NCP में खुलकर सामने आई अंदरूनी कलह: सुनेत्रा पवार के नेशनल प्रेसिडेंट चुने जाने को लीगल चैलेंज; प्रफुल्ल पटेल ने भी पार्टी में खालीपन की बात कही
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नेशनल डेस्क। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में लीडरशिप को लेकर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के नेशनल सेक्रेटरी सच्चिदानंद सिंह ने महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार के पार्टी की नेशनल प्रेसिडेंट चुने जाने को चुनौती देते हुए लीगल नोटिस भेजा है। इसमें उनके अपॉइंटमेंट को पार्टी संविधान के खिलाफ बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है।
इधर, पार्टी के नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट प्रफुल्ल पटेल ने भी पहली बार सार्वजनिक तौर पर माना कि पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार की जनवरी में प्लेन क्रैश में मौत के बाद पार्टी लीडरशिप में बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। पटेल ने मीडिया से कहा- अजित पवार की कमी को भरना आसान नहीं है। पार्टी के भीतर अब कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे।
अजित पवार की मौत के बाद बदला नेतृत्व
28 जनवरी को बारामती के पास प्लेन क्रैश में अजित पवार की मौत के बाद पार्टी नेतृत्व में धीरे-धीरे काफी बदलाव हुआ। सबसे पहले सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम बनी। फिर वह पार्टी अध्यक्ष भी चुनी गईं। पार्टी के सीनियर लीडर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी निभाने की रेस में थे लेकिन धीरे-धीरे दोनों की भूमिका सीमित होती चली गई। सुनेत्रा पवार के बेटे और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार का पार्टी में प्रभाव तेजी से बढ़ा।
मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से यह सामने आता रहा है कि पार्टी के कई सीनियर लीडर पार्थ पवार की बढ़ती भूमिका से असहज हैं। कम राजनीतिक अनुभव वाले नेता के निर्देशों का पालन करने को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी है।

लीगल नोटिस में क्या कहा गया?
लीगल नोटिस 9 जुलाई को भेजा गया लेकिन सुर्खियों में यह अब आया है। नोटिस के मुताबिक, 17 फरवरी को यह तय किया गया कि अजित पवार की मौत के बाद प्रफुल्ल पटेल अस्थायी तौर पर नेशनल प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बावजूद नेशनल जनरल सेक्रेटरी बृजमोहन श्रीवास्तव ने 18 फरवरी को पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया और नेशनल प्रेसिडेंट के चुनाव की प्रोसेस शुरू करने का प्रस्ताव पारित कर दिया जबकि पार्टी संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने का अधिकार केवल कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के पास था।
सुनेत्रा पवार के चुनाव पर सवाल
नोटिस में कहा गया है कि 26 फरवरी को मुंबई के NSCI क्लब में हुए अधिवेशन में सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। यह अधिवेशन पार्टी संविधान के मुताबिक नहीं था। इसलिए इसमें लिए गए सभी फैसलों की वैधता पर सवाल उठते हैं।
सच्चिदानंद सिंह ने चुनाव आयोग (ECI) को भेजे गए पार्टी के दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा- 28 फरवरी और 10 मार्च को EC को भेजी गई डिटेल में विरोधाभास है। 29 अप्रैल को पार्टी ऑफिस के पदाधिकारियों की लिस्ट राष्ट्रीय प्रतिनिधियों की परमिशन के बिना भेज दी गई।
नोटिस में चार बड़ी मांग
- नोटिस में पार्टी को 15 दिन का वक्त देते हुए मांग की गई है कि सुनेत्रा पवार की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति रद्द की जाए।
- नए पदाधिकारियों की लिस्ट निरस्त हो।
- चुनाव आयोग को भेजे गए 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल के सभी लेटर वापस लिए जाएं।
- पार्टी संविधान के मुताबिक, सेंट्रल इलेक्शन अथॉरिटी का गठन कर संगठन के नए चुनाव कराए जाएं।
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