जेल नहीं मौज: जबलपुर में इलाज के नाम पर अस्पताल में आराम की जिंदगी बिता रहा कैदी, 6 करोड़ गबन के आरोपी का वीडियो वायरल
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हॉस्पिटल में जबलपुर सेंट्रल जेल के कैदी का मोबाइल पर बात करते हुए वीडियो वायरल
जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के एक वीडियो ने मध्य प्रदेश पुलिस और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में श्रवण कुमार चौकसे नाम का कैदी अस्पताल में आराम फरमाते और मोबाइल चलाते नजर आ रहा है।श्रवण 6 करोड़ से अधिक रुपए के गबन के मामले में नेता जी सुभाष चन्द्र बोस सेंट्रल जेल का विचाराधीन कैदी है।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैदी श्रवण आराम से बेड पर लेट कर बेधड़क मोबाइल पर बात कर रहा है। वीडियो मंगलवार (5 अगस्त) का बताया जा रहा है।
जेल प्रशासन और डॉक्टर पर मिलीभगत के आरोप
आमतौर पर गंभीर से गंभीर बीमारी का कैदी मरीज किसी भी अस्पताल में ज्यादा से ज्यादा 30 दिन तक रहता है और डॉक्टर इलाज के बाद जेल भेज देता है। राज एक्सप्रेस को अस्पताल के स्टाफ से मिली जानकारी के मुताबिक, श्रवण 2 महीने से ज्यादा समय से अस्पताल में भर्ती है।
मरीजों की भीड़ भाड़ के बीच कार्डियो वार्ड में इस तरह किसी कैदी को लंबे समय तक रखना कई सवाल खड़े कर रहा है। वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन, पुलिस प्रशासन, मेडिकल प्रबंधन और डॉक्टर पर आरोपी से सांठगांठ के आरोप लगाए जा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
एक्स सर्विसमैन सिक्योरिटी फोर्स कंपनी के संचालक अमरजीत सिंह ने श्रवण कुमार चौकसे पर करोड़ों के गबन के आरोप लगाए थे।
दरअसल, अमरजीत सिंह ने जबलपुर के गोरखपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी कंपनी में वर्ष 2015 से काम करने वाला सुपरवाइजर श्रवण कुमार चौकसे ने कंपनी का फर्जी समझौता नामा तैयार करवा कर गबन किया।
श्रवण कुमार ने अपने और अपनी पत्नी के खाते में 6 करोड़ 33 लाख 14 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिया थे। इसके बाद में श्रवण कुमार ने अमरजीत सिंह को 55 लाख रुपए वापस भी किए गए थे।
मामले की जांच करने पर पुलिस ने यह पाया कि श्रवण कुमार चौकसे ने वर्ष 2022 में अकाउंट में कुल ढाई करोड रुपए ट्रांसफर कर राशि का गबन किया है।
इसके बाद 11 दिसंबर 2024 थाना गोरखपुर में सुपरवाइजर श्रवण कुमार चौकसे के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया था। वीडियो वायरल होने के बाद शिकायतकर्ता ने जेल प्रबंधन और अस्पताल प्रबंधन पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।
इस तरह के कई मामले
सूत्रों ने राज एक्सप्रेस को बताया, श्रवण कुमार ही नहीं, शहर के शासकीय अस्पतालों में भी कई आरोपी इलाज के नाम मोटी रकम थमाकर जेल से बाहर हैं। इन सभी मामलों में जेल स्टाफ पर मोटी रकम लेकर सहयोग करने के आरोप हैं।
जेल प्रशासन ने डॉक्टर पर फोड़ा ठीकरा
इस पूरे मामले को लेकर उप जेल अधीक्षक मदन कमलेश का कहना है कि आरोपी हॉस्पिटल के सुपरविजन में भर्ती है डॉक्टर क्यों डिस्चार्ज नहीं कर रहे, यह डॉक्टर जाने।
डॉक्टर की जिम्मेदारी केवल इलाज : मेडिकल कॉलेज डीन
इस मामले में नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के डीन नवनीत सक्सेना का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर की जिम्मेदारी केवल इलाज करना होती है वह चाहे कैदी हो या फिर आम मरीज हो, हमारा काम इलाज करना है। वही सुरक्षा और बाकी जवाबदारी हमारी नहीं पुलिस की होती है।
सेंट्रल जेल जबलपुर के आंकड़े
- जेल के अंदर बंदियों की संख्या 3100
- अस्पताल में भर्ती कैदियों की संख्या 60-70
- अंडर ट्रायल के बंदियों की संख्या 1200
- एच आई वी ग्रस्त बंदियों की संख्या 30
- कैंसर ग्रस्त बंदियों की संख्या 04
- मानसिक रोग बंदियों की संख्या 65
जबलपुर से दिव्यांशु विश्वकर्मा की रिपोर्ट।

