कांग्रेस MLA को सुप्रीम कोर्ट से राहत: जबलपुर हाईकोर्ट के FIR के आदेश पर रोक; फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कॉलेज संचालन का आरोप
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आरिफ मसूद के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने और SIT गठन के निर्देश दिए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। (फाइल)
गैरकानूनी तौर पर कॉलेज संचालन के मामले में फिलहाल भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ FIR दर्ज नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। मसूद के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने और SIT बनाने के आदेश दिए थे। मसूद ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस JK महेश्वरी और विजय बिश्नोई की बेंच ने जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश के पैरा 13 पर रोक लगाई है। इसमें मसूद और अन्य लोगों पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। पैरा 13 में दिए गए निर्देशों के अनुसार, आगे की कार्रवाई स्थगित रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट की दलील
जस्टिस महेश्वरी ने कहा- इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट यह तय नहीं कर सकता। कहीं न कहीं हमें रुकना होगा। हमने कई ऑर्डर देखे हैं। पहली ही तारीख पर रिकॉर्ड देखे और ऑर्डर पास कर दिया, यह कहां तक उचित है?
जबलपुर हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने कहा था कि कॉलेज चलता रहेगा लेकिन नए दाखिले पर रोक रहेगी। हाईकोर्ट ने कमिश्नर भोपाल को 3 दिन में FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद कोहेफिजा थाने में FIR दर्ज हुई थी। हाईकोर्ट ने कहा था राज्य की ओर से कभी मसूद के खिलाफ कोई FIR दर्ज करने की पहल नहीं की गई। जिम्मेदार अधिकारी का फर्ज था कि वह धोखाधड़ी उजागर होने के तुरंत बाद कार्रवाई करते, उन्होंने ऐसा नहीं किया। आरिफ को अन्य दस्तावेज जमा करने की अनुमति भी दी गई, जैसे कि सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट। ये एक धोखाधड़ी वाला दस्तावेज निकला और 20 साल तक राज्य ने कभी इसको वेरिफाई ही नहीं किया।
क्या है पूरा मामला
आरिफ मसूद भोपाल मध्य से विधायक हैं। मसूद पर कॉलेज की मान्यता के लिए फर्जी दस्तावेज पेश करने का आरोप है। अमन एजुकेशन सोसाइटी के सचिव मसूद पर 20 साल पुरानी धोखाधड़ी का आरोप है। हाईकोर्ट ने पाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कॉलेज संचालित हो रहा था। 1 हजार से अधिक छात्र प्रभावित हुए, लेकिन कॉलेज फिलहाल चलता रहेगा। न्यू एडमिशन प्रॉसेस पर रोक जारी रहेगी।

