विदिशा में सरकारी गेहूं की हेराफेरी: शमशाबाद में 7 लाख का गेहूं जब्त, सिरोंज मामले से जुड़ा हो सकता है कनेक्शन
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शमशाबाद मंडी में सरकारी गेहूं से भरा ट्रक जब्त।
विदिशा। सिरोंज कृषि मंडी में सरकारी गेहूं की जब्ती के एक दिन बाद अब शमशाबाद मंडी में भी प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। यहां सरकारी पैकिंग और टैगिंग वाले गेहूं से भरा ट्रक पकड़ा गया है। गेहूं की बोरियों पर भगवानपुर सहकारी समिति की पर्चियां लगी मिली हैं। प्रारंभिक जांच में गेहूं वर्ष 2022-23 का बताया जा रहा है। जब्त गेहूं की कीमत करीब 7 लाख रुपए आंकी गई है।
ट्रक से दूसरे ट्रक में पलटी किया जा रहा था गेहूं
जानकारी के मुताबिक, शमशाबाद मंडी में गल्ला व्यापारी उमेश ट्रेडिंग कंपनी के यहां एक ट्रक से दूसरे ट्रक में गेहूं पलटी किया जा रहा था। इसी दौरान प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और गेहूं से भरे ट्रक को जब्त कर लिया।जांच के दौरान नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी ने गेहूं की बोरियों की जांच की। इसमें सरकारी पैकिंग और टैगिंग होने की पुष्टि हुई। बोरियों पर भगवानपुर सहकारी समिति की पर्चियां भी लगी मिलीं।
ड्राइवर ने व्यापारी का बताया गेहूं
प्रशासन ने गेहूं से भरे ट्रक को जब्त कर एसडीएम कार्यालय पहुंचाया है। पूछताछ में ट्रक चालक वसीम ने गेहूं को शमशाबाद के व्यापारी मनु माहेश्वरी का बताया है।जब्त गेहूं की कीमत करीब 7 लाख रुपए बताई जा रही है। मामले में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मंडी अध्यक्ष का नाम भी सामने आने की चर्चा
पूरे मामले में शमशाबाद मंडी अध्यक्ष प्रदीप माहेश्वरी का नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। प्रशासन की जांच के बाद ही मामले में वास्तविक भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
सिरोंज में भी भगवानपुर समिति का गेहूं पकड़ा था
शमशाबाद में जब्त किए गए ट्रक की गेहूं की बोरियों पर भगवानपुर सहकारी समिति की पर्चियां मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। खास बात यह है कि एक दिन पहले सिरोंज कृषि मंडी में भी इसी समिति का सरकारी गेहूं पकड़ा गया था। वहां प्रशासन ने करीब 580 बोरी गेहूं जब्त किया था।अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि भगवानपुर समिति का सरकारी गेहूं सिरोंज और शमशाबाद तक कैसे पहुंचा। क्या दोनों मामलों के बीच कोई कनेक्शन है और सरकारी गेहूं को निजी माल के रूप में क्यों ले जाया जा रहा था, इसकी जांच की जा रही है।
स्टॉक और दस्तावेजों की जांच
प्रशासन अब समिति के स्टॉक रजिस्टर, गेहूं की आवक-जावक, परिवहन दस्तावेज, संबंधित बैंक लेन-देन और व्यापारियों की भूमिका की जांच कर सकता है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी गेहूं की हेराफेरी में कौन-कौन लोग शामिल हैं और गेहूं निजी कारोबार तक कैसे पहुंचा।सवाल यह है कि सरकारी गेहूं का यह खेल सिर्फ सिरोंज और शमशाबाद तक सीमित है या इसके तार कहीं और तक जुड़े हैं? प्रशासन की आगे की जांच से इसका खुलासा होने की उम्मीद है।
पूरन लाल मंडी निरीक्षक

