11 लोगों की मौत की जिम्मेदार RCB: क्रिकेट फ्रेंचाइजी पर क्रिमिनल केस चलेगा, कर्नाटक सरकार ने मंजूरी दी
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IPL जीतने के बाद RCB के जश्न के दौरान भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई थी।
IPL में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की जीत के बाद जश्न के दौरान मची भगदड़ के लिए RCB और कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के खिलाफ आपराधिक केस चलेगा। कर्नाटक कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दे दी है। इससे पहले हाईकोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में कर्नाटक सरकार ने भगदड़ के लिए RCB को जिम्मेदार ठहराया।
रिपोर्ट में कहा गया है, 'आरसीबी ने शहर की पुलिस से एकतरफा और बिना परामर्श/अनुमति के चिन्नास्वामी स्टेडियम में विक्ट्री परेड के लिए लोगों को आमंत्रित किया था।'
हाईकोर्ट के निर्देश पर सार्वजनिक हुई रिपोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार की ओर से पेश इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है। राज्य सरकार ने कोर्ट से रिपोर्ट को गोपनीय रखने की अपील की थी। इसे कोर्ट ने ठुकरा दिया था और कहा था कि इस गोपनीय रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
परेड की सिर्फ जानकारी दी, अनुमति नहीं मांगी- कर्नाटक सरकार
राज्य सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा, आरसीबी मैनेजमेंट ने 3 जून को पुलिस से संपर्क किया था। इसी दिन आरसीबी 18 साल के लंबे इंतजार के बाद आईपीएल जीती थी। इस दौरान मैनेजमेंट की ओर से पुलिस को विक्ट्री परेड के बारे में बताया था। लेकिन यह सिर्फ जानकारी देने के हिसाब से थी न कि कानून के तहत अनुमति मांगने जैसी। रिपोर्ट में कहा गया है, ऐसी अनुमति इवेंट्स से कम से कम 7 दिन पहले मांगनी होती हैं।
रिपोर्ट में विराट कोहली के वीडियो का भी जिक्र
कर्नाटक सरकार ने कोर्ट में कहा, 'RCB ने पुलिस से सलाह मशविरा किए 4 जून को सुबह 7.01 बजे आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक फोटो पोस्ट की। इसमें लोगों को विधानसौदा से चिन्नास्वामी स्टेडियम तक निकाली जाने वाली विक्ट्री परेड के लिए आमंत्रित किया गया। साथ ही इसमें फ्री एंट्री की भी जानकारी दी गई।'
'इसके बाद 8 बजे एक और पोस्ट किया गया, इसमें भी यह जानकारी दोहराई गई। RCB ने @Rcbtweets से 8:55 बजे विराट कोहली का एक वीडियो क्लिप शेयर किया। इसमें विराट कोहली ने कहा, RCB टीम जीत का जश्न बेंगलुरु के लोगों और RCB प्रशंसकों के साथ 4 जून को बेंगलुरु में मनाना चाहती है।'
दोपहर 3.14 बजे पहली बार लिमिटेड फ्री पास का जिक्र
'इसके बाद RCB ने दोपहर 3.14 बजे पोस्ट कर बताया कि विक्ट्री परेड शाम 5 बजे से शाम 6 बजे तक विधानसौदा से चिन्नास्वामी स्टेडियम के बीच होगी। इसके बाद चिन्नास्वामी स्टेडियम में जीत का जश्न मनाया जाएगा। सिर्फ इसी पोर्ट में बताया गया कि एंट्री के लिए फ्री पास लिमिटेड हैं और ये shop.royalchallengers.com पर उपलब्ध हैं। इससे पहले की सभी पोस्ट में पास का कोई जिक्र नहीं किया गया, यह परेड सभी के लिए ओपन थी।'
कैसे हुई भगदड़?
राज्य सरकार के मुताबिक, 4 जून को शाम 3 बजे चिन्नास्वामी स्टेडियम के के पास अचानक लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस सीमित जगह में लगभग 3,00,000 लोग इकट्ठा हो गए, जो स्टेडियम की क्षमता मात्र 35,000 से कहीं ज्यादा थे। RCB मैनेजमेंट की पोस्ट, जिसमें सभी के लिए एंट्री फ्री होने की बात कही गई थी, उसकी वजह से स्टेडियम के गेट पर इतनी भीड़ हो गई। लेकिन 3 बजे RCB ने पोस्ट में कहा कि लिमिटेड फ्री पास होंगे। इसके चलते स्टेडियम के बाहर पहले से मौजूद लोगों में भ्रम, निराशा और अराजकता पैदा हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, गेट पर भीड़ बेचैन थी, लेकिन स्थिति तब और बिगड़ गई जब गेट प्रबंधन के लिए जिम्मेदार आयोजक/RCB/DNA/KSCA उचित समय पर गेट नहीं खोल पाए। आयोजकों के खराब मैनेजमेंट की वजह से भीड़ गेट संख्या 1, 2 और 21 को तोड़कर स्टेडियम में घुस गई। स्टेडियम के गेट संख्या 02, 2A, 6, 7, 15, 17, 18, 20 और 21 पर भगदड़ की छिटपुट घटनाएं हुईं। इन गेटों पर और उसके आसपास के पुलिसकर्मियों ने तुरंत और प्रभावी ढंग से स्थिति पर नियंत्रण पाया और नुकसान को कम करने की कोशिश की।
विक्ट्री परेड में भारी भीड़ उमड़ पड़ी
राज्य सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, आरसीबी हैंडल्स के पोस्ट्स को कुल 44 लाख बार देखा गया। नतीजा ये हुआ कि विक्ट्री परेड के लिए 3 लाख से भी ज्यादा लोगों की भीड़ जमा हो गई। सरकार की रिपोर्ट में भीड़ का अनुमान लगाने के लिए बेंगलुरु मेट्रो में यात्रियों की संख्या का जिक्र किया गया है। सरकार के मुताबिक, 4 जून को 9.66 लाख लोगों ने यात्रा की, जबकि सामान्य दिन यह संख्या 6 लाख होती है। इसके अलावा काफी लोग पैदल, सार्वजनिक वाहनों और निजी वाहनों का इस्तेमाल करके पहुंचे। ऐसे में अनुमानित भीड़ 3 लाख से अधिक होगी।
मार्च क्यों नहीं किया गया रद्द
रिपोर्ट में कहा गया है कि भगदड़ के बाद विक्ट्री परेड को इसलिए रद्द नहीं किया गया, क्योंकि स्टेडियम में अचानक इसे बंद करने से भीड़ हिंसक हो सकती थी और इससे शहरभर की कानून व्यवस्था खराब हो सकती थी। कार्यक्रम को रद्द करने के बजाय कड़ी निगरानी के साथ इसे काफी छोटा करने का फैसला किया गया।

