनॉमिक ऑफेंसेज विंग (EOW) को सौंप दिया गया। फिलहाल, EOW ही इस मामले की जांच कर रही है।

