जबलपुर के दिव्यांग बच्चों के हुनर से रोशन होगी दिवाली: मिट्टी के दीये बनाकर दिखा रहे प्रतिभा, बिक्री की राशि से पूरी होंगी शिक्षा और त्यौहार की जरूरतें
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जबलपुर के दिव्यांग बच्चे बना रहे दीये, हुनर से रोशन होगी दिवाली
जबलपुर। दीपावली खुशियों और रोशनी का त्यौहार है। इस बार जबलपुर के दिव्यांग बच्चे अपनी मेहनत और हुनर से इस त्यौहार को खास बना रहे हैं। वंदन पुनर्वास एवं अनुसंधान संस्थान के छात्र-छात्राएं अपने हाथों से मिट्टी के दीये और सजावटी सामान तैयार कर रहे हैं। इन बच्चों के बनाए दीये घरों को रोशन करने के साथ उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर बनने के सपने को भी नई उम्मीद दे रहे हैं।
रंगों और डिजाइनों से सजा रहे मिट्टी के दीये
संस्थान में पढ़ने वाले बच्चे दीपावली से कई दिन पहले ही दीये बनाने की तैयारी शुरू कर देते हैं। शिक्षक और शिक्षिकाएं उन्हें मिट्टी के दीये बनाना, उनमें रंग भरना और आकर्षक डिजाइन तैयार करना सिखाते हैं। बच्चे पूरे उत्साह और लगन के साथ दीयों को सजाते हैं। उनके हाथों से तैयार सजावटी सामान को संस्थान में आने वाले लोग भी पसंद कर रहे हैं और खरीदकर उनका उत्साह बढ़ा रहे हैं। बच्चों का कहना है कि उन्हें दीपावली के लिए दीये बनाना अच्छा लगता है। वे चाहते हैं कि उनके बनाए दीपक हर घर के आंगन को रोशन करें।
बच्चों की क्षमता के अनुसार दिया जा रहा प्रशिक्षण
मध्यप्रदेश शासन से मान्यता प्राप्त वंदन पुनर्वास एवं अनुसंधान संस्थान में बच्चों को उनकी जरूरत और क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है। शिक्षक-शिक्षिकाएं बच्चों को टैक्टाइल यानी स्पर्श आधारित तरीके, सांकेतिक भाषा और दूसरे संकेतों के माध्यम से अलग-अलग काम सिखाते हैं। दीये बनाने के अलावा उन्हें कई अन्य रचनात्मक और उपयोगी गतिविधियों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों को हुनरमंद बनाना है, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें और अपने परिवार का सहारा बनें।
दीयों की कमाई से पूरी होती हैं बच्चों की खुशियां
बच्चों द्वारा बनाए गए दीयों की बिक्री से जो राशि मिलती है, उसका उपयोग उनकी जरूरतों और खुशियों के लिए किया जाता है। इसी राशि से बच्चों की शिक्षा, दीपावली पर मिठाई, कपड़े और दूसरी जरूरी व्यवस्थाएं की जाती हैं। यही वजह है कि बच्चे पूरे उत्साह के साथ दीये तैयार करते हैं। उनके लिए यह सिर्फ त्यौहारकी तैयारी नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी है।
हुनर की रोशनी से समाज को दे रहे संदेश
दीपावली पर जब लोग अपने घरों को सजाने के लिए दीये खरीद रहे हैं, तब जबलपुर के इन बच्चों के हाथों से बने दीपक समाज को एक खास संदेश दे रहे हैं। ये बच्चे साबित कर रहे हैं कि शारीरिक चुनौतियां हुनर और सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं। सही प्रशिक्षण, अवसर और प्रोत्साहन मिले तो हर बच्चा अपनी पहचान बना सकता है।
अभय प्रकाश
ब्रजेश कुमार

