सैफ अली खान शत्रु संपत्ति केस: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पटौदी परिवार, भोपाल में ₹15000 करोड़ की शत्रु संपत्ति पर जताया हक
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सैफ अली खान ने भोपाल में ₹15 हजार करोड़ की शत्रु संपत्ति पर जताया हक।
सैफ अली खान के परिवार ने भोपाल में ₹15000 करोड़ की संपत्ति पर हक जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इससे पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि सुनवाई नए सिरे से शुरू करे और एक साल के भीतर निर्णय दें। हालांकि इससे पहले ही सैफ अली खान ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
क्या है पूरा मामला
केंद्र सरकार ने भोपाल में पटौदी परिवार की 15 हजार करोड़ की संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित किया है। 1947 में भोपाल में नवाब हमीदुल्लाह खान का शासन था। उनकी तीन बेटियां थी, जिनमें सबसे बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान 1950 में पाकिस्तान चलीं गई। दूसरी बेटी साजिदा सुल्तान भारत में रहीं और नवाब इफ्तिखार अली खान पटौदी से शादी की। जिनके बेटे मंसूर अली खान ‘टाइगर’ पटौदी थे। सैफ अली खान को भोपाल में कुछ प्रॉपर्टी विरासत में मिली थी। सरकार ने इस संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित किया है। सरकार की तरफ से बताया गया कि आबिदा सुल्तान पाकिस्तान चली गईं है। इसलिए ये संपत्ति शत्रु संपत्ति है।
क्या होती है शत्रु संपत्ति
शत्रु संपत्ति उन संपत्तियों को कहा जाता है जो लोग भारत में अपनी संपत्ति को छोड़कर पाकिस्तान या चीन की नागरिकता लेते है। ये कानून भारत-पाकिस्तान और चीन के साथ युद्ध के बाद अस्तित्व में आया था। सरकार को डिफेंस एक्ट 1962 के तहत शत्रु संपत्ति घोषित करने का अधिकार है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार- 12485 शत्रु प्रॉपर्टी ऐसीं हैं जो लोग भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए और वहां की नागरिकता ले ली, जबकि 126 शत्रु प्रॉपर्टी चीन जाने वाले लोगों की हैं।
शत्रु संपत्ति पर अध्यादेश
पाकिस्तान-चीन से युद्ध के बाद जो लोग भारत में अपनी प्रॉपर्टी छोड़कर गए है। ऐसे लोगों की संपत्ति को सरकार के अधीन करने के लिए 1968 में एक शत्रु संपत्ति अधिनियम लाया गया। शुरु में कई संपत्तियों को डिफेंस एक्ट 1962 के तहत अधिग्रहण किया गया था। 1966 में ताशकंद समझौते में शत्रु संपत्ति को लेकर चर्चा हुई थी। भारत ने शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के तहत इन संपत्तियों पर अपना कब्जा जारी रखा।
ये अधिनियम सरकार को शत्रु संपत्ति की कस्टडी और मैनेजमेंट का अधिकार देता है। जिससे देश के खिलाफ इन संपत्तियों का उपयोग रोका जा सके।
शत्रु संपत्ति (संशोधन) विधेयक, 2016 को संसद में 2017 में पारित किया गया, जिसमें 1968 अधिनियम और 1971 सरकारी स्थान (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम को संशोधित किया गया।संशोधन में स्पष्ट किया गया कि शत्रु संपत्ति सरकार के नियंत्रण में रहेगी, भले ही शत्रु की मूल स्थिति बदल जाए
महमूमाबाद के राजा ने पाक नागरिकता ली
महमूमाबाद के राजा बंटवारे के बाद 1957 में पाकिस्तान चले गए। और वहां की नागरिकता ले ली। लेकिन उनके बेटे और पत्नी यहीं भारत में रहे। सरकार ने राजा की संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में उनके बेटे के पक्ष में फैसला आया। कोर्ट ने कहा कि राजा का बेटा भारतीय नागरिक है, इसलिए वह अपने पिता की संपत्ति वापस पाने का अधिकार रखता है। संपत्ति को शत्रु संपत्ति नहीं माना जा सकता है क्योंकि असली वारिस के पास भारत की नागरिकता है।
2005 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों के रिश्तेदारों ने कई दावे किए। सरकार ने ऐसे दावे रोकने के लिए 2010 में अध्यादेश जारी किया। इसके बाद सरकार ने 2017 में शत्रु संपत्ति (संशोधन और मान्यता) अधिनियम पारित किया गया।
चीनी लोगों की शत्रु संपत्ति
भारतीय शत्रु संपत्ति विभाग के आंकड़ों के अनुसार चीनी लोगों से जुड़ी 126 शत्रु प्रॉपर्टी भारत में हैं। ये संपत्ति असम मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और कुछ प्रॉपर्टी महाराष्ट्र में स्थित हैं।
पाकिस्तान नागरिकों की शत्रु 12,485 संपत्तियां
उत्तर प्रदेश- 6,255
पश्चिम बंगाल- 4,088
दिल्ली- 659
गोवा- 295
महाराष्ट्र: 208
तेलंगाना: 158
गुजरात: 151
त्रिपुरा: 105
बिहार: 94
मध्य प्रदेश: 94
छत्तीसगढ़: 78
हरियाणा: 71 संपत्तियां

