'जिस पर लगाए हैरेसमेंट के आरोप, उसी को बनाया हाईकोर्ट जज': एमपी की सिविल जज ने दिया इस्तीफा, बोलीं- न्याय रास्ता भटक गया है
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मध्य प्रदेश में एक महिला सिविल जज ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने एक डिस्ट्रिक्ट जज को एमपी हाईकोर्ट में सीनियर जज अपॉइंट किए जाने के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया। महिला जज का आरोप है कि जिस शख पर हैरेसमेंट और कदाचार के आरोप हैं, उसे ही प्रमोट करके हाईकोर्ट का जज बना दिया गया है।
चीफ जस्टिस ऑफ एमपी को लिखा पत्र
बार एंड बेच की रिपोर्ट के मुताबिक, सिविल जज अदिति कुमार शर्मा ने चीफ जस्टिस ऑफ मध्यप्रदेश को लिखे अपने त्यागपत्र में कहा है कि न्याय रास्ता भटक चुका है। मैं अपने पूरल मोरल स्ट्रेंथ के बावजूद अंदर से टूटी हुई हूं। मैं ज्युडिशियल सर्विस से इस्तीफा दे रही हूं, इसलिए नहीं कि मेरा न्याय से भरोसा उठ चुका है, बल्कि इसलिए कि उसी संस्थान में न्याय अपना रास्ता भटक चुका है, जिसपर इसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी थी।
जिसे समन भेजना था, उसे प्रोमोट किया गया
जूनियर डिविजन सिविल जज अदिति कुमार शर्मा ने अपना त्यागपत्र 28 जुलाई को लिखा था। जज अदिति कुमार शर्मा ने लिखा- कई साल तक मुझे परेशान किया गया। मैंने हर तरीका अपनाया जिससे मुझे न्याय मिल सके। कुछ नहीं तो कम से कम इस पर सुनवाई तो होती। जिस व्यक्ति ने मुझे परेशान किया, उयसे कभी सवाल नहीं पूछे गए। उलटा उसे इसका इनाम दिया गया, उसे प्रमोट करने की सिफारिश की गई। उसे समन भेजन के बजाय प्रोमोट किया गया।
महिला जज का दावा- फैक्ट के आधार पर आरोप लगाए
जज ने इस्तीफे में लिखा है- मैंने डॉक्यूमेंट्स और फैक्ट के आधार पर आरोप लगाए। हालांकि, कोई पूछताछ नहीं हुई। ना ही नोटिस जारी किया गया। इतना ही नहीं उस शख्स से स्पष्टीकरण तक भी नहीं मांगा गया। न कोई पूछताछ। न कोई नोटिस। न कोई सुनवाई। न कोई जवाबदेही। ऐसे शख्स को हाईकोर्ट में प्रमोट करना न्याय शब्द के साथ एक मजाक है।
उसी सिस्टम से टूटी जहां से न्याय के बारे में सीखा
महिला जज ने इस्तीफे में लिखा है- आप इसे अपने आकाईव में एक रिमाइंडर के तौर पर रखें, कि मध्य प्रदेश की एक महिला जज ने न्याय को सबकुछ दिया। वह उसी सिस्टम से टूट गई जिसने उसे न्याय के बारे में सारी बातें सिखाई। आपने वहीं पर न्याय नहीं किया जहां से न्याय की सबसे ज्यादा उम्मीद की जाती है।
कई दूसरे मामलों का भी जिक्र किया
महिला जज ने कहा है कि वहन इकलौती ऐसी शख्स नहीं है जिसने जज के खिलाफ शिकायत की है। एक दलित जज ने भी उस जज पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया था। एक प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज ने उसी जज के खिलाफ पब्लिकली गाली देने, धमकी देने और हाईकोर्ट के जजों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। हालांकि, इन मामलों में भी कोई जांच नहीं हुई।

