ISRO लॉन्च करेगा NavIC का NVS-03 सैटेलाइट: भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम अभी फुली वर्किंग नहीं; इसकी जरुरत क्यों?
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यह मिशन श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। NVS-03 की लॉन्चिंग सफल रहती है, तो NavIC किसी अन्य देश के सैटेलाइट पर निर्भर नहीं होगा। (फाइल फोटो)
नेशनल डेस्क. इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) शुक्रवार रात 11.51 बजे नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 की लॉन्चिंग करेगा। यह सैटेलाइट भारत के Navigation with Indian Constellation (NavIC) सिस्टम को सपोर्ट करेगा। यह इंडिया का अपना खुद का नेविगेशन सिस्टम है। अभी NavIC विदेशी सिस्टम की मदद से काम कर रहा है।
NVS-03 की लॉन्चिंग के बाद यह किसी अन्य देश के सैटेलाइट पर निर्भर नहीं होगा। यह मिशन श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा।
कई बार आईं दिक्कतें
यह प्रोजेक्ट लगातार दिक्कतों से घिरा रहा है। कभी एटॉमिक क्लॉक खराब हुईं, तो कभी लॉन्च के समय एक सैटेलाइट गायब हो गया। एक अन्य सैटेलाइट अपनी तय ऑर्बिट तक कभी न पहुंच सका।
GPS अमेरिका का खुद का सिस्टम है, यह लोकेशन, दिशा और सही समय बताने का काम करता है। भारत ने अपना खुद का नेविगेशन NavIC सिस्टम डेवलप किया है। जिससे भारत को किसी देश पर निर्भर न रहना पड़े। खासतौर पर जब पूरी दुनिया में उथलपुथल मची हुई है।
जुलाई में सरकार ने संसद में कहा था- अभी इस सिस्टम के तीन सैटेलाइट नेविगेशन सिग्नल भेज रहे हैं। हालांकि अभी भी एक सैटेलाइट की कमी है। लेकिन फिर ये किसी भी जगह का सही समय बताने के लिए काफी हैं।
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NavIC की जरुरत क्यों
दुनिया के ज्यादातर बड़े देशों के पास अपने खुद के सिस्टम हैं। अमेरिका के पास ग्लोबल पॉजिशिनिंग सिस्टम (GPS), रुस के पास ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (Glonass), यूपोर का Galileo और चीन का BeiDou Navigation Satellite System सिस्टम है। जापान के पास रीजनल सिस्टम Quasi-Zenith Satellite System (QZSS)। भारत ने Navigation with Indian Constellation (NavIC) सिस्टम डेवलप किया है।
अमेरिका का GPS और रूस का Glonass को वहां की डिफेंस एजेंसी इस्तेमाल करती है। इस वजह से आम लोगों को इसकी सर्विस कम या फिर किसी समय के लिए इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाती है। NavIC भारत का इंडेपेंडेट रीजनल सिस्टम है। यह किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं है। यह सिस्टम भारतीय क्षेत्र में नेविगेशन सर्विस देता है। यह पूरी तरह से भारत सरकार के कंट्रोल में है। इस सैटेलाइट की लॉन्चिंग के बाद यह अपने खुद के सैटेलाइट पर काम करेगा।
2006 में सरकार ने प्रोजेक्ट को दी थी मंजूरी
1999 के कारगिल वॉर में अमेरिका ने GPS की सेवाएं रोक दी थी। विदेशी सिस्टम पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार ने मई 2006 में इंडिजिनियस सिस्टम को मंजूरी दी थी। यह सिस्टम नेविगेशन सिग्नल के अलावा, एटॉमिक क्लॉक समय भी बताती हैं।
बैंक, स्टॉक एक्सचेंज और सुरक्षाबलों के लिए एक मिली सेकंड का समय भी बेहद मायने रखता है। थोड़ी सी भी गड़बड़ किसी भी ऑपरेशन पर असर डाल सकती है। जून 2025 में सरकार ने कहा कि वह इंडियन स्टैंडर्ड टाइम को जारी रखने के लिए अमेरिका के GPS का इस्तेमाल नहीं करेगी। इसके लिए गुवाहाटी, बैंगलुरु, अहमदाबाद, फरीदाबाद और भुवनेश्वर में मौजूद 5 एटॉमिक क्लॉक का इस्तेमाल किया जाएगा।

