मुरैना में अधूरी पेयजल योजनाओं को लेकर प्रशासन सख्त: ठेकेदारों को समय पर काम पूरी करने के निर्देश, ठेकेदार संघ ने PHE अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल
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PHE विभाग के अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर सवाल
मुरैना। जिले में जल जीवन मिशन के तहत अधूरी पड़ी पेयजल योजनाओं को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए अपर सचिव और जिला कलेक्टर ने बैठक आयोजित की, जिसमें ठेकेदारों सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में कार्यों में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए ठेकेदारों को निर्धारित समय-सीमा में योजनाओं का काम पूरा करने के निर्देश दिए गए।
PHE विभाग के अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर सवाल
वहीं, बैठक के दौरान ठेकेदार संघ के अध्यक्ष कुंज बिहारी शर्मा ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024-25 में सिपेट योजना के अंतर्गत जिन आठ फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया था, उन्हें दोबारा ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी की जा रही है।
ठेकेदारों पर कार्रवाई, अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल
ठेकेदार संघ अध्यक्ष कुंज बिहारी शर्मा का आरोप है कि जल जीवन मिशन की योजनाओं के टेंडर विभागीय अधिकारियों ने स्वीकृत किए थे। योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन में भी विभाग की अहम भूमिका थी। इसके बावजूद कार्रवाई का सामना ठेकेदारों को करना पड़ रहा है।
ठेकेदार संघ का सवाल- खामियां सामने आने पर विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच हो
शर्मा ने सवाल उठाया कि यदि योजनाओं के काम में अनियमितताएं या खामियां सामने आई हैं, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जबकि अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अधूरी योजनाओं पर अपर सचिव ने जताई चिंता
समीक्षा बैठक में अपर सचिव वी.एस. चौधरी ने जल जीवन मिशन की अधूरी योजनाओं और कार्यों में हो रही देरी की समीक्षा की। उन्होंने ठेकेदारों को निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा करने की हिदायत दी। प्रशासन का उद्देश्य अधूरी पेयजल योजनाओं को पूरा कराकर लोगों तक पेयजल सुविधा पहुंचाना है।
आठ फर्मों की ब्लैकलिस्टिंग पर फैसला अहम
अब इस मामले में आठ फर्मों को दोबारा ब्लैकलिस्ट करने की कथित तैयारी और ठेकेदार संघ की ओर से लगाए गए आरोपों पर विभाग का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा। साथ ही यह भी देखना होगा कि योजनाओं में देरी के लिए ठेकेदारों के साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
कुंज बिहारी शर्मा, अध्यक्ष, ठेकेदार संघ

