J&K में 'शहीद दिवस' पर हंगामा: गेट फांदकर फातिहा पढ़ने पहुंचे सीएम अब्दुल्ला, रोकने की कोशिश करते रह गए पुलिसकर्मी
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'मजार ए सुहादा' पर फातिहा पढने के लिए पुलिस ने सीएम उमर अब्दुल्ला को रोकने की कोशिश की हालांकि, वह गेट फांदकर मेमोरियल पहुंच गए।
जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में सोमवार सुबह 'मजार ए शुहादा' के पास अफरा तफरी मच गई। सीएम उमर अब्दुल्ला और उनके समर्थक 'शहीद दिवस' पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। हालांकि सीएम ने गेट फांदकर 'मजार ए शुहादा' पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके पिता और पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला भी थे। 'मजार ए शुहादा' मेमोरियल उन 22 प्रदर्शनकारियों की याद में बनाया गया है, जिन्हें 1931 में महाराजा हरि सिंह की डोगरा फोर्स ने मार दिया था। एक दिन पहले सीएम अब्दुल्ला ने प्रशासन पर नजरबंद करने का आरोप लगाया था।
हमारे साथ हाथापाई को कोशिश हुई- सीएम
सीएम अब्दुल्ला ने ANI से बात करते हुए बताया, 'बड़े अफसोस की बात है जो लोग दावा करते है कि उनकी जिम्मेदारी सिक्योरिटी और सिर्फ लॉ एंड ऑर्डर की है। उन्होंने हमें रविवार को यहां आकर फातिहा पढ़ने की इजाजत नहीं दी। सबको घरों में नजरबंद किया। मैंने कंट्रोल रूम को बताया मैं यहां आना चाहता हूं। मिनटों के अंदर मेरे घर के बाहर बंकर बना दिया। आज मैंने बताया ही नहीं, मैं बिना बताए यहां आया। नहाटा चौक में अपनी गाड़ी खड़ी की। इनकी बेशर्मी देखिये, आज भी इन्होंने हमें रोकने की कोशिश की। फिर हाथापाई की कोशिश की, झंडे फाड़ने की कोशिश की'। 
'मजार ए शुहादा 'पर फातिहा पढते हुए सीएम उमरअब्दुल्ला और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला।
हम किसी के गुलाम नहीं- उमर अब्दुल्ला
उन्होंने कहा, 'जो पुलिस वाले वर्दी पहनते हैं, वो कभी-कभी कानून भूल जाते हैं। मैं इनसे पूछना चाहता हूं किस कानून के तहत हमें रोकने की कोशिश की। अगर रुकावट थी तो कल के लिए थी। यह लोग कहते हैं यह आजाद मुल्क है लेकिन बीच- बीच में यह लोग समझते है हम लोग इनके गुलाम हैं। हम किसी के गुलाम नहीं है, हम गुलाम है तो यहां के लोगों के हैं। आप लोग कब तक रोकोगे। जब हमारी मर्जी होगी तब हम यहां आएंगे'।
This is the physical grappling I was subjected to but I am made of sterner stuff & was not to be stopped. I was doing nothing unlawful or illegal. In fact these “protectors of the law” need to explain under what law they were trying to stop us from offering Fatiha pic.twitter.com/8Fj1BKNixQ
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) July 14, 2025
LG प्रशासन ने लगाई है रोक
सीएम अब्दुल्ला ने जिस मेमोरियल को विजिट किया, वह मेमोरियल उन प्रदर्शनकारियों की याद में बनाया गया है, जिन्हें कश्मीर के महाराजा हरी सिंह की डोगरा फोर्स ने 13 जुलाई 1931 में मार दिया था। रविवार को जम्मू-कश्मीर के सीएम और वहां के नेताओं को 'मजार ए शुहादा' पर जाने सो रोक दिया था। जम्मू-कश्मीर के LG (लेफ्टीनेंट गवर्नर) प्रशासन ने शहीदी दिवस मनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने मेमोरियल पर जाने वाले पर कड़े एक्शन की चेतावनी दी थी।
13 जुलाई 1931 के दिन क्या हुआ था
13 जुलाई कश्मीर के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। 1931 में इसी दिन एक कश्मीरी ग्रुप ने श्रीनगर जेल के बाहर प्रदर्शन किया था। यह लोग अब्दुल कादिर के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे। राजा हरि सिंह डोगरा ने अब्दुल कादिर पर राजद्रोह का मुकदमा लगाया था। अब्दुल कादिर को छुड़ाने के लिए भारी भीड़ ने जेल के बाहर प्रदर्शन किया। महाराजा की फोर्स ने ओपन फायर कर दिया। जिससे 22 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद श्रीनगर में महाराजा के खिलाफ भारी प्रदर्शन हुए। महाराजा और ब्रिटिश रुलर को मुस्लिम कम्युनिटी की मांगें मानने पर मजबूर होना पड़ा। आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर में इस घटना का बड़ा प्नभाव है।
आर्टिकल 370 हटने के बाद बदले नियम
आर्टिकल 370 हटने से पहले हर साल पुलिसकर्मी 'मजार ए शुहादा' पर गन सल्यूट और श्रद्धांजलि देते थे। पॉलिटिकल नेता भी यहां पर श्रद्धांजलि और पब्लिक मीटिंग करते थे। 2019 में जम्मू-कश्मीर से स्पेशल राज्य का दर्जा हटने के बाद से प्रशासन ने यहां पर कार्यक्रम करने पर रोक लगा दी।
जम्मू-कश्मीर में 'शहीद दिवस' 13 जुलाई को ऑफिशियल हॉलिडे घोषित था। 2020 में प्रशासन ने 13 जुलाई और पूर्व सीएम शेख अब्दुल्ला की बर्थ एनिवर्सरी 5 दिसंबर को भी ऑफिशियल हॉलिडे की लिस्ट से हटा दिया। हालांकि महाराजा हरि सिंह की बर्थ एनिवर्सरी जम्मू-कश्मीर में पब्लिक हॉलीडे घोषित है।

