आंध्र प्रदेश: डिप्टी CM बोले- तेलुगु मां तो हिंदी मौसी जैसी: क्षेत्रीय भाषाएं अहम जरूर, लेकिन हिंदी सीखने के आर्थिक फायदे
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आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण। फाइल फोटो।
भाषा विवाद पर जारी विवाद के बीच आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर तेलुगु भाषा हमारी मां है तो हिंदी भी बड़ी मौसी के समान है। उन्होंने पेड्डम्मा शब्द का इस्तेमाल किया। यह एक तेलुगु शब्द है। बड़ी मां (चाची) या मां की बड़ी बहन (मौसी) को संबोधित करने के लिए इस शब्द का प्रयोग किया जाता है।
कल्याण ने कहा कि हमें हिंदी का भी सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी देश की एकता और आर्थिक तरक्की, खासकर साउथ फिल्म इंडस्ट्री के लिए बहुत जरूरी है।
हिंदी भारत को एक सूत्र में जोड़ती है
जाहिर है कि इन दिनों महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में हिंदी को लेकर विरोधी सुर देखने को मिल रहा है। अब हैदराबाद में आयोजित दक्षिण संवाद गोल्डन जुबली फेस्टिवल में पवन कल्याण ने फिर से हिंदी का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि रीजनल लैंग्वेज जैसे तेलुगु, तमिल और कन्नड़ का अपना महत्व है, लेकिन हिंदी पूरे भारत तो एक सूत्र में जोड़ने का काम करती है।

हिंदी सीखने के आर्थिक फायदे भी
पवन कल्याण ने कहा कि हिंदी सीखना या बोलना क्षेत्रीय पहचान के लिए खतरा नहीं है। हिंदी सीखने के आर्थिक फायदे भी हैं। खासकर साउथ फिल्म इंडस्ट्री को। उन्होंने कहा कि कई तेलुगु और साउथ की फिल्में हिंदी में डब होकर पूरे भारत में रिलीज होती हैं और कमाई भी बहुत करती हैं। हम ये तो चाहते हैं कि हमारी फिल्में हिंदी में अच्छा करें और पैसे कमाएं, लेकिन हिंदी सीखना नहीं चाहते।
भाषा को लेकर इस वक्त विवाद ज्यादा
बीतें दिनों महाराष्ट्र में हिंदी-मराठी को लेकर काफी विवाद हुआ। स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य करने को लेकर शिवसेना (उद्धव गुट) और राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने काफी विरोध जताया।
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