‘रील बनाने से ज्यादा रियल प्रॉब्लम सॉल्व करें’: CM मोहन यादव की नए DSP अधिकारियों को दो टूक, 2029 तक MP को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य
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मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों को शील्ड और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया।
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नए पुलिस अधिकारियों को सोशल मीडिया की लोकप्रियता के बजाय आम जनता की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि आज का दौर सोशल मीडिया का है, लेकिन पुलिस अधिकारियों के सामने रील बनाने से ज्यादा जरूरी सामाजिक समस्याओं का समाधान करना है। नए अधिकारी जनता के बीच अपनी ऐसी पहचान बनाएं, जिससे समाज के हर वर्ग का उन पर भरोसा कायम हो। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2029 तक मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य देते हुए पुलिस अधिकारियों से ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने का आह्वान भी किया।
48 नए DSP अधिकारियों ने पूरी की ट्रेनिंग, 20 महिला अधिकारी भी शामिल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार, 3 नवंबर को भोपाल के भौंरी स्थित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के परेड ग्राउंड में आयोजित 44वें और 45वें बैच के उप पुलिस अधीक्षकों (DSP) के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने परेड की सलामी ली और निरीक्षण किया। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले 48 प्रशिक्षु अधिकारियों को पुलिस सेवा में प्रवेश के लिए शुभकामनाएं दीं। इनमें 20 महिला अधिकारी भी शामिल हैं। समारोह में मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों को शील्ड और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को आज 48 नए जनसेवक मिले हैं, जो साढ़े आठ करोड़ जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालेंगे।
कमजोर और जरूरतमंद लोगों के लिए देवदूत बनें पुलिस अधिकारी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस की असली पहचान सोशल मीडिया पर लोकप्रियता से नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के समाधान और उसके प्रति संवेदनशील व्यवहार से बनती है। अधिकारियों को सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन उन्हें सामाजिक समस्याओं को समझने और उनका निराकरण करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी ऐसे बनें, जिनका सम्मान समाज के सभी वर्गों में समान रूप से हो। विशेष रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों के लिए देवदूत बनकर काम करें। जनता के विश्वास को बनाए रखना ही पुलिस सेवा की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

डाकुओं और नक्सलवाद के बाद अब ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक जंग
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश पुलिस के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की पुलिस ने हमेशा बड़ी चुनौतियों का सामना किया है। आजादी के बाद चंबल से लेकर रीवा अंचल तक डाकुओं की समस्या गंभीर रही, लेकिन पुलिस ने साहस और रणनीति के दम पर इस चुनौती का सफलतापूर्वक मुकाबला किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी अंचलों में नक्सलवाद भी लंबे समय तक विकास की राह में बाधा बना रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प और पुलिस जवानों के साहस से प्रदेश ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्धारित समय से पहले सफलता हासिल की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश पुलिस के सामने नशे के अवैध कारोबार और ड्रग्स नेटवर्क को खत्म करने की बड़ी चुनौती है। वर्ष 2029 तक मध्यप्रदेश से नशे की समस्या का सफाया करना सरकार का लक्ष्य है। इस अभियान में नए पुलिस अधिकारियों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
‘जीवन ऐसा बनाएं कि मृत्यु भी गौरवान्वित करे’
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों को कर्तव्यनिष्ठा, साहस और ईमानदारी का संदेश देते हुए कहा कि समय के साथ अपराधों के तरीके बदल रहे हैं। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को नई तकनीकों और बदलती चुनौतियों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।
उन्होंने कहा कि परमात्मा ने जीवन एक बार दिया है और मृत्यु सभी को आनी है। इसलिए जीवन ऐसा बनाना चाहिए कि मृत्यु भी उसे गौरवान्वित करे। पुलिस अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी गंभीरता और निष्ठा के साथ करना चाहिए।
पुलिस विभाग में 22,500 पदों पर भर्ती का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के कल्याण और सुविधाओं को लेकर भी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में पुलिस विभाग में 17 हजार 710 पदों पर भर्ती की गई है। सरकार का लक्ष्य कुल 22 हजार 500 पदों पर भर्ती करने का है।
इसके अलावा पुलिस विभाग में पदोन्नति के माध्यम से भी अधिकारियों और कर्मचारियों को लाभ पहुंचाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों की सुविधाओं और कल्याण की चिंता करना सरकार की जिम्मेदारी है।
पुलिस अकादमी में 12 करोड़ रुपये से होंगे विकास कार्य
दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री ने भोपाल की पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य कराने की घोषणा की। इसके तहत आधुनिक ऑडिटोरियम का निर्माण, विद्युत सब स्टेशन की स्थापना और एक किलोमीटर लंबी एप्रोच रोड बनाई जाएगी।
इन सुविधाओं से अकादमी के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को बेहतर प्रशिक्षण वातावरण उपलब्ध हो सकेगा।
पहली बार रेडियो संवर्ग के DSP को भी मिला प्रशिक्षण
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वर्दीधारी सेवाओं में पासिंग आउट परेड हर अधिकारी के जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है। वर्ष 2014 से डीएसपी स्तर के अधिकारियों का प्रशिक्षण भोपाल के भौंरी स्थित पुलिस अकादमी में कराया जा रहा है।
इस बार प्रशिक्षण पूरा करने वाले 48 अधिकारियों में 20 महिला अधिकारी शामिल हैं। पहली बार रेडियो संवर्ग के डीएसपी स्तर के अधिकारियों को भी अकादमी में प्रशिक्षण दिया गया है। ये अधिकारी पुलिस विभाग की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के साथ साइबर अपराधों से निपटने में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे। प्रशिक्षु अधिकारियों में 22 इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं।
साइबर अपराध रोकने के लिए मजबूत होगी पुलिस की तकनीकी क्षमता
डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध पुलिस के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। आम नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के लिए 'सेफ क्लिक' अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रदेश में साइबर थानों, साइबर हेल्प डेस्क, साइबर फॉरेंसिक और साइबर हेल्पलाइन जैसी सुविधाओं को मजबूत करना जरूरी है। इसके साथ ही फील्ड में तैनात पुलिस अधिकारियों को जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। ड्यूटी के साथ पुलिसकर्मियों की अपनी सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।
नक्सल विरोधी अभियान के 63 पुलिसकर्मियों को मिलेगा आउट ऑफ टर्न प्रमोशन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नक्सल विरोधी अभियान में साहस और वीरता दिखाने वाले 63 पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बहादुर जवानों ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में असाधारण साहस का परिचय दिया है। सरकार उनके योगदान और बलिदान को हमेशा याद रखेगी।
मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक को प्रदेशभर में अवैध शराब के कारोबार और शराब माफियाओं के खिलाफ भी निडर होकर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
2029 तक नशामुक्त मध्यप्रदेश बनाने की बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री और डीजीपी के संबोधन से स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश पुलिस की प्राथमिकताओं में नशे के नेटवर्क को खत्म करना, साइबर अपराधों पर नियंत्रण, अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई और आम जनता की सुरक्षा प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।
सरकार ने वर्ष 2029 तक प्रदेश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। अब देखना होगा कि नए पुलिस अधिकारी इस लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए किस तरह प्रभावी रणनीति और कार्रवाई को अंजाम देते हैं।
डॉ मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश
डॉ मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश
डॉ मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश

