काबिल अफसर थे टीआई दिलीप पुरी: शिक्षक की नौकरी छोड़ पुलिस सेवा में आए, कई जिलों में संभाली थानों की कमान
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शिक्षक से शुरू हुआ था सफर, फाइल फोटो।
धार। देवास जिले के खातेगांव में रविवार मध्यरात्रि ड्यूटी के दौरान शराब माफिया ने कुचलकर बरमंडल के लाल टीआई दिलीप पुरी की हत्या कर दी। पुलिस महकमे में उनकी पहचान एक काबिल और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में थी। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले दिलीप पुरी ने शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया था। बाद में पुलिस उपनिरीक्षक के पद पर चयनित होकर उन्होंने पुलिस सेवा में कदम रखा और प्रदेश के कई जिलों में अपनी सेवाएं दीं।
पढ़ाई में मेधावी थे दिलीप पुरी
दिलीप पुरी का जन्म 21 सितंबर 1981 को धार जिले के बरमंडल में सदर बाजार निवासी ओमप्रकाश पुरी के घर हुआ था। उन्होंने वर्ष 1997 में गांव के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद धार के पीजी कॉलेज से बीएससी और एमएससी गणित की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 1996-97 में गांव के सरस्वती शिशु मंदिर में आचार्य के रूप में विद्यार्थियों को पढ़ाया। इसके बाद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरमंडल और राजोद के सूरज कॉन्वेंट स्कूल में भी शिक्षक के तौर पर सेवाएं दीं। वर्ष 2006-07 में बदनावर तहसील के बखतपुरा गांव में माध्यमिक शिक्षक के पद पर उनका चयन हुआ।
पुलिस सेवा में चयन के बाद कई जिलों में दी सेवाएं
शिक्षक की नौकरी के दौरान पुलिस उपनिरीक्षक की भर्ती निकली तो दिलीप पुरी ने आवेदन किया। कड़ी तैयारी के बाद उन्होंने लिखित और शारीरिक परीक्षा पास की और चयनित हुए। वर्ष 2006-07 में उनकी पहली नियुक्ति जबलपुर जिले में हुई। इसके बाद उन्होंने अलीराजपुर जिले के चांदपुर, सोंडवा, सौरवा और उदयगढ़ में थाना प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली। बालाघाट में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद निरीक्षक पद पर पदोन्नति हुई। इसके बाद सतना जिले के रामनगर और अमरपाटन थानों की कमान संभाली।
प्रदेश के कई थानों में संभाली जिम्मेदारी
दिलीप पुरी ने इंदौर में आजाद नगर, महू, चंदन नगर और हीरानगर थानों में सेवाएं दीं। खंडवा में छैगांव माखन और कोतवाली थाने की जिम्मेदारी संभाली। बड़वानी जिले में राजपुर, जुलवानिया और सेंधवा में थाना प्रभारी रहे। देवास जिले में कुछ महीने पहले ही उन्हें सतवास थाने की जिम्मेदारी मिली थी। वर्तमान में वे खातेगांव थाना प्रभारी के पद पर कार्यरत थे। कर्तव्य के प्रति सजगता और काम के प्रति समर्पण के चलते उनकी गिनती एक काबिल पुलिस अधिकारी के रूप में होती थी।
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